इंजन स्टार्ट होते ही मेन बैंक सापट के गियर से चाल लेकर Auxiliary जनरेटर का आमेचर घूमना शुरू कर देता है जो स्वंय के बनाये गये करन्ट से इसकी फील्ड एक्साइट होकर ए.सी करंट बनाना शुरु कर देता है जिसे सिलिकॉन control रेक्टीफायर द्वारा डीसी में बदल कम्पेनियन अल्टरनेटर के फील्ड को एक्साइट करते है जिसका आमेचर मेन अल्टरनेटर से जुडकर चूमता है जिससे प्री फेस एसी बिजली बनाना शुरू कर देता है इस बिजली से टीसीसी, टी.सी.सी.2 ब्लोअर मोटर, टीसीसी इलेक्ट्रॉनिक्स ब्लोअर मोटर, डस्ट दिन ब्लोअर मोटर एवं दोनो रेडिएटर फैन मोटर को चलाता है तथा एससीआर के द्वारा इस बिजली को श्री.सी में बदलकर मेन अल्टरनेटर के फील्ड को एक्साइट करते हैं जिसका आमेचर मेन कैक सापट से जुडकर घूमता है जिससे थी फेस ए.सी बिजली बनाता है यह रेक्टिफायर के द्वारा डी.सी में परिवर्तित होकर डी.सी लिंक में चली जाती है। रिवर्सर हैंडिल आगे या पीछे होने पर ईआर तथा जी एफ स्विच ऑन, आइसोलेशन स्विव रन पर होने पर थाटल को एक नींग खोलने से डी.सी लिंक का ओपेन इण्टरलॉक क्लोज हो जाता है, जिससे टी.सी.सी. एवं टी.सी.सी2 कम्प्यूटर में डी.सी बिजली सिरीज में बली जाती है इनमें लगे इनवर्टर श्री फेस ए.सी में परिवर्तित करके एवं वोल्टेज को बढ़ाकर टी. सीसी के द्वारा फन्ट ट्रक पर लगे ट्रैक्सन मोटर नं. 123 तथा टी सी सी 2 के द्वारा Rear ट्रक पर लगे ट्रेक्सन मोटर नं. 4,5,6 को पैरलल में बिजली देता है जिससे सभी मोटरों के आर्मेचर घूमकर गुल गियर के द्वारा एक्सल पूर्व करके को Move शुरू कर देता है जिससे लोकोमोटिव चलना शुरू कर देता है।
Saturday, 13 January 2024
सल्तनत कालीन सैन्य संगठन
सैन्य संगठन
सैनिकों के प्रायः चार वर्ग होते थे ।
• प्रथम वर्ग में वे सैनिक आते थे जिनकी भर्ती नियमानुसार सुल्तान की सेना के लिए की जाती थी।
• इसी वर्ग के अन्तर्गत शाही गुलाम, शाही अंगरक्षक इत्यादि आते थे।
• द्वितीय वर्ग में वे सैनिक आते थे, जिनकी भर्ती दरबार के सूबेदारों और प्रान्तीय इक्तादारों द्वारा की जाती थी।
• इनका वेतन इक्तादार ही देते थे ।
• तृतीय वर्ग में वे सैनिक आते थे, जिनकी भर्ती युद्ध के समय अस्थायी रूप से की जाती थी ।
• चतुर्थ वर्ग में वे सैनिक आते थे जो स्वेच्छा से युद्ध करने के उद्देश्य से सेना में भर्ती होते थे ।
• इन्हें युद्ध में लूटी हुई सम्पति में से हिस्सा दिया जाता था ।
• दीवान-ए-आरिज 'आरिज-ए- मुमालिक' सेना का प्रधान होता था ।
• इसका मुख्य कार्य सेना का संचालन, अनुशासन तथा उसपर नियंत्रण रखना था ।
सैनिक अधिकारियों को वेतन के रूप में जागीर तथा सैनिकों को नगद वेतन दिया जाता था ।
• सेना के तीन विभाग थे- (1) घुड़सवार सेना (2) हस्ति सेना (3) पैदल सेना
• घुड़सवार सेना, सेना का मुख्य आधार थी • घुड़सवार दो प्रकार के होते थे- एक अस्पा, यानी जिनके पास एक घोड़ा होता था। तथा दो अस्पा-जिनके पास दो घोड़ा होता था।
• हस्तिसेना का प्रचलन भी था ।
• पैदल सेना को 'पायक' कहा जाता था ।
• युद्ध के समय सेना को चार भागों में विभाजित किया जाता था ।
• ये भाग थे-केन्द्रीय, बाम पक्ष, दक्षिण पक्ष और सुरक्षित दल।
सल्तनत कालीन प्रशासन
सल्तनतकालीन प्रशासन
• सल्तनतकालीन प्रशासन केन्द्रीकृत था।
• कई सुल्तानों ने खलीफा के नाम से खुतवा पढ़वाया, लेकिन सत्ता में खलीफा का कोई हस्तक्षेप नहीं था।
• खुतवा सिर्फ दिखावा मात्र था, जो सुल्तानों को इस्लामिक विश्व के साथ जोड़ता था।
• सुल्तान का पद केन्द्रीय प्रशासन का सबसे महत्त्वपूर्ण पद था । • सारी राजनीतिक, सैनिक व कानूनी सत्ता उसी के हाथ में थी। वह राज्य का सर्वोच्च प्रशासक, सेनापति और न्यायाधीश था।
• सुल्तान की नियुक्ति और उत्तराधिकार का कोई सुनिश्चित नियम सल्तनत काल में प्रचलित नहीं था।
• व्यक्तिगत क्षमता सबसे महत्वपूर्ण थी जिसके आधार पर कोई भी सुल्तान बन सकता था ।
• सल्तनतकालीन प्रशासन दो भागों में विभक्त था-(1) केन्द्रीय शासन (2) प्रान्तीय शासन
• सल्तनत काल में प्रशासनिक व्यवस्था पूर्ण रूप से इस्लामिक रीतियों पर आधारित थी ।
उलेमाओं की प्रशासन में महत्त्वपूर्ण भूमिका होती थी ।
• मुबारक खिलजी पहला ऐसा सुल्तान था जिसने खिलाफत के मिथक को तोड़कर स्वयं को खलीफा घोषित किया।
• सुल्तान 'शरीयत' के अधीन कार्य करता था ।
• मंत्रिपरिषद को सल्तनतकाल 'मजलिस-ए-खलबत' कहा जाता था।
■ सल्तनतकालीन मंत्रिपरिषद् में 4 मंत्री महत्त्वपूर्ण थे-
(1) वजीर (प्रधानमंत्री)
(2) आरिज-ए-मुमालिक
(3) दीवान-ए-इंशा
(4) दीवान-ए-रसातल
◆केन्द्रीय प्रशासन◆
• केन्द्रीय प्रशासन को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनेक मंत्री होते थे ।
