Sunday, 30 December 2018

VIJAY GADH :- A MYSTERIOUS FORT

Vijay gadh is a historic heritage fort of 400 ft. high in sonebhadra district of uttar pradesh, a state of india. Half of the area is surrounded by kaimur's step hills.
According to historians, it was constructed in the fifth century by the col kings. This 400 feet high reclues is 30 kilometers from robertsgujs district in MOUKAL village.
It's main feature is cave painting, inscriptions, sculptures and perennial ponds. At the main gate is the site of a Muslim saint Syed jain ul Aabdin Mir sahib. Who is famous by the name of Hazrat Miran sahib baba. The urs fair is organized every year in the month of April. There are two lakes near this fort which are known as RAM SAGAR and MIR SAGAR  among them are the '''RUNG MAHAL" where beautiful etching is engraved.
The place where waters comes from here very much a matter of surprise,despite the fact that the secluded is in a high attitude. Two main reservoirs,Ram sagar and Mir sagar water never dries, Which is a mystery only. The depth of the RAMSAGAR has not been realized even today. From this lake the KANWARIYA water is filled with water to offer to water to SHIVALINGS.
This fort build in MAUGAON can also be reached on foot from the road leading up to the stairs. There is also some rare relics of Mahatma Buddha . According to historians,it was constructed in the fifth centuary by the COL KINGS. King CHET SINGH of kashi was occupying this fort till this British period. It is mentioned by the chandels that assuming the rule of the king here.

This is the same fort on which the great Novelist DEVIKINANDAN KHATRI wrote the CHANDRAKANTA novel. Princess CHANDRAKANTA was the only princess of vijay vadh . According to the story of novel  veer VIRENDRA SINGH, the prince of NAWGADH (CHANDAULI) had fallen in love with princess CHANDRAKANTA of vijaygadh. And the animosity between the two royal family was famous.

Saturday, 29 December 2018

विजयगढ़ एक रहस्यमयी किला


विजयगढ़ किला
विजयगढ़ किला , भारतवर्ष के एक राज्य उत्तरप्रदेश के सोनभद्र ज़िले में स्तिथ 400 फिट ऊंचा एक ऐतिहासिक धरोहर है। इसका आधा क्षेत्र कैमूर की खड़ी पहाड़ियों से घिरा हुआ है। इतिहासकारो के मुताबिक इसका निर्माण पांचवी सदी में कोल राजाओं के द्वारा हुआ था। 400 फिट ऊंचे इस रहस्मयी किला मऊकला ग्राम में रॉबर्ट्सगंज जिले से 30 किलोमीटर की दूरी पर है।
राम सागर सरोवर
इसकी मुख्य विशेषता इसमे बने हुए गुफा चित्र, शिलालेख, मूर्तियां और बारहमासी तालाब है। मुख्य द्वार पर एक मुस्लिम संत सैय्यद जैन उल आबदीन मीर साहिब का स्थल है। जो हज़रत मीरान साहब बाबा के नाम से विख्यात हैं। यही पर प्रत्येक वर्ष उर्स मेला का आयोजन अप्रैल माह में किया जाता है। इस किले के नज़दीक दो सरोवर है जिन्हें 'राम सागर' और 'मीर सागर' के नाम से जाना जाता हैं। जिनके मध्य "रंग महल " है जिनमे खूबसूरत नक़्क़ाशी उकेरे हुए है।  
यहाँ के सप्त सरोवर अत्याधिक ऊँचाई पर होने के वाबजूद यहाँ पर जल कहाँ से आता है आश्चर्य का विषय है। दो मुख्य सरोवर राम सागर और मीर सागर जा जल कभी नही सूखता है। जो एक रहस्य ही है। रामसागर की गहराई का अंदाज़ा आज भी नही हुआ है। इसी सरोवर से काँवरिया जल भर कर शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। 
मउगांव में बने इस किले तक सड़क के अतिरिक्त सीढ़ीनुमा रास्ते से भी पैदल जाया जा सकता हैं। यहाँ महात्मा बुद्ध के कुछ दुर्लभ अबशेष भी है। इतिहासकारो के अनुसार इसका निर्माण पांचवी सदी में कोल राजाओ ने करवाया था। काशी के राजा चेत सिंह ब्रिटिश काल तक इस किले पर काबिज थे। चंदेलों के द्वारा यहाँ का राज-काज संभालने का उल्लेख है।
यह वही किला है जिस पर महान उपन्यासकार देविकिनन्दन खत्री ने चंद्रकांता उपन्यास लिखा था। राजकुमारी चंद्रकांता विजयगढ़ की ही राजकुमारी थी। और इस उपन्यास के कहानी के अनुसार नवगढ़ (चंदौली) के राजकुमार (नवगढ़-विजयगढ़ के नज़दीक है) वीर वीरेंद्र सिंह को विजयगढ़ के राजकुमारी चंद्रकांता से प्रेम हो गया था। तथा दोनों राजपरिवारों के बीच दुश्मनी विख्यात थी।
स्थानीय निवासियों के अनुसार इस किले के अंदर एक और किला है।जहाँ अकूत खज़ाना गड़ा पड़ा हुआ है। मध्य रात्रि को मशाल लेकर किले की और जाते हुए लोगो को देखा गया है। 


रख रखाव के अभाव में इस अमूल्य धरोहरों को खंडहर में बदलते देर नही लगेगी। पुरातत्व विभाग इस किले की महत्ता और महिमा को धयान में रखते हुए इसे सरश्चित करने का प्रयास करे।
 यहाँ पर ट्रेन और रोडवेज (सरकारी बस) के नाध्यम से पहुंचा जा सकता है।  
रॉबर्ट्सगंज (वर्तमान नाम सोनभद्र) निम्नलिखित ट्रैन के द्वारा जाया जा सकता है।
1. स्वर्णजयंती एक्स. 12874 सप्ताह में तीन दिन नई दिल्ली से रांची 
2. त्रिवेणी लिंक एक्स. 14370 बरेली से सिंगरौली प्रतिदिन
3. सिंगरौली इटरसिटी एक्स. 13345 वाराणसी से सिंगरौली
4. टाटानगर एक्स. 18102 जम्मूतवी से टाटानगर वाया करनाल, अलीगढ़ से होते हुए जाती है।
5. इलाहाबाद चोपन यात्री गाड़ी 53346 :- इलाहाबाद से चोपन 

इसके अलावा सरकारी रोडवेज बस के द्वारा वाराणसी और इलाहाबाद से रॉबर्ट्सगंज अथार्त सोनभद्र पहुँचा जा सकता है। और यहाँ से 30 किलोमीटर की यात्रा प्राइवेट टैक्सी से जाया जा सकता है।

Monday, 24 December 2018

शब्दों के जादूगर:- विमल रॉय


परिणीता" में विमल रॉय ने बंगाल के सादी परिवारिक जीवन की सुगंधित खुशबू से एक परिवार की योग्यता और सार्वभौमिकता को आनन्द से फ़लीभूत किया। " परिणीता " में अशोक कुमार और मीना कुमारी की जोड़ी एक अनिवर्चरनिय है। जब किसी भी भाषाओं में शब्द सीमाओं में घिरकर असहाय और विवश हो जाता है वहाँ पर विमल रॉय ठहर कर तन्मयता से फ़िल्म का अनुसंधान करते है। यह इसलिए भी है कि किसी भी भाषाओं के शब्द का सम्मान करने वाला उनसे बढ़कर कोई फिल्मकार सिनेमा जगत में नही हुआ।
विमल राय का जन्म 12 जुलाई,1909 को सापुर ढाका जिले पूर्वी बंगाल और आसाम में हुआ था। विमल रॉय ने निर्माता निर्देशक बी. एन सरकार की न्यू थिएटर्स (कोलकाता) की कंपनी में बतौर कैमरामैन अपनी फिल्मी जीवन की शुरुआत की थी। स्वभाव से शांत रहने वाले बिमल रॉय को फ़िल्म पत्रकार बुर्जोर खुर्शीदजी करंजिया ने ‘साइलेंट थंडर’ की उपमा दी थी. इतालवी नव-यथार्थवादी सिनेमा से प्रेरित होकर, विटोरियो डी सिका की ‘द साइकिल थीफ’ (1948) देखने के बाद उन्होंने ‘दो बीघा जमीन’ बनाई थी। उन्होंने अपने फिल्मी जीवन में कई पुरस्कार जीते, जिनमें ग्यारह फिल्मफेयर पुरस्कार, दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और कान फिल्म समारोह का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। उनकी फिल्म ‘मधुमती’ ने 1958 में नौ फिल्मफेयर पुरस्कार जीते, जो सैंतीस सालों तक रिकॉर्ड था। उन्होंने 1935 ई. में के.एन सहगल की फ़िल्म "देवदास" में सहायक निर्देशक के रूप में काम किया।

विमल रॉय में अपनी फिल्मों में सामाजिक समस्याओं को प्रमुखता से उजागर किया और उसके समाधान का भी प्रयास किया। वे कभी एक विचारधारा में बंध कर नही रहे। कभी वे सामाजिक बुराइयों के मार्मिक सवेदना के द्वारा चित्रण करते थे तो कभी स्त्रियों की पीड़ा और सम्मान जैसी विषयो पर समाज मे फिल्मों के माध्यम से चित्रपटल पर रखते थे।

बिमल रॉय प्रतिभा के अद्भुत पारखी थे। मूल रूप से संगीतकार के रूप में ख्यातिप्राप्त सलिल चौधरी के लेखन की महत्ता को परखा और ‘दो बीघा जमीन’ में उनका उपयोग किया। ‘दो बीघा जमीन’ ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपना डंका बजा दिया। अगर प्रगतिशील साहित्य की तरह ‘प्रगतिशील सिनेमा’ की चर्चा की जाए, तो बिमल रॉय निस्संदेह इसके पुरोधा माने जाएंगे।

