Sunday, 27 November 2022

भारतमाला फेज़-2

 भारतमाला फेज-2 के तहत बनने वाले गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम बिहार में जल्द शुरू होगा। इसको लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, बिहार सरकार के निर्देश पर संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार का गठन भी कर लिया गया है। पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जल्द इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण की स्वीकृति भारत सरकार से मिलने की उम्मीद है।

इस एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा बिहार में ही पड़ेगा, जो करीब 416 किलोमीटर का होगा यह पूरी नई सड़क होगी । इसमें सबसे अधिक 94 किलोमीटर सड़क मधुबनी जिले में होगी। फोरलेन के इस एक्सप्रेस-वे के लिए बिहार सरकार केंद्र के प्रस्ताव पर पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है। बिहार के आठ जिले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर सीतामढ़ी, से अधिक 94 मधुबनी जिले में एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव पर  दे चुकी है। पश्चिम चंपारण, मधुबनी, सुपौल, अररिया और  प्. किशनगंज जिले से यह सड़क गुजरेगी। एक्सप्रेस- अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच कोई सीधी सड़क नहीं है । इस कारण  गोरखपुर से सिलीगुड़ी की दूरी तय करने  में एक दिन तक का समय लग रहा है । जबकि, प्रस्तावित गोरखपुर - सिलीगुड़ी हिस्सा एक्सप्रेस-वे से दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर 600 किलोमीटर से भी कम  हो जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण बंगाल से सबसे अधिक बिहार को ही लाभ होगा।

        उत्तर प्रदेश में इस सड़क का  हिस्सा 84.4 किलोमीटर होगा, जो वहां के तीन जिले गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया से होकर गुजरेगा। वहीं, पश्चिम  बंगाल के सिर्फ दार्जिलिंग में इस एक्सप्रेस-वे का हिस्सा होगा।


◆किस राज्य में कितनी लंबी होगी यह सड़क

बिहार 416.20 किमी 

उत्तर प्रदेश 84.40 किमी

पश्चिम बंगाल 18.97 किमी

Thursday, 26 May 2022

पटना में लगी रिवर्स वेंडिंग मशीन

 पटना में स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम की ओर से बोरिंग रोड चौराहा एवं मौर्यालोक परिसर में रिवर्स वेंडिंग मशीन (आरवीएम ) लगायी गयी है। 


मंगलवार को महापौर सीता साहू ने इसका उद्घाटन किया। यहां प्लास्टिक की पानी की बोतल, बिस्किट के खाली पैकटों की रिसाइकिलिंग की जाएगी। नगर निगम एवं एचडीएफसी बैंक एवं सीईई परियोजना के तहत पहली बार यह व्यवस्था की गई है। शहर की सड़कों पर पानी की खाली बोतल फेंकी हुई नहीं मिलेगी। इसके रिसाइकिलिंग के लिए शहर में दो जगह मशीन लगाई गई है। यहां फेंकी हुई प्लास्टिक बोतल देने पर लोगों को फूड एवं ट्रैवलिंग कूपन और कैश बैक मिलेगा।

◆ मशीन डिजिटल सेंसर आधारित सिस्टम के माध्यम से बोतल के खाली एवं भरे होने का पता लगा लेती है। भरी हुई बोतल को मशीन नहीं लेगी। बोतल लेने के बाद मशीन डिस्प्ले में मोबाइल नंबर डालने एवं ग्राहकों को मैसेज भेजने का विकल्प भी सामने दिखेगा। कंटेनर के भरने के बाद मशीन हैंडलर को ट्रिगर मैसेज करता है। सौ प्रतिशत कंटेनर भरने के बाद डिस्प्ले में मशीन का पूरा संकेत दिखाई देता है।

यह मशीन एक बार में 3000 बोतल रिसाइकिल कर सकती है। रिसाइकिलिंग के बाद प्लास्टिक मैटेरियल को बेचा जाएगा। 