• मंत्रियों की नियुक्ति सुल्तान अपनी इच्छानुसार करता था ।
• ये मंत्री सुल्तान को शासन में अपना सहयोग प्रदान करते थे। • इनकी संख्या निश्चित नहीं थी ।
• साधारणतया मंत्रियों की संख्या 6 होती थी- (1) वजीर (2) आरिज-ए-मुमालिक (3) दीवान-ए-रसालत (4) दीवान-ए-ईशा (5) सद्र-उस-सुदूर (6) दीवान-ए-कजा
• बहरामशाह ने नाइब का पद भी सृजित किया था जो सुल्तान के बाद का सबसे बड़ा अधिकारी होता था ।
• वजीर का पद आधुनिक प्रधानमंत्री जैसा था, वह सारे विभागों की देख-रेख करता था।
● वजीर के विभाग को दीवान-ए-वजारत कहते थे।
● वजीर की सहायता के लिए नायब वजीर होता था।
•सुल्तान की अनुपस्थिति में वजीर ही शासन प्रबंध करता था।
आरिज-ए-मुमालिक के दो प्रमुख अंग थे - मुशरिफ-ए-मुमालिक (महालेखाकार) तथा मुस्तौफी-ए-मुमालिक (महालेखा परीक्षक)।
• मुशरिफ-ए-मुमालिक प्रान्तों तथा अन्य विभागों से प्राप्त आय-व्यय का लेखा-जोखा रखता था। फिरोजशाह तुलगक के जमाने में यह केवल आय का हिसाब रखता था । इसकी सहायता के लिए एक नाजिर होता था ।
• मुस्तौफी-ए-मुमालिक, मुशरिफ द्वारा रखे गये लेखों-जोखों की जाँच करता था। इसकी सहायता के लिए लिपिकों की व्यवस्था थी । इसके लिए एक विशालकाय कार्यालय बना हुआ था ।
• दीवाने-रसालत विदेश विभाग था ।
• विदेशों से पत्र व्यवहार तथा विदेशी राजदूतों की व्यवस्था करने का उत्तरदायित्व इसी विभाग का था। विदेशों में राजदूत नियुक्त करने में इस विभाग की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी । दीवाने-इंशा पत्र व्यवहार करने वाला विभाग था।
• इसके प्रधान को 'दीवान-ए-खास' कहते थे ।
• इसका मुख्य कार्य शाही घोषणाओं तथा पत्रों के मसविदे तैयार करना था ।
• इस विभाग के लेखकों को दबीर के नाम से जाना जाता था।
• सुल्तान के सभी फरमान इसी विभाग के द्वारा जारी किए जाते थे ।
• सद्र-उस-सुदूर, धर्म विभाग तथा राजकीय दान विभाग का सर्वोच्च अधिकारी था ।
• इसका मुख्य कार्य इस्लामी नियमों को लागू करवाना था ।
• यह मस्जिदों, मदरसों, मकतबों आदि के निर्माण के लिए धन की व्यवस्था भी करता था।
• दीवान-ए-कजा का प्रमुख काजी-उल-कजात होता था।
• यह न्याय विभाग का सर्वोच्च अधिकारी होता था।
• यह पद प्रायः सद्र-उस-सुदूर को ही सौंपा जाता था। इनके निर्णय पर पुर्नविचार सिर्फ सुल्तान के न्यायालय मे ही हो सकता था।
■■ अन्य विभाग ■■
• दीवाने-वक्फ की स्थापना जलालुद्दीन खिलजी द्वारा की गयी थी। • यह विभाग व्यय के कागजातों की देख-रेख किया करता था।
● दीवाने-मुस्तखराज की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गयी। • यह वित्त विभाग के अधीन कार्य करता था ।
• यह विभाग आयकरों का लेखा-जोखा रखता था ।
●'दीवाने-कोही' की स्थापना मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा की गयी ।
• यह कृषि विभाग था, जो कृषि के विकास के लिए कार्य करता था ।
• आरिजे-मुमालिक सैन्य विभाग की स्थापना बलबन द्वारा की गयी ।
• दीवान-ए-आरिज इस विभाग का प्रमुख था ।
• यह विभाग सैनिकों की भर्ती करता था तथा फौजों का निरीक्षण करता था ।
• बरीद-ए-मुमालिक सूचना एवं गुप्तचर विभाग का प्रमुख होता था
• यह डाक चौकी का भी प्रमुख होता था ।
• विभिन्न गुप्तचर और संदेशवाहक इसके अधीन कार्य करते थे ।
• दरबार में भी अनेक कर्मचारी होते थे, जैसे- (1) वकील-ए-दरमहल (2) बारबक (3) अमीर-ए-हाजिब (4) अमीर-ए-शिकार (5) अमीर-ए-मजलिस (6) सर-ए-जहाँदार ।
• वकील-ए-दरमहल राजमहल व सुल्तानों की व्यक्तिगत सेवाओं का प्रबंध करता था। • राजकीय आदेशों का प्रचार, प्रसार एवं क्रियान्वयन इसी के माध्यम से होता था।
• बारबक शाही दरबार की शान-शौकत व मर्यादाओं की रक्षा करता था ।
●अमीर-ए-हाजिब शाही दरबार में पेश होने के तौर-तरीकों को देखता था ।
• अमीर-ए-शिकार शाही शिकार का प्रबंध करने वाला अधिकारी था ।
• अमीर-ए-मजलिस राज दरबार में हाने वाले उत्सवों तथा दावतों का प्रबंध करता था ।
• सर-ए-जहाँदार सुल्तान के व्यक्तिगत अंगरक्षकों का प्रमुख होता था ।
• अमीर-ए-आखूर अश्वशाला का प्रमुख था ।
• शाहन-ए-पील हस्तिशाला का प्रमुख होता था ।
• दीवान-ए-वंदगान गुलामों की देखरेख करता था। इसकी स्थापना फिरोज तुलगक द्वारा की गयी थी।
Saturday, 30 December 2023
वर्किंग लोको के साथ डेड लोको को जोड़ने का तरीका
वर्किंग लोको के साथ डेड लोको को जोड़ने का तरीका
1. लोकों को जोड़ने से पहले सुनिश्चित करें कि डेढ लोकों में हैंड ब्रेक लगा है यदि नहीं तो लगा दें।
2. हेड लोको के सर्किट ब्रेकर पैनल में लगे सभी सर्किट ब्रेकर आफ एवं मेन रिर्जवायर का प्रेशर शून्य होना सुनिश्चित करें।