इनको 1953 ई. " दो बीघा जमीन" फ़िल्म के लिए फ़िल्मफ़ेअर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार से अलंकृत किया गया। 1954 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – बिराज बहू , 1955 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – परिणीता , 1959 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – मधुमती , 1960 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – सुजाता , 1961 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – परख , 1964 – फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार – बंदिनी

इस महान व्यक्ति की निधन 8 जनवरी ,1966 को मुम्बई में बीमारी की वजह से हुई, उस वक्त वे "चैताली" फ़िल्म का निर्देशन कर रहे थे।

Monday, 17 December 2018

💐 मैल्कम मार्शल :- बाउंसर के धनी गेंदबाज और मध्यक्रम बल्लेबाज


मैल्कम डेनिल मार्शल (18 अप्रैल 1958 - 4 नवंबर 1999) एक वेस्ट इंडियन क्रिकेटर थे। मुख्य रूप से एक तेज गेंदबाज थे।  मैल्कम डेनिल मार्शल का जन्म ब्रिजटाऊन,बारबाडोस में हुआ था। इनके पिता डेनज़िल डीकोस्टर एडघिल एक क्रिकेटर थे , जो एक सड़क दुर्घटना में स्वर्गवास हो गए जब वह एक साल का था। उनकी माँ एलोनोर वेल्च थी। इनकी पत्नी का नाम कोनी रोबर्टा अल हैं। 

इस दाहिने हाथ के इस तेज़ रफ़्तार के गेंदवाज़ के कई उपनाम सोबी, किलर, माचो से पुकारा जाता था। इनकी लंबाई 5'11" थी।
 इन्होंने अपनी पहली अंतरास्ट्रीय टेस्ट मैच भारत के विरुद्ध बेंगलुरु में चिन्नास्वामी स्टेडियम में सन 1978 ई. में खेला। 
80 के दशक में विश्व मे सबसे सफल गेंदबाज बने। इनकी बोलिंग में हमेशा विविधता रहती थी। ये सीमर और इन स्विंग गेंद डालते थे। ये पहला वन-डे मैच इंग्लैंड के विरुद्ध 28 मई,1980 को खेला।

◆इन्होंने 81 टेस्ट मैच के कैरियर में 20.94 की औसत से कुल 376 विकेट लिए । टेस्ट में उच्चतम बल्लेबाज़ी स्कोर 92 रन था। 
◆ इन्होंने 136 वन-डे मैच में कैरिअर में 26.96 की औसत से कुल 157 विकेट लिए। वन-डे में उच्चतम बल्लेबाज़ी स्कोर 66 रन था।
◆ इनका निधन कोलन आँत की बीमारी से सन 1999 में हुई।
मार्शल की एक टेस्ट में कॅरियर बेस्ट बॉलिंग भारत के खिलाफ अप्रैल, 1989 में पोर्ट ऑफ स्पेन में खेले गए मैच में 11 विकेट 89 रन देकर लिए।
◆22 बार पांच विकेट और चार बार एक टेस्ट मैच में 10 विकेट लिए। तीन बार एक टेस्ट इनिंग में 7-7 विकेट लिए - इंग्लैंड के खिलाफ 1988 में मैनचेस्टर में खेले गए मैच में 7 विकेट 22 रन पर, लीड्स में 1984 में इंग्लैंड के खिलाफ मैच में 7 विकेट 53 रन देकर और 1985 में ब्रिजटाउन में 7 विकेट 80 रन देकर लिए।
इस प्रकार ये विश्व के महानतम गेंदवाज़ के श्रेणी में श्रेष्ठ गेंदवाज़ थे।

Friday, 14 December 2018

वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाज "कर्टले एम्ब्रोज"


कर्टले एम्ब्रोज का जन्म खूबसूरत एंटीगुआ द्वीप
के निकट एक किसान परिवार में स्वेट्सअंगुआ में 21 सितंबर,1963 में हुआ था।उसने अपने जीवन का पहला मैच पाकिस्तान के विरुद्ध जार्ज टाउन(ओवल) में 1988 ई. में खेला था। छः फुट 7 इंच लंबा एम्ब्रोज़ विश्व के बेहतरीन तेज़ गेंदबाज की सूची में आज भी महत्वपूर्ण स्थान पर है। विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने की उनकी आदत ने आलोचकों के मुँह बन्द रखने पर मजबूर किया।
ये अपने क्रिकेट के जीवनकाल में हमेशा ICC रैंकिंग में नंबर एक पर रहे हैं। इनकी गेंदों पर कभी भी छक्का नही लगा है।
टेस्ट क्रिकेट में इनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन इंग्लैंड के विरुद्ध था , जब उन्होंने 1990-91 की टेस्ट सृखंला के दौरान ब्रिजटाउन टेस्ट में मात्र 45 रन देकर 8 विकेट लिए थे।  1992-93 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पर्थ टेस्ट में एक ही पारी में 25 रन देकर 7 विकेट लिए थे। इसमे गौरतलब बात यह थी कि उसने यह सातों विकेट 32 गेंदों के अंदर मात्र 1 रन देकर हासिल किए थे। बाकी के ओवरों में 24 रन बने थे।
सर कर्टले एम्ब्रोज  
इन्होंने अपने टेस्ट क्रिकेट में 1988-2000 में 20.99 के औसत से 405 विकेट लिए थे। 

Tuesday, 6 November 2018

महंत चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री बनने पर क्या करेंगे ?

महंथ चंद्रेशखर जी जो सिंदरी धनबाद में रहते हैं। प्रधानमंत्री बनने पर भारतवर्ष में क्या परिवर्तन करेगें। सुनें उन्ही के जुबानी।

Sunday, 28 October 2018

माइक्रोफोन के प्रकार और विवरण 【क्रिस्टल माइक्रोफ़ोन】भाग :- (ख)

अभी तक हमने जाना कि माइक्रोफोन के क्या कार्य है। तरह तरह के माइक्रोफोन होते है जिनकी विशेषता और कीमत अलग-अलग होती है।माइक्रोफोन एक प्रकार का ट्रांसड्यूसर है जो ध्वनि तरंगों को वायुमंडल से ग्रहण कर उसकी तरंगों को बदलता है। अभी हमने भाग (क़) में दो तरह के माइक्रोफोन के बारे में जानकारी प्राप्त की है। वह है 1.मूविंग कॉइल माइक्रोफोन 2.रिबन माइक्रोफोन


अब हम अन्य माइक्रोफोन के बारे में जानकारी प्राप्त करेगे। जिनमे मुख्य रूप में निम्नलिखित है। 
3क्रिस्टल माइक्रोफोन:- 
4. कैपेसिटर माइक्रोफोन 
5. इलेक्ट्रॉट माइक्रोफोन 
6. कार्बन माइक्रोफोन 
7. विशिष्ट माइक्रोफोन



3. क्रिस्टल माइक्रोफोन:-क्रिस्टल माइक्रोफोन पिज़ो इलेक्ट्रिक प्रभाव में काम करता हैं। क्रिस्टल माइक्रोफोन अपने ट्रांसड्यूसर के रूप में एक piezoelectric क्रिस्टल का उपयोग करता है। पिइज़ोइलेक्ट्रिक क्रिस्टल टिकाऊ और सस्ते होते हैं, और उनके पास अपेक्षाकृत बड़े विद्युत उत्पादन होते हैं; इस कारण से, वे अक्सर टेलीफोन और पोर्टेबल ध्वनि प्रणालियों में उपयोग किया जाता है। ध्वनि तरंगों को विधुत सिगनल में बदलने की ताकत क्रिस्टल माइक्रोफ़ोन में  पिज़ो इलेक्ट्रिक प्रभाव के वजह से ही होती है।
◆ नोट :-【 पिज़ो इलेक्ट्रिक प्रभाव क्या है ?】
◆उत्तर:-【 जब क्रिस्टल पर यांत्रिक प्रेशर पड़ता है तो क्रिस्टल के विपरीत तलो के मध्य विधुत विभव उतपन्न होता हैं।】
क्वासर्ट्ज़, रोशेल साल्ट (Rochelle salt) ( पोटासियम सोडियम ट्राटेट) टूरमैलीन और सिरेमिक के बने क्रिसटल इस तरह के प्रभाव दर्शाते है  क्वार्ट्ज़ और टूरमैलीन {tourmaline} का आउटपुट कम होता है
◆रिचेली साल्ट (Rochelle salt) (पोटासियम सोडियम ट्राटेट) :-यह एक पिज़ो इलेक्ट्रिक क्रिस्टल है। नमी से जल्द प्रवाभित होता है। यह 50℃ से ज्यादा के तापमान को सहन नही कर पाता है। 
◆सिरेमिक से बने क्रिस्टल सबसे उपयुक्त होते है 100℃ तापमान में भी प्रभावित नही होते हैं। नमी में भी अच्छा कार्य करते हैं आउटपुट भी बेहतरीन है।
यह रिबन माइक्रोफ़ोन से ज्यादा ठोस होते है लेकिन मुविंग कॉइल माइक्रोफ़ोन से कम मज़बूत है।
◆सिरेमिक (चीनी मिट्टी) या क्रिस्टल माइक्रोफोन सस्ते और निर्माण करने के लिए आसान हैं और एक उच्च वोल्टेज उत्पादन प्रदान करने में सक्षम हैं।
कार्यप्रणाली
ध्वनि तरंगों में जब स्ट्रेस(दबाब) उत्पन्न होता है। तब सिरेमिक या अन्य धातु का बना क्रिस्टल पर दाब बढ़ जाता है। जिससे क्रिस्टल दब जाता है। इससे विपरीत विरलता होने से क्रिस्टल पर दाब काम हो जाता है। और क्रिस्टल में तनाव पैदा हो जाता है। जिससे क्रिस्टल फैल जाती है। इसप्रकार क्रिस्टल में एक्सटेंशन और यांत्रिक कंप्रेसन होता है। इसलिए क्रिस्टल माइक्रोफ़ोन को प्रेशर माइक्रोफ़ोन भी कहते है।
बनावट