Saturday, 21 May 2022

विमल रॉय और उनके सहयोगी

 बिमल रॉय का जन्म 12 जुलाई 1909 ई को एक बंगाली जमींदार परिवार के यहाँ हुआ। इनका जन्म स्थल सांथा, जिला सुतरापुर था जो उस वक्त पूर्वी बंगाल में पड़ता था। वर्तमान मे बंगला देश मे है। इनको स्टील फोटोग्राफी मे बहुत दिलचस्पी थी। जब ये कोलकत्ता गए तो इनको कैमरा सहायक का कार्य न्यू थिएटर प्राइवेट लिमिटेड मे मिला। ये पी.सी बरुआ के सहायक के रूप में कार्य करने लगे।



 इनकी द्वारा खिंची गई तस्वीरों को देखकर उस समय के प्रिसिद्ध सिनेमा हस्ती 

नितिन बोष ने इनसे कहा कि " तुम क्यों नही कैमरा डिपार्टमेंट जॉइन कर लेते हो" उस वक्त इनकी तनख्वाह 15 रुपये प्रतिमाह थी। " उदय पाथेर@ इनकी पहली फ़िल्म थी जिनमे इन्होंने डायरेक्टर के रूप में काम किया।  इसके बाद ये मुम्बई चले गए। मुम्बई इनके साथ और सहयोगियों में ऋषिकेश मुखर्जी, स्किन डायरेक्टर अरविंदो घोष, असिस्टेंट डायरेक्टर असित सेन और फ़िल्म फोटोग्राफर कमल बोष थे। बाद में महान संगीतकार सलिल चौधरी भी इनके सहयोगी बने। इनके द्वारा निर्देशित फिल्म पुर फिल्मी जगत पर राज करने लगी। पब्लिक द्वारा पसंद कु जाने लगी। इनकी निर्देशन में " दो बीघा जमीन" परिणीता, बिराज बहु, सुजाता, बंदिनी और मधुमती जैसे प्रिसिद्ध फिल्में बनी। जो आज लोगों के जेहन से नही मिटी है।

Thursday, 19 May 2022

Arthritis :- गठिया के कारण

 गठिया (Arthiritis) वह मानव शरीर की वह अवस्था है जिसमें शरीर के जोड़ों में दर्द, उद्दीपन और सूजन पैदा हो जाती है। यह स्तिथि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाई जाती है। शुरू में बड़े जोडु प्रभावित होते हैं मगर बाद में वह दूसरे जोड़ों तक फैल जाता है। इसके मुख्य प्रकार है: (1) रयूमेटायड आर्थिराइटिस और 121 ऑस्टियो आर्थिराइटिस। एक तीसरे प्रकार का आर्थिराइटिस प्यूरिन मेटाबोलिज्म (Punn Metabolism) की गड़बड़ी से होता है जिसे गाउट (गठिया) कहते हैं।



यूमेटायड आर्थिराइटिस जोड़ों के कार्टिलेज और सिनोबायल झिल्ली में उद्दीपन से पैदा होता है। इस उद्दोपन से तेल जैसा द्रव, जो जोड़ों की हड्डियों को चिकना रखता और परस्पर रगड़ने से रोकता है, प्रभावित हो जाता है। यह दशा स्ट्रेप्टोकोकस की वजह से पैदा हुए प्रदूषण का नतीजा होती है। स्ट्रेप्टोकोकस से विषैला द्रव रिसने लगता है और वह तैल द्रव को सुख्खा देता है जिससे जोड़ में दर्द? हड्डियों में रगड़ और सूजन पैदा हो जाती है। इस वर्ष से कम आयु के बच्चों में भी कभी-कभी यह गठिया हो जाता है; जोड़ों में दर्द, बुखार और सूजन हो जाती है। कुछ दिन बाद से लक्षण गायब होकर फिर उभर जाते हैं। धीरे-धीरे यह बार-बार होने लगता है। और गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती है। एक पुरानी कहावत है कि “ट्यूमेटॉयड आर्थिराइटिस जोड़ों में रिसाव पैदा करता और दिल को काटता है।" बच्चों को अगर यह रोग हो गया है तो इसके इलाज में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।