3. दोनों लोको को आपस में जोड़ दें तथा बीपी एवं एफ.पी एअर होज पाइप जोड दे पस्तु एगिल कॉक अभी मत खोले।
4. डेड लोको के नोज कम्पार्टमेंट में लगा डेड-मेन कॉक खोल दें। तथा दोनों कंट्रोल स्टैंड पर रिर्वसर न्यूटल में थाटल आईडल ए.9 हैंडिल फुलसर्विस, एस.ए.9 रिलीज तथा एल एण्ड टी स्विच ट्रेल अवस्था में रखें।
5. अब वर्किंग लोको के वर्किंग कंट्रोल स्टैंड का एल एण्ड टी स्विच टेस्ट-अवस्था में रखने के बाद B.P एवं F.P का एंगिल काल खोल दें तथा 5 सेकेंड बाद पुनः लीड एण्ड ट्रेल स्विच लीड अवस्था में कर दें।
६. वर्णिग लोकों में वी.पी एवं वी.सी प्रेशर पूरा होने पर वर्किंग इंजन से ए-9 एवं एसए-9 हैंडिल से ब्रेक लगाकर दोनों लोको में ब्रेक लगना व रिलीज होना सुनिश्चित करे।
7 अप लोकों को नियमानुसार लोड पर लगाकर संचालन शुरू करें ।
नोट: यदि वर्किंग लोको जी.एम लोको हो और अटैच लोको साधारण लोको स्टार्ट अथवा के रूप में जोड़ना हो तो पूर्व नियमानुसार जोड़ें।
2. यदि वर्किंग लीको साधारण और अटैच लोको जी.एम लोको स्टार्ट एवं डेड के रूप में जोड़ना हो तो उपरोक्त नियम के द्वारा जोड़ा जायेगा ।
Tuesday, 26 December 2023
WDG4 HHP LOCO क्षमता
WDG4 HHP LOCO क्षमता
1. एच.एस.डी आयल-6000 लीटर
2. मेन इंजन आयल (ल्यून आयल) आर.आर--520 एम.जी-1457 ली. (650 ली. डिपिस्टिक पर). 3. कम्प्रेशर आयल- (SP) 100-9.98 लीटर
4. गर्वनर आयल-आर आर 520 एमजी-2.8 लीटर
5. गियर केस आयल- मोबिल SHC-634
6. व्हील फ्लॅज लुब्रीकेटर- सर्वो डब्लू एफ एल ग्रोस
7. कूलेंट कम्पाउंड- नालको-2100 पिंक कलर बोरेट नाइट्रेट
8. पानी वाटर टैंक में 371 लीटर
9. वाटर कूलिंग सिस्टम में पानी 1045 लीटर कुल 1416 लीटर
लोकोमोटिव के भाग-
संरचना के आधार पर इस लोकोमोटिव को मुख्यतः 11 भागों में बाँटा गया है।
1. नोज कम्पार्टमेंट-1. नोज कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण-
1.पी एण्ड जी (पैसेंजर एवं गुडस सर्विस हैंडिल)
2. डेड मेनकॉक
3. रेगुलेटर बाल्य
4. कम्प्यूटर कंट्रोल ब्रेक यूनिट
5. वॉल्टेज कन्डीशनिंग यूनिट
6. कम्प्यूटर रिले यूनिट
7. न्यूमेटिक कंट्रोल यूनिट
8. सी-3 डब्यू आर डिस्ट्रीब्यूटर बाल्व
2. लोको पायलट केबिन- लोको पायलट केबिन में लगे उपकरण-
इसमें दो कंट्रोल स्टैंड होते हैं एवं लेफ्ट हैंड ड्राईविंग है शार्ट हुढ दिशा में बाएं तरफ के कंट्रोल स्टैंड को लेपट कंट्रोल स्टैंड तथा लांग हुड के तरफ के कंट्रोल स्टैंड को राइट कंट्रोल स्टैंड कहते हैं।
3. इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कम्पार्टमेंट- इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट में लगे उपकरण-
इस पर मुख्यतः चार पैनल है।
1. सर्किट ब्रेकर पैनलं, 2 इंजन कंट्रोल पैनल, 3. ईएम. 2000 डिस्प्ले पैनल,
4. इ.सी.सी1 (इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कम्पार्टमेंट)
1. सर्किट ब्रेकर पैनल में लगे उपकरण इसमें तीन प्रकार के सर्किट ब्रेकर लगे हैं।
(ए) सफेद लेबिल में लगे ब्रेकर
1. लाइट-30 एम्पियर
2. हेडलाइट-35"
3. राडार
4. इवेन्ट रिकार्डर-3 ए
5. कैब फैन 30 ए
6. एअर ड्रायर-15 ए
7. गर्वनर बूस्टर पम्प 30ए (केवल WDP4 में)
4.ट्रैक्सन कंट्रोल कम्पार्टमेट- ट्रैक्सन कंट्रोल कम्पार्टमेंट (कैबिनेट) में लगे उपकरण-
1. ट्रैक्सन कंट्रोल कम्प्यूटर-1 एवं 2
2. ट्रैक्सन कंट्रोल कम्प्यूटर-1 एवं 2 ब्लोअर
3. ग्रिडस-8 एवं ग्रिडस ब्लोअर मोटर-2
5. सेन्ट्रलाइज्ड एअर फिल्टर कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण-
1. डस्ट बिन ब्लोअर मोटर
2. टी.सी.सी इलेक्ट्रानिक्स ब्लोअर
3. बैगी टाइप फिल्टर
4.. ट्रैक्सन मोटर ब्लोअर
5. साइक्लोनिक फिल्टर
6. जनरेटर कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण
1. ट्रैक्सन अल्टरनेटर 2. कम्पेनियन अल्टरनेटर
3. आक्जिलरी जनरेटर (इं. दाए तरफ)
4. टर्बो सुपरचार्जर
5. आफ्टर कूलर-2
6. स्टार्टिंग मोटर-2 (इ. दाए तरप्फ)
7 . इंडक्टर ट्यूब
7. इंजन कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण
1. समस्त एसेसरीज के साथ डीजल इंजन
2. बैटी नाइफ स्विच एवं ४००एम्पियर यूज (इं. दाए तरफ) सोक बैंक पम्प) (इं. दाए तरफ)
3 . टर्बो ल्यूब पम्प मोटर ( 24. इंजन के दोनों तरफ ल्यूब आयल डिपस्टिक
5.सेन्ट्रलाइज एअर फिल्टर कम्पार्टमेंट
6.जनरेटर कम्पार्टमेंट
7.इंजन कम्पार्टमेंट
8.एसेसरीज कम्पार्टमेट
9.कम्प्रेशर कम्पार्टमेंट
10.रेडियेटर कम्पार्टमेंट
11.अन्डर फेम
Monday, 25 December 2023
ई एम डी डीज़ल लोको का डाटा
1.लोकोमोटिव माडल-GT46 MAC (WDG4) GT46PAC (WDP4)
2.लोकोमोटिव हार्स पावर-4000 सी.सी (3939 एच.पी.)