उपरोक्त तत्व से बना क्रिस्टल को दो परतों में बाँटते है जो बहुत ही पतली होती हैं। इन्हें एक कुचालक होल्डर में रखा जाता हैं। क्रिस्टल की इन पतली परतों की बीच हवा के लिए जगह रहता है। अधिक विधुत विभव प्राप्त करने के लिए इसतरह के अनेक तत्त्वों को जोड़ते है।एक अल्युमिनियम का डायफ्राम लेते है और इस डायफ्राम को क्रिस्टल से पुश-रॉड से जोड़ देते है।

महत्वपूर्ण तथ्य
1. सुग्राहिता :- पास्कल प्रेसर आउटपुट :- 500 मिलीवोल्ट और माइक्रोबार प्रेशर ऑउट पुट:- 50 मिलीवोल्ट
2.फ्रीक्वेंसी रिस्पांस :- 100- 8000 फ्लेट +/- 2db
3. आउटपुट अवरोध :- 1 MOhm
नोट:-
1. यह मल्टी माइक्रोफ़ोन सिस्टम में कार्य नही कर सकता है।
2. यह ओमनी डायरेक्शनल माइक्रोफ़ोन है। ध्वनि आवृत्ति बदलने से भी इसका दिशा लाभ नही बदलती हैं।
3. इसे DC वोल्टेज की आवश्यकता नहीं है।
4. इसकी कीमत कम होती हैं।
5 प्रकाश की किरणो में अधिक समय तक रहने पर आउटपुट पर उल्टा प्रभाव पड़ता है।
6. इसे एम्पलीफायर से ज़ोड़ने के लिए छोटे लिड्स का उपयोग किया जाता हैं क्योंकि इसका इम्पीडेन्स अत्यधिक होती हैं।

Tuesday, 23 October 2018

◆◆ माइक्रोफोन के प्रकार और विवरण भाग :-(क)

माइक्रोफ़ोन एक प्रकार का ट्रांसड्यूसर का काम करता है जो तरंगो को बदलता है। यानी यह सबसे पहले आवाज़ का पता लगता है कि आवाज़ की सोर्स को खोजता है और पहचानता है फिर ये विधुत सिग्नल को कंप्यूटर तक पहुँचाता है। इसके बाद कम्प्यूटर में लगे कुछ हार्डवेयर यंत्र इस एनालॉग डेटा को डिजिटल डेटा में परिवर्तन कर देता है।
जब हम कुछ बोलते है तो हमारी आवाज़ यानी ध्वनि तरंग एक ऊर्जा में बदल जाती है। फिर वह ऊर्जा माइक्रोफ़ोन में लगे एक छोटे से डायफ्राम से टकराती है। जो प्लास्टिक की बनी होती है। टकराने से यह डायफ्राम हिलने लगती है। और कम्पन्न पैदा होती है। 
डायफ्राम से एक कॉइल जुड़ा रहता है जब डायफ्राम हिलती है तो उससे लगे कॉइल भी हिलने लगती है। इसके बाद माइक्रोफोन में लगी एक स्थाई चुम्बक ( Permanent magnet ) एक चुम्बकीय क्षेत्र बनती है जो coil से होकर जाती है. अतः जब coil आगे पीछे घूम रही हो और उस वक़्त वो चुम्बकीय क्षेत्र में आ जाते तो इससे एक विधुत करंट का निर्माण होता है और वो करंट coil से  होकर प्रवाहित होने लगता है।
 अंत मे यह करंट माइक्रोफोन में लगे एक एम्पलीफायर या साउंड रिकॉर्डिंग डिवाइस से बहता हुआ बाहर निकलता है. तो इस तरह से हमारी आवाज़ एनालॉग डाटा से डिजिटल में परिवर्तित होती है।
◆◆ माइक्रोफ़ोन कई प्रकार के होते है।
A. मूविंग कॉइल माइक्रोफ़ोन

यह माइक्रोफ़ोन विधुत-चुम्बकीय प्रेरण (इंडक्शन) के सिद्धांत पर कार्य करता है। 
मूविंग कॉइल डायफ्राम में निम्नलिखित पार्ट रहते है।
1. चुम्बक 
2. कॉइल
3. डायफ्राम( पर्दा)
मूविंग कॉइल माइक्रोफोन में तार का एक कॉइल स्थाई चुम्बक क्षेत्र में रखा जाता है जो एक डायफ्रॉम से जुड़ा रहता है। जब ध्वनि तरंग डायफ्रॉम से टकराती है तो डायफ्रॉम हिलता है इसके साथ लगा डायफ्रॉम भी हिलता डुलता है इससे उसमें पास होने वाला चुंबकीय घनत्व में बदलाव आने लगती हैं।और विद्युत् विभव पैदा होती हैं। यही विद्युत् विभव मूल ध्वनि का प्रतिरूप है।
B. रिबन माइक्रोफोन

मूविंग कॉइल माइक्रोफ़ोन की फ्रीक्वेंसी अत्यंत कम रहती हैं क्योंकि इसका कॉइल डायफ्राम यूनिट भारी होती है। इसी कमी को हटाने के लिए रिबन माइक्रोफ़ोन को विकसित किया गया। इसमे कम वज़न का अलुमिनियम रिबन का प्रयोग किया गया है, यही कॉइल का काम करती है। इसमे अलग से डायफ्राम नही होता है।

रिबन:- यह एक हल्की अल्युमिनियम की बनी होती है। इसकी वज़न 0.2 मिलीग्राम, मोटाई 1 माइक्रोन    (10`6 m) , लंबाई 20 मिलीमीटर और विड्थ 3 मिलीमीटर होती है। इस रिबन कि सतह लंबाई में कोरियुगेटेड होती है । उसके बाद पूरे एसेंबल को एक पेटिका(case) में रखा जाता हैं जिसका आकार एक चुम्बक की तरह होता है।
रिबन माइक्रोफोन इस तरह काम करता हैं जब ध्वनि तरंगे जब इससे टकराती है तो इसके चुम्बकीय क्षेत्र में तरंगे पैदा करके इसके चुम्बकीय इडक्सन में विभव उत्पन्न होती हैं ।रिबन दोनों तरफ से खुले होने के कारण इसकी गति प्रेशर ग्रेडिएंट पर निर्भर करती हैं जिस कारण इसे प्रेशर ग्रेडिएंट माइक्रोफोन भी कहा जाता हैं। जितना अधिक प्रेशर ग्रेडिएंट होगा उतनी ही अधिक रिबन की वेलोसिटी होगी,इसलिए इसका एक नाम वेलोसिटी माइक्रोफोन भी कहा जाता हैं रिबन का भार कम होने से इसके सिग्नल पर प्रभाव नहीं पड़ता है तथा 12,000 Hz तक का फ्लैट रिस्पोंस देता है जिसके कारण निम्न आवृति में 20 Hz तक का सिग्नल प्राप्त होता है।

Saturday, 20 October 2018

◆◆ माइक्रोफोन ◆◆

माइक्रोफोन


माइक्रोफोन एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो आवाज़ को डिजिटल डाटा में बदलता है. इसे माइक भी कहा जाता है. ये कंप्यूटर में एक इनपुट डिवाइस की तरह इस्तेमाल होता है. इसकी सहयोग से हम अपने कंप्यूटर में ऑडियो डेटा को एंट्री करते हैं।  साथ ही इसकी सहायता से अपने कंप्यूटर में टाइप भी कर सकते हो क्योकि इसमें एक ऐसा यंत्र लगा रहता है जो आवाज़ को पहचानता है और उसी के आधार पर टाइप करता है. इसके लिए अपने माइक्रोफोन को अपने कंप्यूटर के साथ जोड़ना होता है और फिर माइक में जो हम टाइप करना चाहते हो उसे बोलना होता है. इस तरह से टाइप करने से यह समय बचाता है. माइक्रोफोन को कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए  कंप्यूटर में एक पोर्ट दिया होता है, साथ ही इसको कंप्यूटर में इस्तेमाल करने के लिए कंप्यूटर में साउंड कार्ड का इनस्टॉल होना भी आवश्यक है.
ध्वनि कैसे सुनाई पड़ती है।
एक प्रकार की ऊर्जा को अन्य ऊर्जा में बदलने की प्रकिया को ट्रांसड्यूसर कहाँ जाता है। किसी भी स्त्रोत से उत्पन्न ध्वनि एक लाउन्ज़ीटुडनल तरंग होती है जो Air अथार्त वायु में एक निश्चित क्रम में दबाब और विरलता उत्पन्न करती है। जब यह तरंग कान के पर्दे पर जाती है तो विधुत सिग्नल में बदल जाती है। कान से मष्तिष्क में जाने वाली तंत्रिका (ज्ञान-तंत्रिका) इस सिग्नल को दिमाग तक ले जाती है। दिमाग इस सिग्नल को साउंड के रूप में पहचान लेता है, और हमे वास्तविक ध्वनि का अनुभव होता है।

ध्वनि तरंगो में  क्या होता है?                        ध्वनि तरगो  में Frequency(आवृति),Amplitude(अम्प्लीट्यूड),Velocity(वेग),wavelength(वेबलेंग्थ) तथा Phage(फेज) सभी होते हैं।
सन 1876 ई. मे, एमिली बर्लिनर ने माइक्रोफोन का आविष्कार किया था।
ट्रांसड्यूसर (Transducer)
माइक्रोफोन में अहम कार्य ट्रांसड्यूसर (Transducer) का होता है। जो एक प्रकार की ऊर्जा को दूसरे प्रकार की ऊर्जा में परिवर्तित करती है। अथार्त यह वह युक्ति है जो ऊर्जा के एक रूप को दूसरे रूप में बदलती है।
अलग अलग उपकरण में अलग अलग ट्रांसड्यूसर उनके कार्य के अनुरूप लगे रहते है। जैसे
माइक्रोफोन:- यह ध्वनि तरंगों को विधुत तरंगो में परिवर्तित करती है।
स्पीकर:- यह विधुत तरंगो को ध्वनि तरंगों में परिवर्तित करती है।

माइक्रोफोन के प्रकार
1. मुविंग कॉइल माइक्रोफोन
2. रिबन माइक्रोफोन
3. क्रिस्टल माइक्रोफोन 
4. कैपेसिटर माइक्रोफोन 
5. इलेक्ट्रॉट माइक्रोफोन 
6. कार्बन माइक्रोफोन 
7. विशिष्ट माइक्रोफोन

Saturday, 13 October 2018

◆ कंप्यूटर में बिज़ली सप्लाई क्या होता है? SMPS का क्या अर्थ है?