3.गति-WDG4- 120kmph WDP4-160kmph
4.ट्रेक्टिवएफर्ट अधिकतम सीमा लगातार चलने की सीमा-540 किलो न्यूटन 400 किलो न्यूटन
5.डायनामिक ब्रेकिंग एर्फट अधिकतम-270 कि.न्यूटन (WDG4) (40kmph से कम) 160 कि.न्यूटन (WDP4) (60kmph से 1.04 kmph तक)
6.गियर रेशियो- WDG4 17:90 पिनियन वुलगियर, WDP4 17:77
7.चक्के का व्यास-43"
8.इंजन माडल एवं प्रकार फायरिंग आर्डर-710 G3B-16 Cylinder 2 stroke Tturbo supercharger, 1,8,9,16,3,6,11,14,4,5,12,13,2,7,10,15
9.व्यवस्थित सिलिंडर-45 डिग्री V आकृति में
10.सिलिंडर बोर-230.19 एमएम
11.रोटेशन, फेसिंग फलाई व्हील सिरा-काउंटर क्लाक वाईज
12.मेन कैंक शाफ्ट की अधिकतम गति -904 आर.पी.एम.
मेन कैंक शाफ्ट की सामान्य आइडल गति -269
मेन कैंक शाफ्ट की न्यूनतम गति-200
13.एयर ब्रेक-सिस्टम -प्रकार-इलेक्ट्रोन्यूमैटिक माडल-WLNA-9BB डायरेक्ट
14.एयर-कम्प्रेशर-माडल-WLNA-9BB डायरेक्ट ड्राइव
टूस्टेज-3 सिलिंडर (वाटर कूल्ड)
15.कम्प्रेशर आयल सम्प क्षमता-9.98 लीटर
16.मेन जेनरेटर असेम्बली माडल
ई एम डी डीजल लोकोमोटिव
ई.एम.डी लोकोमोटिव का सामान्य परिचय
डी.एल.डब्ल्यू वाराणसी द्वारा निर्मित WDG4 मालवहन तथा WDP4 यात्री परिवहन के लिए उपयुक्त है। इस डीजल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में 16 सिलिंडर टर्बो सुपरचार्ज्ड, 2 स्ट्रोक डीजल इंजन लगा है। जो याँत्रिक शक्ति के द्वारा मेन ट्रैक्शन आल्टरनेटर को घुमाता है जिसमें मेन ट्रैक्शन आल्टरनेटर ए.सी करेंट बनाता है। जिसे इसके ही अन्दर लगे रैक्टीफायर के जरिये इस करेंट को डी सी ने बदल कर डी सी लिंक के द्वारा होकर इसे TCC1 एवं TCC2 के साथ लगे इन्वर्टर में भेजते हैं। जहाँ से इसे Three phase AC में बदल कर Computer की मांग के अनुसार थाटल के द्वारा Traction Motor में भेजकर Axle तथा चक्कों को घुमाकर लोको को चलाते हैं। इस लोकोमोटिव को नियंत्रित करने के लिए माइकोप्रोसेसर आधारित कम्प्यूटर कंट्रोल सिस्टम लगा है। जिसे EM2000 कम्प्यूटर कहते हैं। इसके साथ ही साथ इंजन से सवाद के लिए डायोग्नोसिटक डिस्प्ले यूनिट कहते हैं। EM2000.computer प्रणाली को इस प्रकार अभिकृमित किया गया है जो विभिन्न सिस्टम एवं ट्रैक्शन पावर का अभिलेखन तथा होने वाले दोषों को लिखित या संकेत द्वारा अवगतं कराता है।
Sunday, 26 February 2023
आँखों के नीचे काला धब्बा
आंखों के नीचे काले धब्बे होना आम समस्या है कम सोने, अधिक थकान होने, कमजोरी अथवा किसी बीमारी के कारण होते है । प्राय: नींद न आने की बीमारी के कारण होते हैं और उनकी आंखों पर काले धब्बे पड़ जाते है । नींद लेना स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है । यदि आपको नींद नही आती, आप को थकावट रहती है तो रोज सुबह घर में ही एक्ससाइज करनी चाहिये ।
आंखों की चारों तरफ की त्वचा बड़ी नाजुक होती है । इसलिये सौन्दर्य प्रसाधन लगाते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिये । सोने से पहले त्वचा को नमी देने वाली क्रीम या लोशन इस्तेमाल करनी चाहिये । रूई के फोहे को आंखों के इर्द-गिर्द लगाएं । आंखों के लिये बादाम क्रीम सबसे उपयुक्त होती है । इससे रंग भी साफ होता है और साथ ही त्वचा का पोषण होता है। कोई भी सौन्दर्य-प्रसाधन तत्व आंखों वाले क्षेत्र पर ज्यादा देर नहीं लगाना चाहिये । चेहरे पर लगाया जाने वाला लेप आंखों के आसपास नहीं लगाना चाहिये । आंखों पर खीरे का रस, आलू का रस तथा गुलाबजल को रूई के फोहे में भिगोकर आंखों पर रखना चाहिये ।
Sunday, 27 November 2022
भारतमाला फेज़-2
भारतमाला फेज-2 के तहत बनने वाले गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम बिहार में जल्द शुरू होगा। इसको लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, बिहार सरकार के निर्देश पर संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार का गठन भी कर लिया गया है। पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जल्द इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण की स्वीकृति भारत सरकार से मिलने की उम्मीद है।
इस एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा बिहार में ही पड़ेगा, जो करीब 416 किलोमीटर का होगा यह पूरी नई सड़क होगी । इसमें सबसे अधिक 94 किलोमीटर सड़क मधुबनी जिले में होगी। फोरलेन के इस एक्सप्रेस-वे के लिए बिहार सरकार केंद्र के प्रस्ताव पर पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है। बिहार के आठ जिले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर सीतामढ़ी, से अधिक 94 मधुबनी जिले में एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव पर दे चुकी है। पश्चिम चंपारण, मधुबनी, सुपौल, अररिया और प्. किशनगंज जिले से यह सड़क गुजरेगी। एक्सप्रेस- अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच कोई सीधी सड़क नहीं है । इस कारण गोरखपुर से सिलीगुड़ी की दूरी तय करने में एक दिन तक का समय लग रहा है । जबकि, प्रस्तावित गोरखपुर - सिलीगुड़ी हिस्सा एक्सप्रेस-वे से दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर 600 किलोमीटर से भी कम हो जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण बंगाल से सबसे अधिक बिहार को ही लाभ होगा।
उत्तर प्रदेश में इस सड़क का हिस्सा 84.4 किलोमीटर होगा, जो वहां के तीन जिले गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया से होकर गुजरेगा। वहीं, पश्चिम बंगाल के सिर्फ दार्जिलिंग में इस एक्सप्रेस-वे का हिस्सा होगा।
◆किस राज्य में कितनी लंबी होगी यह सड़क
बिहार 416.20 किमी
उत्तर प्रदेश 84.40 किमी
पश्चिम बंगाल 18.97 किमी
Saturday, 11 June 2022
Thursday, 26 May 2022
पटना में लगी रिवर्स वेंडिंग मशीन
पटना में स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम की ओर से बोरिंग रोड चौराहा एवं मौर्यालोक परिसर में रिवर्स वेंडिंग मशीन (आरवीएम ) लगायी गयी है।
मंगलवार को महापौर सीता साहू ने इसका उद्घाटन किया। यहां प्लास्टिक की पानी की बोतल, बिस्किट के खाली पैकटों की रिसाइकिलिंग की जाएगी। नगर निगम एवं एचडीएफसी बैंक एवं सीईई परियोजना के तहत पहली बार यह व्यवस्था की गई है। शहर की सड़कों पर पानी की खाली बोतल फेंकी हुई नहीं मिलेगी। इसके रिसाइकिलिंग के लिए शहर में दो जगह मशीन लगाई गई है। यहां फेंकी हुई प्लास्टिक बोतल देने पर लोगों को फूड एवं ट्रैवलिंग कूपन और कैश बैक मिलेगा।
◆ मशीन डिजिटल सेंसर आधारित सिस्टम के माध्यम से बोतल के खाली एवं भरे होने का पता लगा लेती है। भरी हुई बोतल को मशीन नहीं लेगी। बोतल लेने के बाद मशीन डिस्प्ले में मोबाइल नंबर डालने एवं ग्राहकों को मैसेज भेजने का विकल्प भी सामने दिखेगा। कंटेनर के भरने के बाद मशीन हैंडलर को ट्रिगर मैसेज करता है। सौ प्रतिशत कंटेनर भरने के बाद डिस्प्ले में मशीन का पूरा संकेत दिखाई देता है।
यह मशीन एक बार में 3000 बोतल रिसाइकिल कर सकती है। रिसाइकिलिंग के बाद प्लास्टिक मैटेरियल को बेचा जाएगा।
Saturday, 21 May 2022
विमल रॉय और उनके सहयोगी
बिमल रॉय का जन्म 12 जुलाई 1909 ई को एक बंगाली जमींदार परिवार के यहाँ हुआ। इनका जन्म स्थल सांथा, जिला सुतरापुर था जो उस वक्त पूर्वी बंगाल में पड़ता था। वर्तमान मे बंगला देश मे है। इनको स्टील फोटोग्राफी मे बहुत दिलचस्पी थी। जब ये कोलकत्ता गए तो इनको कैमरा सहायक का कार्य न्यू थिएटर प्राइवेट लिमिटेड मे मिला। ये पी.सी बरुआ के सहायक के रूप में कार्य करने लगे।
इनकी द्वारा खिंची गई तस्वीरों को देखकर उस समय के प्रिसिद्ध सिनेमा हस्ती
नितिन बोष ने इनसे कहा कि " तुम क्यों नही कैमरा डिपार्टमेंट जॉइन कर लेते हो" उस वक्त इनकी तनख्वाह 15 रुपये प्रतिमाह थी। " उदय पाथेर@ इनकी पहली फ़िल्म थी जिनमे इन्होंने डायरेक्टर के रूप में काम किया। इसके बाद ये मुम्बई चले गए। मुम्बई इनके साथ और सहयोगियों में ऋषिकेश मुखर्जी, स्किन डायरेक्टर अरविंदो घोष, असिस्टेंट डायरेक्टर असित सेन और फ़िल्म फोटोग्राफर कमल बोष थे। बाद में महान संगीतकार सलिल चौधरी भी इनके सहयोगी बने। इनके द्वारा निर्देशित फिल्म पुर फिल्मी जगत पर राज करने लगी। पब्लिक द्वारा पसंद कु जाने लगी। इनकी निर्देशन में " दो बीघा जमीन" परिणीता, बिराज बहु, सुजाता, बंदिनी और मधुमती जैसे प्रिसिद्ध फिल्में बनी। जो आज लोगों के जेहन से नही मिटी है।
Thursday, 19 May 2022
Arthritis :- गठिया के कारण
गठिया (Arthiritis) वह मानव शरीर की वह अवस्था है जिसमें शरीर के जोड़ों में दर्द, उद्दीपन और सूजन पैदा हो जाती है। यह स्तिथि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाई जाती है। शुरू में बड़े जोडु प्रभावित होते हैं मगर बाद में वह दूसरे जोड़ों तक फैल जाता है। इसके मुख्य प्रकार है: (1) रयूमेटायड आर्थिराइटिस और 121 ऑस्टियो आर्थिराइटिस। एक तीसरे प्रकार का आर्थिराइटिस प्यूरिन मेटाबोलिज्म (Punn Metabolism) की गड़बड़ी से होता है जिसे गाउट (गठिया) कहते हैं।
यूमेटायड आर्थिराइटिस जोड़ों के कार्टिलेज और सिनोबायल झिल्ली में उद्दीपन से पैदा होता है। इस उद्दोपन से तेल जैसा द्रव, जो जोड़ों की हड्डियों को चिकना रखता और परस्पर रगड़ने से रोकता है, प्रभावित हो जाता है। यह दशा स्ट्रेप्टोकोकस की वजह से पैदा हुए प्रदूषण का नतीजा होती है। स्ट्रेप्टोकोकस से विषैला द्रव रिसने लगता है और वह तैल द्रव को सुख्खा देता है जिससे जोड़ में दर्द? हड्डियों में रगड़ और सूजन पैदा हो जाती है। इस वर्ष से कम आयु के बच्चों में भी कभी-कभी यह गठिया हो जाता है; जोड़ों में दर्द, बुखार और सूजन हो जाती है। कुछ दिन बाद से लक्षण गायब होकर फिर उभर जाते हैं। धीरे-धीरे यह बार-बार होने लगता है। और गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती है। एक पुरानी कहावत है कि “ट्यूमेटॉयड आर्थिराइटिस जोड़ों में रिसाव पैदा करता और दिल को काटता है।" बच्चों को अगर यह रोग हो गया है तो इसके इलाज में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।