SMPS क्या है इसका क्या अर्थ है ?
◆◆कंप्यूटर में पावर सप्लाई कैसे होता है, हमारे घर मे पावर सप्लाई से अलग कैसे होता है। कप्यूटर में पावर सप्लाई एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट के द्वारा होता है। जिसे SMPS अथार्त switch mode power supply कहते है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक सर्किट से लैस रहता है।
सभी इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण 220 से 240 की वोल्टेज पर काम करते हैं, अगर कंप्यूटर की बात की जाए तो अगर सीधे कंप्यूटर बोर्ड को 240 वोल्टेज की बिजली सप्लाई दे दी जाए तो वह जल जाएगा और उसका बोर्ड खराब हो जाएगा |
कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाले SMPS की बात करें तो वह अलग अलग वोल्टेज हमारे मदर-बोर्ड को पहुँचाने का कार्य करता है, जैसे की रेम (RAM) को अलग वोल्टेज देना प्रोसेसर को अलग वोल्टेज देना और जो कंप्यूटर के अंदर जो पंखा इस्तेमाल होता है उसको अलग वोल्टेज देना।

SMPS जिसे हम Power Supply भी कहते है का मतलब है Switched-Mode Power Supply एक बेसिक कॉम्पोनेन्ट जाती है  कंप्यूटर में Power Cable तो जरूर लगाईं होगी, SMPS हमारे कंप्यूटर में Power supply करने का काम करता है हमारे घर में Current हमेशा AC (Alternate Current) फॉर्म में होता है लेकिन हमारे कंप्यूटर के कंपोनेंट्स को यानी Digital device को चलने के लिए हमेशा Direct Current यानी DC की जरूरत होती है इसीलिए हमें SMPS की जरूरत पड़ती है SMPS हमारे घर के Alternate Current को Direct Current में परिवर्तित करके एक समान voltage को हमारे कंप्यूटर के बाकी कंपोनेंट्स के पास मदरबोर्ड के जरिए भेेेजता है।
SMPS एक तरह का Electronic circuit  है जो नार्मल AC करंट को lower DC में कन्वर्ट करता है। बाज़ार में अलग-अलग क्षमता के Devices के लिए अलग-अलग क्षमता के पॉवर सप्लाई भी उपलब्ध है SMPS की क्षमता को सामान्यतः watts में मापा जाता है। Total Amperes और volts का गुणा करके निकाला जाता है। एक नार्मल SMPS के बात करें तो 350 watts से 400 watts तक रहता है।
◆◆ SMPS के प्रकार
1.DC से DC कनवर्टर
2. फोरवर्डेड कनवर्टर
3. फ्लाइबैक कनवर्टर
4. सेल्फ ऑक्सिलटिंग फ्लाईबेक कन्ववर्टर

Monday, 8 October 2018

पता करे आपके ह्रदय के रक्तचाप क्या होना चाहिए

◆ ह्रदय के प्रत्येक धड़कन के समय जो अधिकतम दबाब (प्रेशर) होता है उसे 'सिस्टोलिक प्रेशर' कहते है। जिसमे ह्रदय के निचले भाग के कक्ष में संकुचन होता है। दो धड़कनो के मध्य काल का जो समय होता है। ,उस वक्त जो कम से कम जो दबाब होता है। उसे " डायस्टोलिक प्रेशर " कहते है। इन दोनों के संतुलित दबाब को " ब्लड प्रैशर " कहते है।

◆ आमतौर पर शिशु का रक्तचाप:- 80/50 mm.mercury

◆ युवकों का रक्तचाप:- 120/80 mm. mercury

◆ प्रौढ़ यानी बूढ़ो का रक्तचाप:- 140/90 mm.mercury

होना सामान्य स्थिति है।

■■ इसमे पहली बड़ी संख्या :- सिस्टोलिक और दूसरी छोटी संख्या डायस्टोलिक प्रेशर की सूचक है।

◆◆ सामान्य फार्मूला है कि अपनी आयु के वर्षों में 90 जोड़ लीजिए।

उच्च रक्तचाप के कारण

(क) शारीरिक कारण

1.रक्त वाहिनी शिराओं का मार्ग संकरी हो जाने से या कठोर होने से

2, किडनी में कोई विकार या कोई व्याधि हो जाने से।

3. लिवर के माध्यम से होने वाले रक्त प्रवाह में बाधा उत्पन्न होने से पोर्टल वेन में दबाब उत्पन्न होने के कारण।

■■ रक्त में कोलेसट्रोल नामक तत्व की मात्रा बढ़ जाने से अथार्त सामान्य स्तर से ज्यादा हो जाने से या शरीर मे चर्बी ज्यादा बढ़ने से , मोटापा बढ़ने से, पैतृक प्रभाव से, वृद्धावस्था के कारण आई निर्बलता से, गुर्दे या जिगर की खराबी आदि कारणों से उच्च रक्त चाप होने की स्थिति बनती है।

(ख) मानसिक कारण :- मनुष्य का मन अति सवेंदनशील होता है , उस पर जो व्यक्ति स्वभाव से भाबुक होते है,ऐसे में उनको कोई चिंता ,शोक, क्रोध, ईर्ष्या,या भय का मानसिक चोट पहुँचे तो उनके दिलों की धड़कन बढ़ जाती है।, स्नायविक तंत्र तनाव से भर उठता है। अतः इस प्रकार के अनेकों मानसिक वेगों से बचना आवश्यक है।


Saturday, 6 October 2018

National Career service job search portal नेशनल कैरियर सर्विस एक जॉब पोर्टल

◆◆ एकीकृत राष्ट्रीय कैरियर पोर्टल जहाँ जॉब से से संबंधित सभी समस्याओं का निष्पादन हो सकता है।◆◆


◆◆नेशनल कैरियर सर्विस (एनसीएस) पोर्टल पर एक करियर सेंटर प्रोफाइल विभिन्न प्रकार की व्यावसायिक विकास सेवाएं और कार्यक्रम नौकरी खोजने वालों को प्रदान करता है ताकि वे अपनी रुचियों का पता लगा सकें, अवसरों के पथ खोज सकें और खुद को विभिन्न पेशेवर बातचीत के लिए तैयार कर सकें। एनसीएस पोर्टल पर एक करियर सेंटर जॉब खोजने को एक प्रभावी कर्मचारी और आजीवन शिक्षार्थियों बनने का समर्थन करता है। एक करियर केंद्र पोर्टल उपयोगकर्ताओं को उनके व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ पेशेवर विकास के साथ सहायता करता है। एक करियर केंद्र उपयोगकर्ताओं को एनसीएस पोर्टल पर सेवाओं का विस्तृत स्पेक्ट्रम प्रदान करता है चाहे वे छात्र, ताजा स्नातक हों या पूर्व छात्र हों। यह पोर्टल उपयोगकर्ताओं के लिए स्वयं को योग्य करने के लिए विभिन्न प्रकार के समूह कार्यशालाएं भी प्रदान करता है।
◆◆ करियर केंद्र मॉड्यूल में निम्न कार्यक्षमता शामिल है। 
एप्लिकेशन तक पहुंचें।
 ◆भाषा बदलें 
◆ आवेदन का लॉगआउट 
◆ करियर केंद्र प्रोफ़ाइल देखें / अपडेट करें 
नौकरी सर्च, नियोक्ता, स्थानीय सेवाएं  सर्च उम्मीदवार Local स्थानीय सेवाओं पर प्रतिक्रिया  उपयोगकर्ता प्रबंधन  घोषणाएं , शिकायत , मामले ,पासवर्ड बदलें Job नौकरी मेले तक पहुंच , रिपोर्ट ,दस्तावेज़ , डैशबोर्ड रिपोर्ट
 2. प्रारंभ करना 2.1 एप्लिकेशन तक पहुंचें एनसीएस पोर्टल तक पहुंचने के लिए, अपने पता बार में निम्न वेबसाइट पता या वर्दी संसाधन लोकेटर (यूआरएल) टाइप करें
◆ इंटरनेट ब्राउज़र: http://www.ncs.gov.in/। एनसीएस पोर्टल प्रदर्शित का होम पेज पर जाएं।
◆◆एप्लिकेशन में लॉग इन करें कैरियर सेंटर उपयोगकर्ता के रूप में आप अपने वैध लॉगिन प्रमाण-पत्रों का उपयोग करके एनसीएस पोर्टल में लॉग इन कर सकते हैं। 
पोर्टल के पृष्ठ के लॉगिन अनुभाग पर दिए गए फ़ील्ड में अपना 1.उपयोगकर्ता नाम और पासवर्ड दर्ज करें। 
2.अपना यूजर नेम पासवर्ड साइन इन बटन दर्ज करें दर्ज करें। यह करियर सेंटर होम स्क्रीन प्रदर्शित करता है। 
इस पोर्टल पर जॉब खोजने वाले , जॉब देने वाले कंपनी, या स्किल डेवलप्ड इंस्टीट्यूट , ऑनलाइन या अन्य सर्विसेज प्रदान करने वाले भी रजिस्टर्ड अपने को कर सकते है।