ओस्टियो आर्थिराइटिस (Osteo-arthiritis) जोड़ों की हड्डियों के बीच में स्थित उपास्थि (Cartilage) के ह्रास से उत्पन्न हुई छीजन और बाद में उसमें आई विकृति से होता है। जब कार्टिलेज घिसकर खत्म हो जाती है तो जोड़ों की हड्डियां आपस में रगड़ने लगती है। आम तौर से यह जोड़ों के सिरे और मेरुदंड (Spinal Column) यानी रीढ़ में होता है। मामूली या तेज दर्द बड़े जोड़ों में शुरू होता है, लेकिन बाद में यह कहीं भी हो सकता है, प्रभावित स्थान में सूजन भी हो जाती है। जोड़ों की हरकत बाधित हो जाती है और धीरे-धीरे विकृति उत्पन्न हो सकती है। छूने से प्रभावित स्थान लाल और गरम हो जाता है।
रोगी को अपना अधिकाधिक समय गरम और सुविधाजनक स्थान में बिताना चाहिए। प्रभावित भाग को गरम रखें। अधिक प्रकोप की दशा में चलने-फिरने से बचें। शराब, सिगरेट और लाल मांस खाने से बचें। पता करें कि किन चीजों के खाने से अलर्जी बढ़ती है, सूजन पैदा होती है। उन चीजों को अपने आहार से अलग कर दें। मिर्च-मसालेदार और वसायुक्त खाने से परहेज करें। दबाव तनाव को नियंत्रित करें क्योंकि टेंशन से मांसपेशियां सख्त पड़ जाती हैं।
Sunday, 15 May 2022
SBI नया एटीएम ऑनलाइन एक्टिव करें
यदि आप आने sbi बैंक का नया एटीएम बनवाया है तो उसे घर बैठे चालू कर सकते है। इसके लिए आपके पास नेट बैंकिंग होना आवश्यक है।
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Thursday, 23 December 2021
फलों की रानी नारंगी-गुणकारी
आम फलोंका राजा है तो फलों की रानी बननेके सभी गुण नारंगीमें हैं, इसी कारण नारंगीको फलों की रानी कहा जाता है।◆आयुर्वेदके ग्रन्थों में नारंगी का उल्लेख मिलता है-
'नारङ्गो मधुराम्लः स्याद्रोचनो वातनाशनः' (निघंटु, मिश्रप्र०
६। ६३)। सुश्रुतसंहितामें लिखा है-
अम्लं समधुरं हृद्यं विशदं भक्तिरोचनम्। वातघ्नं दुर्जरं प्रोक्तं नारङ्गस्य फलं गुरु।।
अर्थात् नारंगी अम्ल, मधुर, हृदयके लिये प्रिय, विशद, भोजनमें रुचिकर, वातनाशक, दुर्जर तथा गुरुपाकी (देरमें पचनेवाला) होता है।
नारंगीकी विशेषता यह है कि इसमें विद्यमान फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन-ये शरीरमें पहुँचते ही ऊर्जा देना शुरू कर देते हैं। इसका रस देर से पचता है। नारंगी में प्रचुर मात्रामें विटामिन 'सी' है। पोटैशियम एवं लोहा उच्चमानका है। नारंगी-सेवनसे हृदय, स्नायु- संस्थान तथा मस्तिष्कमें नयी शक्ति आ जाती है। बच्चे- बूढ़े, रोगी और दुबले-पतले लोग अपनी निर्बलता दूर करनेके लिये इसके सेवनसे लाभ उठा सकते हैं। तेज बुखारमें इसके सेवनसे तापमान कम हो जाता है।
इसका साइट्रिक एसिड मूत्ररोगों और किडनी रोगोंको दूर करता है। इससे मूत्र साफ आता है। किडनी-रोगसे बचनेके लिये नारंगीका सेवन करना चाहिये। छोटे बच्चोंको स्वस्थ और सुपुष्ट बनानेके लिये दूधमें चौथाई भाग मीठी नारंगीका रस मिलाकर पिलाना चाहिये। यह उनके लिये एक आदर्श टॉनिक है। इससे
बच्चोंमें नयी ऊर्जा, नयी शक्ति और नया उत्साह आ जाता है। दाँत निकलते समय बच्चोंको उलटी होती है तथा हरे-पीले दस्त होते हैं। इनमें नारंगी-रस देनेसे उनकी बेचैनी दूर होती है तथा पाचनशक्ति बढ़ जाती है। दाँतों और मसूढ़ोंके रोग भी इसके सेवनसे दूर होते हैं।
◆ शरीर से दुर्बल, गर्भवती महिलाओं, कब्ज, बवासीर, बेरी-बेरी, अपच, पेटमें गैस, जोड़ोंका दर्द, गठिया, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग, यकृत्-रोगसे ग्रस्त रोगियोंके लिये नारंगीका रस परम लाभकारी है। जिन्हें दूध नहीं पचता हैं या जो केवल दूध पर निर्भर हैं, उन्हें नारंगी का रस में अवश्य सेवन करना चाहिये। दूधमें विटामिन 'बी* कम्पलेक्स' नहीं के बराबर है। अतः इसकी पूर्ति नारंगी के सेवन से हो जाती है।
◆मुँहासे, कील और झाँई तथा चेहरेके साँवलेपनको - दूर करनेके लिये नारंगीके सुखाये छिलकोंका महीनचूर्ण गुलाब-जल या कच्चे दूधमें मिलाकर पीसकर आधा घंटातक लेप लगाये, इससे कुछ दिनोंमें चेहरा साफ, सुन्दर और कान्तिमान् हो जायगा। नारंगी सर्वरोगनाशक और शरीरके लिये परम को हितकारी फल है। खट्टी नारंगीका सेवन बच्चों-बूढ़ों, से गर्भवती महिलाओं, अम्लपित्त एवं पेटमें अल्सरवालों के लिये निषिद्ध है।
-सौजन्य आरोग्य अंक
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Saturday, 27 November 2021
कंप्यूटर का स्टार्ट बटन हैंग होना
लैपटॉप या डेस्कटॉप का स्टार्ट बटन कार्य नही करने पर क्या करें ?