Friday, 5 October 2018

◆◆ प्रोसेसर का क्या काम है? कंप्यूटर या इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में





प्रॉसेसर कंप्यूटर में एक माइक्रोचिप होता है जो मदरबोर्ड में लगा होता है। कंप्यूटर से लगे सभी पार्ट्स को एक सुरक्षित और समुचित क्रम में व्यवस्था करती हैं।यह डाटा को लेकर काफी कम समय मे प्रोसेस कर हमें आऊटपुट के रूप में प्रदर्शित करता है। जिसके कारण यह बहुत कम वक़्त में गर्म हो जाती हैं।इसलिए इसके गर्मी को निकालने के लिए एक हीट सिंक और फैन इसके ऊपर लगाया जाता है।
◆◆स्मार्टफोन लेते समय सबसे पहले आप उसकी स्पेसिफिकेशन्स के बारे में ही जानना चाहते हैं। इन स्पेसिफिकेशन्स में प्रोसेसर का अच्छा होना सभी जरुरी मानते और चाहते हैं। आप जो फोन लेने वाले हैं उसका प्रोसेसर लेटेस्ट हो तो वो अच्छा है, ऐसा अधिकतर लोग मान लेते हैं।  
◆◆ प्रोसेसर को कंप्यूटर का मस्तिष्क कहा जाता हैं। क्योंकि कंप्यूटर के अंदर होने वाली सभी प्रकार के गतिविधियों का नियंत्रण यही करती हैं।
"◆◆ आकार :-
यह दिखने में चोकोर आकार की होती हैं। इसमे कई short,मेटालिक कनेक्शन नीचे की ओर निकले होते है। इसे cpu के सॉकेट में लगाया जाता हैं। एक माइक्रोप्रोसेसर एक कंप्यूटर प्रोसेसर है जो  एक एकल एकीकृत सर्किट (आईसी), है  इसमें ज्यादा से ज्यादा कुछ एकीकृत सर्किट पर एक कंप्यूटर की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) के कार्यों को शामिल किया गया है।
◆माइक्रोप्रोसेसर एक बहुउद्देशीय, प्रोग्राम डिवाइस है जो कि, इनपुट के रूप में डिजिटल डेटा स्वीकार अपनी स्मृति में संग्रहीत निर्देशों के अनुसार यह प्रक्रिया, और उत्पादन के रूप में परिणाम प्रदान करता है।
CPU के मुख्य घटक:
1. ALU – अंकगणितीय तर्क इकाई (Arithmetic Logic Unit)
2. प्रोसेसर रजिस्टर
3. नियन्त्रण इकाई ( Control Unit)
◆◆ CPU के कार्य:-
प्रोसेसर इनपुट उपकरणों से डाटा ग्रहण करता है और उसे समुचित व्यवस्था में करने के बाद आउटपुट उपकरणों में प्रदर्शित करता है। इन तीनो कार्य करने के लिए इसे कुछ key पार्ट्स का उपयोग करना पड़ता है। जो निम्न है
ALU (ऐर्थमेटिक लॉजिक यूनिट):- यह गुणा और भाग की कार्य सम्पन्न करता है।इसके अतिरिक्त यह कुछ लॉजिक कार्य भी सम्पन्न करता है। जैसे AND, NOT और OR 
◆◆ प्रोसेसर की कार्य करने की गति को हर्ट्ज में मापते है।जितना ज्यादा कोर का प्रोसेसर होगा वह उतना अत्यधिक क्षमता का प्रोसेसर हर्ट्ज का होगा।
1. DUAL CORE PROCESSOR
2 QUAD CORE PROCESSOR
3. HEXA CORE PROCESSOR
4.OCTA CORE PROCESSOR
5. DECA CORE PROCESSOR
◆◆ प्रोसेसर बनाने वाली कंपनियों का नाम
1.INTEL
2.AMD
3. IBM
4.INVIDIA
5.MOTOROLA
6.QUALCOMM
7. SAMSUNG
8. Hewlett-Packard (HP)
इसमें INTEL, AMD का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता हैं। इसमे INTEL ने ही विश्व मे पहला माइक्रोप्रोसेसर का आविष्कार किया था।

Wednesday, 26 September 2018

◆◆ DIPLOMA IN ELEMENTRY EDUCATION (प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा)

डी.एएल .एड
■ प्राथमिक शिक्षा में डिप्लोमा (डी.एएल .एड) कार्यक्रम पूरे देश मे विभिन्न राज्यो के प्राथमिक और / उच्च प्राथमिक विद्यालयों में काम कर रहे विद्यालय के शिक्षक के लिए विशेष रूप से तैयार पैकेज है। इस प्रोग्राम को  अकादमिक विभाग NIOS द्वारा मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एम.एच.आर.डी) भारत सरकार की पहल पर NCF 2005, आरटीई 2009 और एनसीएफटीई 2010 को मुख्य रूप से ध्यान में रखते हुए इसे प्रोग्राम को विकसित किया गया है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य शिक्षा और शिक्षण को अधिक प्रभावी बनाना हैं।

◆◆ डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एडुकेशन :-  N.I.O.S ने डिप्लोमा इन एलीमेंटरी एडुकेशन (डी.एएल .एड) प्रोग्राम ओडीएल माध्यम में प्राथमिक स्तर पर वैसे शिक्षक के लिए विकसित और डिज़ाइन किया गया है, जो सर्विस में है लेकिन गैर-प्रशिक्षित है।
★ इसमे 10 पेपर होते है। ★ 9 महीनों के दो सेमेस्टर होते है। ★ प्रत्येक सेमेस्टर में 5 (पाँच) 5 (पांच) पेपर होते हैं।


Tuesday, 25 September 2018

◆◆ पेट के रोग और भोजन

हमारे शरीर मे आमतौर पर होने वाले पेट रोग और उनके उपचार में दिया जाने वाले भोजन इस प्रकार है। हमारे भारत वर्ष में अधिकांश लोगों में यह समस्या आये दिन होते रहते है।
■ गैस्ट्राइटिस:- इस रोग में अमाशय की म्यूकस झिल्ली में सूजन हो जाती है, जो तीव्र अथवा काफी पुरानी हो सकती है। इसमें तीव्र सूजन वाले व्यक्ति को पेट दर्द , उल्टियां होने, भूख न लगने और पेट फूलने की शिकायते होने लगती है। ऐसा अटपटा भोजन ,अनियमित भोजन ,तनाव, अत्यधिक गर्म भोजन और अन्य कारणों से हो सकता है।
  ◆◆◆ ऐसे व्यक्तियों को तरल भोजन:- जैसे - ग्लूकोस का घोल, गर्म करके ठंडा किया हुआ दूध , खनिज -लवण का घोल,फलों का स्वच्छ रस इत्यादि देना चाहिए। भोजन को इक्कठा न देकर कई बार थोड़ा थोड़ा देना चाहिए। लगातार उल्टियाँ होने पर चिकित्सक शिरा अथार्त नस के द्वारा उचित घोल देते है। अमाशय की पुरानी सूजन में अधिक कैलोरी वाला, अधिक प्रोटीन युक्त भोजन, थोड़ी थोड़ी मात्रा में कई बार देते हैं। शराब ,कॉफ़ी, सिगरेट तम्बाकू,पान-मसाला आदि कभी भी नहीं दिया जाना चाहिए।( खान-पान में पहरेज के साथ विटामिन "बी" भी रोगी को चिकित्सक द्वारा दिया जाता है।
■ पेट मे जलन:- छाती के निचले तथा पेट के उपरी भाग में जलन ,आमाशय में अधिक अम्लस्राव तथा उसके भोजन नली में ऊपर लौटने से अथवा ह्रदय रोग से भी हो सकता है। जलन यदि अधिक अम्ल के कारण है ,तो भोजन थोड़ा-थोड़ा कई बार मे लेना चाहिए। एंडोस्कोपी विधि से जांच करने पर ऐसे कई मरीज़ में हर्निया भी मिलती है। ये रोगी प्रायः मोटे होते है। अतः इनको कम कैलोरी वाला भजन देते है। ऐसे लोगों को रात में सोते समय पलंग के सिरहाना ऊँचा रखना चाहिए और भोजन करते समय अधिक जल का सेवन नही करना चाहिए ताकि पेट एक साथ न भर जाए।
■■ पेप्टिक अल्सर:- आमाशय , छोटी आंत के ऊपरी भाग ( (ड्यूओडिनम) अथवा भोजन नली (इसोफेगस) के निचले भाग में बनने वाला घाव है, जिसका मुख्य लक्षण पेट के ऊपरी मध्य भाग में दर्द होता है। रोगियों को पेट मे जलन और खून की उल्टी भी हो सकती है।
◆◆◆◆ 🙅 ऐसे लोगों को भोजन शांत मन से , धीरे धीरे खूब चबाकर कर करना चाहिए। अधिक मिर्च वाले, और अधिक गर्म भोजन नही करे। 