@ यदि आपके कंप्यूटर का स्टार्टअप बटन काम नही कर रहा है तो आप अपने लैपटॉप का बंद नही कर पा रहे है ।
तो इस समस्या से निजात पाने के लिए ये पांच तरीके अपनाए ।
1. Ctrl+Alt+Delete बटन एक साथ दबाकर टास्क मैनेजर को ओपन कर ले।
इसके बाद विंडो एक्सप्लोरर पर क्लिक करे। उसको पुनः स्टार्ट पर क्लिक करके स्टार्ट करें।
स्टार्ट बटन कार्य करने लगेगा।
Saturday, 6 February 2021
मिज़ोरम एक रमणिक प्रदेश
मिज़ोरम
मिज़ोरम भारत वर्ष का सुंदर और रमणीक राज्य है।
मिज़ोरम का क्षेत्रफल 20.987 वर्ग कि.मी है। मिज़ोरम की राजधानी आइजोल है। इस राज्य की भाषायें: मिजों और अंग्रेजी है। मिज़ोरम में कुल जिले 8 है। मिज़ोरम की जनसंख्या 10,97,206 ( दस लाख इक्यानवे हज़ार चौदह) है जिनमे पुरुषों की संख्या 459,.783 और महिलाएं : 431.275 है।
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वर्तमान जनसंख्या-10,91,014 है। वर्तमान क्षेत्रफल 21,081 वर्ग किलोमीटर है।
वानतांग जलप्रपात मिज़ोरम में सबसे ऊंचा और अति सुंदर जलप्रपात है। यह थेनेज़ोल कस्बे से पांच किलोमीटर दूर है।
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मिज़ोरम की जनसंख्या वृद्धि दर (1991-2001) 29.18% थी। जनसंख्या घनत्व 42 व्यक्ति प्रति वर्ग-किलोमीटर है। इस राज्य की शहरी जनसंख्या लगभग 49.50% है। मिज़ोरम में लिंगानुपात महिलाएं (प्रति-हजार पुरुष में ) सन्-2001 में 938 , 2011 में 975 थी। मिज़ोरम की साक्षरता दर 88.49%.है। जिनमे पुरुष की साक्षरता 90.69% और महिलाएं की साक्षरता 86.13% है। मिज़ोरम की प्रति व्यक्ति आय 5.910 रु है।
स्थानीय भाषा में मिज़ोरम का अर्थ मिजों भूमि है । मिजो
शब्द का अर्थ पहाड़ वासी होता है। ब्रिटिश प्रशासन में मिजोरम का नाम "लुशाई पहाड़ी" जिला था। 1954 में संसद द्वारा पास किये गये अधिनियम के आधार पर इसका नाम मिजो पहाड़ी जिला रखा गया।1972 में जब इस प्रदेश को संघ शासित प्रदेश बनाया गया, तो इस राज्य का नाम मिजोरम रखा गया। भू-आकृति: मिज़ोरम भारत के पूर्वोत्तर कोने में स्थित है।
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इसके उत्तर में कछार जिला (असम) और मणिपुर राज्य, पूर्व और दक्षिण में चीन पहाड़ियां और अराकान (बर्मा), और पश्चिम में बंगलादेश की चटगांव पहाड़ी पट्टी व त्रिपुरा राज्य हैं। केंद्र सरकार और मिजो नेशनल फ्रेंट को बीच शांति समझौते के बाद तिरपनवें संविधान संशोधन अधिनियम के साथ मिजोरम 20 फरवरी 1987 को भारत संघ का 23-वां राज्य बन गया। इस राज्य के ऊपरी क्षेत्रों में जलवायु सुखद होती है। गर्मी में ठंडक होती है और जाड़ों में अधिक सर्दी नहीं पड़ती। मई से सितंबर तक औसत वर्षा 254 से.मी. होती है ।
इतिहासः मिजो लोग मंगोलियन नस्ल के हैं । लगता है कि शुरू में मिजो लोग बर्मा देश में शान राज्य में बसे थे।
ब्रिटिश शासन काल में मिज़ो लोग ब्रिटिश प्रदेशों, यहां तक कि सुरक्षित स्थानों पर भी, आक्रमण करते थे । अतः ब्रिटिश सेना ने मिज़ो लोगों के खिलाफ कार्यवाही आरंभ की और उनके इलाके पर कब्जा कर लिया। सन् 1891 में इस इलाके को ब्रिटिश भारत में मिला लिया गया ।
देश के आजाद होने पर मिजोरम असम का एक जिला बना रहा था। अधिकारियों ने मिज़ोरम की उपेक्षा की है। इस आरोप पर 1966 में आदोलन शुर्त कर दिया गया ।
मिजोरम को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया । सशस्त्र सेनायें (विशेष शक्तियां) अधिनियम भी लागू कर दिया गया। 30 जून 1986 को भारत सरकार और मिजों नेशनल फ्रंट के बीच मिज़ोरम शांति समझौता हो गया।
मिजों लोगों के अनेक कबीले हैं - जुशाई, पवई, पैथ. राल्ते पेंग, हमार कुकी, मारा, लाखे आदि।
19 वीं शताब्दी में मिज़ो लोग इसाई धर्म प्रचारकों के प्रभाव में आये और बहुत-से मिज़ो लोगों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया।
प्रशासनः मिजोरम विधान सभा में 40 सीटें है। 8 जिले हैं, 9 प्रखंड है। 3 हिल्स जिला परिषद है। मिज़ोरम में 23 शहर, 31 पुलिस स्टेशन और 681गांव हैं। वानतांग जलप्रपात मिज़ोरम में सबसे ऊंचा और अति सुंदर जलप्रपात है। यह थेनजोल कस्बे से पांच किलोमीटर दूर है। म्यांमार की सीमा के निकट चमफाई एक सुंदर पर्यटन स्थल है। तामदिल एक प्राकृतिक झील है जहां मनोहारी वन हैं।