Monday, 17 September 2018

गेट एक्जॉम :- बेहतरीन भविष्य

◆◆ GATE : एक महत्वपूर्ण दरवाज़ा सफलता का है।
एक अखिल भारतीय परीक्षा गेट इंजीनियरी में स्नातक अभिरुचि परीक्षा(GATE) उम्मीदवारों को इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विभिन्न विषयों की पूर्ण दझता के लिए एक माध्यम है। गेट (GATE) भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बैंगलोर द्वारा राष्ट्रीय समन्वय बोर्ड गेट (GATE) उच्च सिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) भारत सरकार और सात भारतीय प्रौद्योगिकीसंस्थान (आईआईटी) की तरफ से आयोजित किया जाता है| इन आठ संस्थानों के पास गेट (GATE) परीक्षा आयोजित करने का एकमात्र अधिकार है|गेट (GATE) का मुख्य उदेश्य विद्यार्थियों की गुणवत्ता का परिक्षण करना और मुल्यांकन करना है, की क्या वे भारत के प्रिमियम संस्थानों में उच्चतर अध्ययन के लिए पात्र , या नही है| ज्ञात है कि गेट की परीक्षा (Gate Exam) में चार वर्षीय इंजीनियरिंग/टेक्नोलॉजी की बैचलर डिग्री (B.E./ B.Tech./ B.Pharm) वाले आवेदन कर सकते हैं.  आर्किटेक्चर में ग्रेजुएट भी गेट परीक्षा के लिए आवेदन करने के पात्र है।


गेट के लिए पात्रता मापदंड (Eligibility Criteria for GATE)

1. B.E, B.tech, B.PHARMA इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी में स्नातक की डिग्री (चार साल बाद 10+2 या तीन साल बीएससी, इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी में इंजीनियरिंग) और जो ऐसे कार्यक्रमों के अंतिम वर्ष में है|
◆2. बैचलर- आर्किटेक्चर में स्नातक की डिग्री (पांच साल की डिग्री) ◆ 3. बीएससी (रिसर्च) बीएस- साइंस में स्नातक की डिग्री (पोस्ट डिप्लोमा, चार साल बाद 10+2)4. प्रोफेसनल सोसायटी परीक्षा (बीई, बीटेक, बिएआर के समकक्ष) पेशेवर सोसायटी के बीई, बीटेक, बैच समकक्ष परीक्षाएं एमएचआरडी, यूपीएससी, एआईसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त जैसे- एएमआईई, इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स इंडिया एएमआईसीई) सिविल इंजिनियर्स संस्थान भारत ◆5. एमएससी, एमए, एमसीए या या समकक्ष- विज्ञान, गणित, साख्यिकी, कंप्यूटर अनुप्रयोग या समकक्षों की किसी भी शाखा से मास्टर की डिग्री|◆6. इंटर एमई, एमटेक (पोस्ट बीएससी)- इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी में पोस्ट बीएससी एकीकृत मास्टर डिग्री प्रोग्राम (चार साल का कार्यक्रम)
गेट परीक्षा के दौरान आपको तीन घण्टे की समय अवधि दी जाती है, जिसमें कुल 65 प्रश्‍न होते हैं और अधिकतम 100 अंक होते हैं। अब गेट एग्जाम ऑनलाइन (Online) होते है, इसमें आपसे दो तरह के प्रश्‍न पूछे जाते हैं। एक में चार विकल्प होते हैं, जिसमें से एक का चुनाव करना होता है तथा दूसरे तरह के प्रश्‍न में किसी संख्या के रूप में जवाब देना होता है। तीन घंटे पूरे होते ही कंप्यूटर स्क्रीन बंद हो जाती है और पेपर खत्म हो जाता है।
गेट परीक्षा की तैयारी उसी सब्‍जेक्‍ट से करें, जिससे आपने ग्रेजुएशन के समय पढाई की थी।
◆◆◆ तैयारी के तरीके ◆◆◆
मॉक टेस्ट निरंतर अवधि पर देते रहे:-मॉक (Mock) टेस्ट की प्रैक्टिस -◆◆मोक टेस्ट की तैयारी आप दो तरीके से कर सकते है। एक आप खुद से रोजाना तैयारी कर सकते है, दूसरा ऑनलाइन मोक टेस्ट दे सकते है।◆मोक टेस्ट देने से आपके प्रदर्शन में सुधार आएगा. इसमें आपको पताचलेगा कि किस सवाल में आप कितना समय ले रहे है, और कितने जबाब सही निकालते है।◆टाइमटेबल में ऐसे विषय पहले रखें जो सरल और जरुरी है।एक विषय को पूरा करने को एक के बाद एक टॉपिक को पढ़ें।◆टॉपिक पढ़ते समय साथ में ही रिवीजन नोट्स बनाते जाएँ, जिसमें मुख्य परिभाषा, फार्मूला आदि लिखते जाएँ।◆सभी टॉपिक पढने के बाद टॉपिक के अनुसार पिछले सालों के गेट के पेपर को बनाये और अपनी योग्यता का आकलन स्वयं करें।◆◆ रिविशन करते समय विस्तार से नोट्स बनाये , अन्तराल पर उसका अध्ययन भी करे।◆◆ रोजाना रिविशन भी करे और प्रैक्टिस सेट भी बनाये और जिस विषय मे कमज़ोर है उसका अध्ययन विस्तार से करे।◆◆ हर एक विषय का दो या तीन किताब रखे और उसका तर्कपूर्ण गहराई से विषय वस्तु की समीक्षा करे।
  • बेस्ट ऑफ लक 

Wednesday, 29 August 2018

मुगल साम्राज्य की राजशाही महिलाए


उमर शेख मिर्जा
ऐसान दोंलत बेगम :- ये बाबर की दादी थी। उमर शेख मिर्ज़ा की मृत्यु (1494 ई.) के समय बाबर को 11 वर्ष की अल्पायु में फरगना का राज्य सौपक़र उसका राज्याभिषेक किया।
कुतलुब निगार खानम :- बाबर की माता और उमर शेख मिर्ज़ा की पत्नी थी।
खान जादा बेगम :- बाबर की बहन और समरकन्द के शेबानी खाँ की पत्नी थी।
माहिम बेगम :- यह बाबर की तीसरी पत्नी थी और हुमायूँ की माँ थी। हुमायूँ का जन्म 6 मार्च 1508 ई. को काबुल में हुआ था।
गुलबदन बेगम :- यह बाबर की पुत्री और हुमायूँ की बहन थी। इनका जन्म 1523 ई. के लगभग हुआ था। हुमायूंनामा की रचियता थी यह दो भागों में है।
बेगा बेगम:- यह हुमायूँ की पटरानी थी जिसे शेरशाह ने बंदी बना लिया था।
 हमीदा बानो बेगम :- इनका विवाह हुमायूँ के साथ 29 अगस्त,1541 ई. में हुआ था। हिन्दाल के आध्यात्मिक गुरु मीर अली अकबर जामी (बाबा दोस्त) की पुत्री थी। हमीदा बानो बेगम के गर्भ से अमर कोट के राजा वीरसाल नामक राजा के घर मे अकबर का जन्म हुआ था। जो आगे चलकर भारत का प्रतापी समार्ट बना था।
हाजी बेगम :- ये हुमायूँ की पत्नी थी। इसी ने "हुमायूँ का मकबरा" बनवाया था। इसका कारीगर ईरानी था। "हुमायूँ का मकबरा" की शैली ईरानी है।
जीजी अनंगा:- अकबर की आया थी। इनके पति शमशुद्दीन ने 1540 ई. में कन्नोज की लड़ाई में पराजित हुमायूँ को डूबने से बचाया था। इन्हें अतगा ख़ाँ की उपाधि प्रदान की गई थी।
माहम अनंगा :- यह अकबर की बड़ी आया थी बैरम खान के मक्का भेजने में इसी का हाथ था। बैरम खान अकबर का सरंक्षक था।
सलीमा बेगम :- अकबर के संरक्षक बैरम खान की पत्नी थी। बैरम खान के पुत्र अब्दुर्रहीम को अकबर को ऊँचे पद दिया था। बैरम खान के मरने के  पश्चात अकबर ने सलीमा बेगम से विवाह कर लिया था। 1584 ई. में ख़ानख़ाना की उपाधी दी।
मरियम उज जामिनि:- यह अकबर की पत्नी और आमेर के कछवाहा राजपूत राजा "भारमल" की पुत्री थी। 1562 ई. में सांभर में अकबर के साथ विवाह हुआ था। ये जहांगीर की माता थी। अकबर की प्रधान साम्रागी थी। इन्हें अकबर के मक़बरा (सिकंदरा) से 2 फर्लांग की दूरी पर दफनाया गया।जिसे सिकंदर लोदी की बारादरी या "ईसाई बेगम" का मकबरा कहते है।
* रुकिया बेगम या तुर्की सुल्ताना : अकबर की प्रथम बेगम , संभवत हिंदाल की पुत्री थी।
* हरखा बाई: अकबर की पत्नी और मरियम उज जामिनी की बहन थी।
* बरखतुनिया बेगम: अकबर के काबुल राज्य की गवर्नर मिर्ज़ा हकीम की बहन थी।
* जगत गोसाई : जहांगीर की पत्नी और मारवाड़ के शासक मोता राजा उदय सिंह की पुत्री थी। शाहजहां (खुर्रम) की मां थी। शाहजहां के साथ हिन्दू रीति रिवाजों के साथ विवाह हुआ था।
* मानबाई : इनका विवाह जहांगीर के साथ 1585 ई. में हिन्दू और मुस्लिम दोनों रिती रिवाजों से हुआ था। यह आमेर के राजा भगवान दास की पुत्री थी। आमिर खुसरो की माता थी। इन्हें "शाह बेगम" का पद प्राप्त था। इनकी मृत्यु के बाद जहांगीर 4 दिनों तक भूखा रहा था।
* मेहरुन्निसा (नूरजहां) : फारस के मिर्ज़ा ग्यास बेग और अस्मत बेगम की पुत्री थी। जहांगीर की पत्नी थी। इनका जन्म कंधार में और विवाह अली कुली बेग से हुआ था। अली कुली बेग को "शेर अफगान" की उपाधि प्राप्त थी। शेर अफगान के मृत्यु के बाद "नूरजहां" और उसकी पुत्री "लाड़ली बेगम" को अकबर की पत्नी "सलीमा बेगम" की सेविका बनाया गया।
* 1611ई. में " "नौरोज" पर्व पर जहांगीर ने उसे देखा और नूरजहां से विवाह कर लिया। नूरजहां की पुत्री का विवाह शहरयार के साथ हुआ।
* नूरजहां की भाई "आसिफ खान" की पुत्री " अर्जुबंद बानो बेगम" का विवाह खुर्रम(शाहज़हां) के साथ हुआ। जब वह अपने जमाता(दामाद) का पक्ष लेने लगी तो शांजहा उसका विरोधी हो गया। नूरजहां झरोखा दर्शन देती थी। 1613 ई. में इन्हे "बादशाह बेगम" अथवा पट्ट महिषी बनाया गया था।
* अस्मत बेगम : गुलाब से इत्र बनाने की कला इसी ने इजाद की थी। यह नूरजहां की मां थी।
* लाड़ली बेगम : यह नूरजहां की शेर अफगान(अली कुली बेग) से उत्त्पन्न पुत्री थी। इसी का विवाह शहरयार (उपनाम_खुदर मुर्ज, नैशुदरी, निख्ट्टू) के साथ हुआ था।
* अर्जुमंद बानो बेगम : यह नूरजहां के भाई आसिफ खां की पुत्री थी। इसका जन्म 15940 ई. में हुआ था। 1612 ई. में विवाह शहजादा खुर्रम( शाहजाहा) से हुआ था। इसे "मलिक ए जमली" की उपाधि दी गई। मुमताज़ महल के नाम से प्रसिद्ध हुई। इसके 14 बच्चे हुए। "शाही मुहर" इसके अधिकार में था। 17 जनवरी , 1631 ई. को प्रसव पीड़ा के दौरान(जब शांजाहा "दक्षिण विजय" में व्यस्त था) मृत्यु हो गई। इसे बुरहानपुर के बाग में दफनाया गया। बाद में ताजमहल में दफनाया गया। सती उन्निसा खानम इसकी सलाहकार थी।
* रोशनआरा : यह शाहजहां की पुत्री थी। औरंगज़ेब, दारा, मुराद, शुजा की बहन थी। इस्लाम शिक्षा के लिए दिल्ली में " बेतुल इस्लाम केंद्र" की स्थापना की थी।
* जहांआरा : यह शाहजहां की दूसरी पुत्री थी। इससे शाहजहां को विशेष लगाव था।
* बेगम नादिरा : यह शाहजहां के पुत्र "दारा" की पत्नी थी।
* दिलरास बानो बेगम : यह शाहजहां के पुत्र "औरंगज़ेब" की पत्नी थी। इसका विवाह औरंगज़ेब से 18 मई, 1637 ई. में हुआ था। यह फारस के राजघराने शाहनवाज़ की पुत्री थी।
* राबिया उद दौरानी : यह औरंगज़ेब की पत्नी थी। इसका मकबरा औरंगाबाद में है।