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मिज़ोरम में एक भात्र उद्यम कृषि है। यह राज्य अपनी बिना रेशे वाली अदरक के लिए विख्यात है। अन्य व्यापारिक फसलें जैसे सरसों, तिल, आलू आदि भी उगायी जाती है ।
सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल धान है। दुसरे नंबर पर मक्का है। पहाड़ियों की ढाल पर इनकी खेती होती है ।
1999-00 में धान की फसल का कुल क्षेत्र 62,452 हैक्टेयर था । कृषि उपज बढ़ाने के रास्ते में एक बड़ी बाधा सिंचाई सुविधाओं का अभाव है मिजोरम में केवल 2885.30
हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है । मिजोरम में कोई बड़ा उद्योग नहीं है। इस इलाके की प्रमुख औद्योगिक गतिविधियां हथकरघा और दस्तकारी हैं। एक इंजीनियरिंग कारखाने ने बिनौले अलग करने और कपास को धुनने की एक मशीन की डिजाइन तैयार की है। चार किस्म रेशम का तैयार होता है - शहतूत के पत्तों का रेशम, एरी रेशम, टसर रेशम और मूंगा रेशम।
अन्य उद्योग है - अदरक के पेय, तेल, फल परिरक्षण, हथकरघा और इनके अलावा बिस्कुट-डबल रोटी, छमपाखाना, आरा मशीन, ईटें बनाना, साबुन बनाना जैसे अन्य छोटे पैमाने के और कुटीर उद्योग हैं।
विश्वविद्यालय: एन. ई. एच. यू. नार्थ ईस्स्ट हिल्स युनिवस्सिटी
Friday, 5 February 2021
पृथ्वी की भूवैज्ञानिक समय सारणी
पृथ्वी के भूवैज्ञानिक समय सारणी को महकल्पों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक महकल्प को अनेक कल्पों में , व प्रत्येक कल्प को अनेक युगों में बाँटा गया है।
भूवैज्ञानिक इतिहास में पृथ्वी के अंतिम महाकल्प को नूतनजीव महाकल्प कहा जाता है।
पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास का अध्ययन करने से पूर्व कुछ विशिष्ट शब्दावली के बारे जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।
1. EON (आयु) - इनमें प्री- कैम्ब्रियन के अंतर्गत आने वाले तीन EON है। 1. हेडियन(Eozoic), 2.आर्कियन (Archaeozoic), 3.प्रोटोरोज़ोइक (Proterozoic) है।
और कैम्ब्रियन काल के अंतर्गत आने वाले एक EON फेनेरोज़ोइक (Phenerozoic) है।
◆ रेडियोधर्मी तथ्यों के आधार पर पृथ्वी के निर्माण से वर्तमान तक के समय को चार EON (आयु) में बाँटा गया हैं।
प्री-कैम्ब्रियन(4.6अरब वर्ष पूर्व से 57करोड़ वर्ष पूर्व तक)|
1.हेडियन(HADEAN):-(4.6 अरब वर्ष पूर्व से 3.8अरब वर्ष पूर्व)
2.आर्कियन्(ARCHEAN):-(3.8 अरब वर्ष पूर्व से 2.5 अरब वर्ष पूर्व)
3. प्रोटोरोज़ोइक:-(2.5 अरब वर्ष पूर्व से 57 करोड़ वर्ष पूर्व)
◆ कैम्ब्रियन काल
4.फेनेरोज़ोइक (57 करोड़ वर्ष पूर्व से वर्तमान तक का समय)
पूर्व कैम्ब्रियन या आध्य अवधि
पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद एक शांत समय की उपस्थिति स्वीकार की जाती है। जिसके बारे में अभी तक कोई विशिष्ट जानकारी का अभाव है। इस अवधि के तीन उपविभाग है।
1. हेडियन या Eozoic EON (इयोजोइक-आयु)
2.आर्कियोजोइक आयु (Archaeozoic-EON)
3.प्रोटोरोज़ोइक आयु (Proterozoic-EON)
Aristotle's view of matter
Aristotle's view of matter:
Greek philosopher Aristotle (384-322 B.C.)
believed that all material things are made up of four Primary or elementary substances : fire, air, water, and earth. He also believed that these substances differed in two properties; hot versus cold and dry versus wet. The
primary substances can be represented as the edges of a square, and each one is flanked by their associated properties on the corners of the square. For example, cold and dry are the properties associated with the substance
earth. In Aristotle's philosophy of matter, a piece of wood must contain a lot of earth because he thought that the wood felt cold and dry.
Sunday, 31 January 2021
न्यू पेन्शन योजना में एकाउंट मैनेजमेंट चार्ज क्या है ?
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इंजन स्टार्ट होते ही मेन बैंक सापट के गियर से चाल लेकर Auxiliary जनरेटर का आमेचर घूमना शुरू कर देता है जो स्वंय के बनाये गये करन्ट से इसकी ...
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मनुष्य की आँख प्रकृति प्रदत्त अद्भुत प्रकाशीय यंत्र है। जो एक कैमरे से मिलती जुलती है। आँख के गोले अथार्त नेत्र गोलक की सबसे बाहर...
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