Wednesday, 22 August 2018

अटल बिहारी वाजपेयी :-एक सर्वमान्य नेता और प्रतीक पुरुष (भाग-एक)


अटल बिहारी वाजपेयी
संयुक्त राष्ट्रसंघ मे पहली बार हिंदी  मे भाषण देने वाले इसअति असाधारण व्यक्ति ने भारत  का सर गर्व से ऊँचा कर दिया। पोखरण परमाणु विस्फोट कर उन्होंने जबरदस्त इच्छा शक्ति का परिचय दिया।
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म ग्वालियर के शिंदे की छावनी में २५ दिसम्बर ,१९२४ को अध्यापक कृष्णा बिहारी वाजपेयी के घर में हुआ था।  इनकी प्राम्भिक शिक्षा  स्वरस्ति विद्यालय में हुईं थी। ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से अपनी स्नातक की पढाई पूरी की इनका बचपन आगरा के बटेश्वर में बिता था। आगरा के की प्रताप नगर में ही अटल जी के बहन कमला दिश्चित का परिवार रहता था अटल जी ने कानपूर के डी.ए.भी कॉलेज से राजनीती शास्त्र से परास्नातक किया। इसके बाद इन्होने इसी कॉलेज से वकालत की पढाई की बेटे को वकालत करते देख कर अटल जी के पिता जी भी ने डी. ए .भी कॉलेज ,कानपूर से ही उसी साल एल.एल.बी में दाखिला ले लिया पिता -पुत्र एक ही क्लास में बैठकर पढाई करते थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने पत्रकारिता से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यपत्र पाञ्चजन्य ,राष्ट्रधर्म और वीरअर्जुन जैसे अखवारो का संपादन किया। उन्होंने संसद में तीन दशक, अमर बलिदान (लोकसभा मर वक्तव्यों का संग्रह ) ,राजनीती की रपटीली राहे ,बिंदु बिंदु विचार ,अमर आग है ,मेरी इक्यावन कविताये , कैदी कविराय की कुण्डलिया इत्यादि इनकी अदभुत रचनाये है।

अपमानों में , सम्मानों में , उन्नत मस्तक ,उभरा सीना ,  
पीड़ाओं में चलना होगा , कदम मिलाकर चलना होगा |

अटल जी अपने पुरे जीवन में इसी पंक्तियों को चरितार्थ किया इसीलिए सत्ता दल व विरोधी दल के ये सर्वंमान्य रहे है। 1951 ई. में भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य बने। १९५५ लोकसभा चुनाव  पहली बार लड़ा लेकिन सफलता नहीं मिली पुनः 1957 ई . में बलरामपुर (गोंडा ) से पहली बार जनसंघ के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर लोकसभा के सदस्य बने 1962 से 1967 ई.  और 1986 ई . में राज्यसभा के सदस्य भी रहे इसी बीच 1968 ई.से 1973 ई. तक  में भारतीय  जनसंघ के अध्यक्ष बने।
1957 से 1977 ई. तक जनता पार्टी की स्थापना तक वे लगातार 20 वर्षो तक जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहे
1962 ई. में बलरामपुर (गोंडा ) से लोकसभा का चुनाव् कांग्रेस क्र सुभद्रा जोशी से हार गए तो इन्होने सीधे जनता से संवाद करके पूछा की ऐसी कौन सी वजह रही की उन्हें हार का सामना करना पड़ा  और अटल जी पुनः 1967 ई. में इसी बलरामपुर सीट से चुनाव जीते।
1977 ई. में भारतीय जनसंघ पार्टी ने भारतीय लोकदल के साथ गठबंधन कर जनता पार्टी का निर्माण किया । यह पार्टी बहुत कम समय मे लोकप्रिय हो गयी। मोरारजी देसाई को 298 सीटों पर विजय मिली।
अटल जी ,मोरारजी देसाई की जनता पार्टी की सरकार में 1977 ई. से 1978 ई. तक विदेश मंत्री रहे और विदेशो में भारत की प्रतिष्ठा बढाई।
1979 ई. में मोरारजी सरकार विश्वास मत खो दिया और जून, 1980 में कांग्रेस की मदद से चौधरी चरण सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लिया, लेकिन बाद में कांग्रेस पीछे हट गई। तब चरणसिंह ने जनवरी,1980 ई. में लोकसभा चुनाव की घोषणा कर दिया।
1980 ई. हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 351 सीट मिली और कांग्रेस की सरकार बनी।
1980 ई में जनता पार्टी से असंतुष्ट होकर अटल जी ने लाल कृष्ण आडवाणी और भैरोंसिंह शेखावत की मदद से भारतीय जनता पार्टी की स्थापना में मदद की और संस्थापक सदस्य भी रहे। इसप्रकार 6 अप्रैल , 1980 को भारतीय जनता पार्टी की स्थापना हुई। भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद का कार्यभार सौंपा गया। इस प्रकार वे भारतीय जनता पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए।
1984 ई. में हुए लोकसभा चुनावों में भाजपा को मात्र 2 सीटों पर विजय मिली जिसमे एक हासनकोड़ा(आंध्रप्रदेश) के चंदुपाटिया रेड्डी ने पी. वी. नरशिंवहा राव को 54158 वोटों से हराया था। दूसरी सीट गुजरात की मेहसाणा  थी। 31 अक्टूबर , 1984 को श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या सिख गार्डो के द्वारा गोली मार कर दिया गया था। इसी सहानुभूति के लहर का फायदा उठाकर कांग्रेसी सरकार ने राजीव गांधी के नेतृत्व में सरकार बनायीं।
6 अगस्त ,1988 ई. में विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में 5 पार्टियों के गठबंधन में नेशनल फ्रंट बनाया गया जिसे भाजपा और वाम दलों का समर्थनबाहर से था। बोफोर्स कांड,पंजाब में आंतकवाद ,श्रीलंका के एलटीटी उग्रवादी समस्याओं से त्रस्त कांग्रेस के मुख्य विरोधी विश्वनाथ प्रताप सिंह थे। जिन्होंने राजीव गांधी को बोफोर्स तोपों के सौदो में लपेटकर जनता को यह विस्वास दिलाने में कामयाबी पायीं की उच्चतम स्तर पर भ्रस्टाचार फैला है और वे ही सत्ता में आने के बाद इसका खुलासा कर देंगे। जनता उनके इस वादे पर विस्वास कर हाथों हाथ लिया।
 1989 में नोवी लोकसभा के चुनाव में नेशनल फ्रंट को 146 सीट मिली , भाजपा को 86 सीटों पर सफलता मिली और वामदलों के पास 52 सांसद थे। इसप्रकार भाजपा और वाम दलों के बाहरी समर्थन से श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह 2 दिसंबर,1989 को भारत के दसवें प्रधानमंत्री बने। देवीलाल उपप्रधानमंत्री बने।
अटल जी , राजनीतिक कूटनीति के चाल चलते हुए सरकार बी.पी.सिंह से  समर्थन वापस ले लिया तो 10 दिसम्बर, 1990 को विस्वास मत हारने के बाद बी.पी.सिंह ने इस्तीफा दे दिया।
इसी बीच चंद्रशेखर (बलिया के सांसद) 64 सांसद लेकर जनता दल से अलग हो गए और समाजवादी जनता दल के नाम से पार्टी बनायी। और कांग्रेस की बाहरी समर्थन से सरकार बनाई ,10 नवम्बर 1999 ई. को देश के 11वें प्रधानमंत्री बने। लेकिन कांग्रेस के दवाबों में नही आने के कारण उन्हें 20 जून 1991 को इस्तीफा देना पड़ा। ये युवा तुर्क नाम से महशूर थे।
नवमीं लोकसभा के गठन के 16 माह बाद ही मध्यावदी चुनाव का बिगुल बज गयी। 



Sunday, 19 August 2018

UTI :- SIP

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Saturday, 4 August 2018

◆◆ आयुष्मान भारत योजना ◆◆

आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 14 अप्रैल ,2018 को डॉ भीमराव अम्बेडकर की जन्म दिवस पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से आधिकारिक घोषणा की। इस अवसर पर इन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना केवल सेवा प्रदान तक ही सीमित नही रहेगी बल्कि इसमे सार्वजनिक भागीदारी को सजग रूप से बढ़ायी जाएगी जिससे हम एक स्वस्थ, शशक्त और खुशहाल भारत का निर्माण कर सके।
आयुष्मान भारत
    सन 2015 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और इनके सदस्य राष्ट्रों ने सतत विकाश लक्ष्यों को स्वीकार कर "सबके लिये स्वास्थ्य" सुनिश्चित करने का प्रतिबंधता व्यक्त की - किसी भी इंसान को कही भी बिना किसी वितीय कठिनाई के अनिवार्य गुणवत्ता-पूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सके। सयुक्न्त राष्ट्र संघ के 2030 एजेंडा में  17 विकाश लछ्य,169 प्रायोजन निर्धारित किये गए है। उन सबके लिए मानवाधिकार सुनिश्चित करने और सभी महिलाओं और बालिकाओ के लिंग समानता हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यसूची में  जन स्वास्थ्य के लिए  मजबूत राजनीतिक प्रतिबदता का प्रावधान है। विश्व समुदाय का भाग होने के कारण भारत, वैश्विक आदेश को हासिल करने के लिए सतत प्रयास करते रहता है।
अप्रैल 2014 में मोदी सरकार बनने के बाद भारत के स्वास्थ्य बजट में उत्तरोत्तर वृद्धि हुई हैं। राष्ट्रीय एवं स्वास्थ्य मंत्रालय का 2012-13 में 14103 मिलीयन अमेरिकी डॉलर था। 2017-18 में 21476 मिलियन डॉलर था।भारत सरकार 15 अगस्त 2018 को एक साथ पूरे भारत मे आयुष्मान भारत योजना लागू करने जा रही हैं।आयुष्मान भारत योजना वर्तमान में जारी दो योजनाओं 1. राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना 2.वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल हो जायेगा।
आयुष्मान भारत योजना में दो प्रमुख लक्षय है।
 1. सम्रग प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुविधा उपलब्ध कराने के लिएदेशभर में स्वास्थ्य और देखभाल केंद्रों का एक विशाल नेटवर्क स्थापित किया जाना है। ये केंद्र सभी चिन्हित गरीब परिवारों को निशुल्क चिकिस्ता और दवाइयां उपलब्ध कराएगा। इसको सुनिश्चित करने के लिए सयुंक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्यो (युएन-एसडीजी) के अनुसार कोई भी(विशेषकर महिलाएं, बच्चें और बुजुर्ग) छूट न जाये। योजना में परिवार के सदस्यों कु संख्या और आयु को हटा दिया गया है। इसमे अस्पताल में भर्ती होने से पूर्व और बाद के व्यय को समाहित किया जाएगा। इसमें परिवहन भत्ते भी समाहित रहेंगे।
2. इस योजना को राष्ट्रीय स्वास्थ्य  संरक्षा योजना (एनएचपीएस) के नाम से जाना जाएगा। आयुष्मान भारत के इस दूसरे संरक्षा लक्ष्य के दायरे में 10 करोड़ गरीब और वंचित परिवारों को शामिल किया जाना है।जिन्हें प्रति वर्ष प्रति परिवार को अस्पताल की दूसरी और तीसरी देखभाल के लिए 5 लाख तक की बीमा कवरेज की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों के ऐसे परिवार इसमें समाहित किए जाने है जिनके पास कच्ची दीवार और कच्ची छत के साथ केवल एक कमरा है। परिवार में 16 से 59 वर्ष की आयु का कोई वयस्क सदस्य नहीं हो । महिला प्रधान वाला परिवार जिसमे 16 से 59 आयु के कोई वयस्क पुरूष सदस्य नहीं हो। परिवार में कोई दिव्यांग सदस्य और परिवार में शारीरिक योग्य वयस्क सदस्य नहीं है। अजा/अजजा परिवार और भूमिहीन परिवार जिनकी आय का मुख्य भाग मैनुअल कैजुअल श्रम् से आता हो। ग्रामीण क्षेत्रों में निमनलिखित में से कोई भी परिवार स्वत ही इसमें समाहित हो जायेगा, अष्याहीन परिवार, निराश्रित, भिश्चा पर आश्रित, आदिवासी जनजातीय समुदाय, मैनुअल कूड़ा धोने वाले परिवार, कानूनी रूप से बंधुआ श्रम से मुक्त व्यक्ति और शहरी क्षेत्रों के लिए योजना के अंतर्गत 11 परिभाषित पेशेवर श्रेणियां पात्र हैं। आईआई

Thursday, 19 July 2018

,** मानक हिंदी वर्णमाला : भाग १

स्वाधीनता से पहले सांस्कृतिक पुनर्जागरण के पुरोधा और स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत अनेक चिंतक और श्रेष्ठ मनीषियों ने भारतवर्ष जैसे एक बहुभाषी राष्ट्र के लिए एक राष्ट्रभाषा की आवश्यकता पर निरंतर बल दिया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने तो यहां तक कहा कि राष्ट्रभाषा के अभाव में देश गूंगा है। इसीलिए उन्होंने देश की स्वतंत्रता तथा उसके उत्थान के लिए जो अनेक रचनात्मक काम हाथ में लिए ,उनमें से एक काम हिंदी के प्रचार प्रसार का काम था।
"अनेकता में एकता" भारतीयता का मूलमंत्र है।हमारा देश बहुभाषी ही नहीं,बहुजातीय और बहुधर्मी भी है। इस महादेश का भूगोल और इतिहास विविधता से भरा है।रहन सहन और खानपान में भी भिन्नता दृष्टिगोचर होती है।
भारतीय संविधान की अष्टम  अनुसूची में १८ भाषाएं गिनाई गई हैं।देश की एकता और अखंडता को सुदृढ़ करने के लिए यह आवश्यक है कि विभिन्न भाषा भाषी प्रदेशों की जनता को भावात्मक दृष्टी से निकट लाया जाए। इसके अतिरक्त यह भी जरुरी है कि देश के विभिन्न प्रदेशों के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक आदन प्रदान की स्वस्थ परंपरा को उत्तरोत्तर बहुआयामी प्रोत्साहन दिया जाए।

हिंदी के संघ की राजभाषा स्वीकृत हो जाने से यह और भी आवश्यक हो गया है कि उसे संविधान द्वारा स्वीकृत सभी भारतीय  भाषाओं के निकट लाया जाए और उनमें परस्पर समान तत्वों की खोज की जाए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३५१ में हिंदी भाषा के विकास के लिए दिया गया निर्देश इस प्रकार है:
"हिंदी भाषा की  प्रसार वृद्धि करना , उसका विकास करना ताकि वह भारत की सामासिक संस्कृति के सब तत्वों की अभिव्यक्ति का माध्यम हो सके तथा उसकी आत्मीयता में हस्तक्षेप किए बिना हिन्दुस्तानी और अष्टम अनुसूचि में  

उल्लखित अन्य भारतीय भषाओं के रूप , शैली और पदावली को आत्मसात करते हुए जहां आवश्यक या वांछनीय हो वहा उसके शब्द भंडार के लिए मुख्यत: संस्कृत से उल्लिखित भाषाओं से शब्द ग्रहण करते हुए उसकी समृद्धि सुनिश्चित करना संघ का कर्तव्य होगा।"
संविधान की इस भावना के अनुपालन की दिशा में १ मार्च,१९६० को शिक्षा मंत्रालय ( अब शिक्षा विभाग ,मानव संसाधन विकास मंत्रालय) के अधीन केंद्रीय हिंदी निदेशालय की स्थापना हुई। मद्रास,हैदराबाद , गुवाहाटी और कोलकात्ता में इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय है।हिंदी को अखिल भारतीय स्वरूप प्रदान करने , हिंदी भाषा के माध्यम से जन जन को जोड़ने और हिंदी को वैश्विक धरातल पर प्रतिष्ठा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हिंदी कि यह सरकारी संस्था अनेक महत्वपूर्ण योजनाओं को कार्यान्वित कर रही हैं।

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 इंजन स्टार्ट होते ही मेन बैंक सापट के गियर से चाल लेकर Auxiliary जनरेटर का आमेचर घूमना शुरू कर देता है जो स्वंय के बनाये गये करन्ट से इसकी ...