ओस्टियो आर्थिराइटिस (Osteo-arthiritis) जोड़ों की हड्डियों के बीच में स्थित उपास्थि (Cartilage) के ह्रास से उत्पन्न हुई छीजन और बाद में उसमें आई विकृति से होता है। जब कार्टिलेज घिसकर खत्म हो जाती है तो जोड़ों की हड्डियां आपस में रगड़ने लगती है। आम तौर से यह जोड़ों के सिरे और मेरुदंड (Spinal Column) यानी रीढ़ में होता है। मामूली या तेज दर्द बड़े जोड़ों में शुरू होता है, लेकिन बाद में यह कहीं भी हो सकता है, प्रभावित स्थान में सूजन भी हो जाती है। जोड़ों की हरकत बाधित हो जाती है और धीरे-धीरे विकृति उत्पन्न हो सकती है। छूने से प्रभावित स्थान लाल और गरम हो जाता है।


रोगी को अपना अधिकाधिक समय गरम और सुविधाजनक स्थान में बिताना चाहिए। प्रभावित भाग को गरम रखें। अधिक प्रकोप की दशा में चलने-फिरने से बचें। शराब, सिगरेट और लाल मांस खाने से बचें। पता करें कि किन चीजों के खाने से अलर्जी बढ़ती है, सूजन पैदा होती है। उन चीजों को अपने आहार से अलग कर दें। मिर्च-मसालेदार और वसायुक्त खाने से परहेज करें। दबाव तनाव को नियंत्रित करें क्योंकि टेंशन से मांसपेशियां सख्त पड़ जाती हैं।

Sunday, 15 May 2022

SBI नया एटीएम ऑनलाइन एक्टिव करें

 यदि आप आने sbi बैंक का नया एटीएम बनवाया है तो उसे घर बैठे चालू कर सकते है। इसके लिए आपके पास नेट बैंकिंग होना आवश्यक है। 

सवर्प्रथम आप योनो मे लॉगिन हो जाये। उसके बाद service request पर क्लिक करे। 



 इसके बाद  ATM/DEBIT CARD के ऑप्शन आएगा उस पर क्लिक कीजिए। 

इसके बाद INTERNET BANKING PROFILE PASSWORD का ऑप्शन चुनें और उसपर अपना प्रोफाइल पासवर्ड एंटर करें।
 
इसके बाद  ACTIVATE CARD का ऑप्शन चुनें और उसपर क्लिक करें। 


इसके बाद इसमें कार्ड नंबर एंटर करेंगे और CVV नंबर एटीएम का वैलिडिटी डेट एंटर करेंगे। और ACTIVATE बटन पर क्लिक करें।





Thursday, 23 December 2021

फलों की रानी नारंगी-गुणकारी

 आम फलोंका राजा है तो फलों की रानी बननेके सभी गुण नारंगीमें हैं, इसी कारण नारंगीको फलों की रानी कहा जाता है।◆आयुर्वेदके ग्रन्थों में नारंगी का उल्लेख मिलता है-

'नारङ्गो मधुराम्लः स्याद्रोचनो वातनाशनः' (निघंटु, मिश्रप्र०

६। ६३)। सुश्रुतसंहितामें लिखा है-

अम्लं समधुरं हृद्यं विशदं भक्तिरोचनम्। वातघ्नं दुर्जरं प्रोक्तं नारङ्गस्य फलं गुरु।।

अर्थात् नारंगी अम्ल, मधुर, हृदयके लिये प्रिय, विशद, भोजनमें रुचिकर, वातनाशक, दुर्जर तथा गुरुपाकी (देरमें पचनेवाला) होता है।

नारंगीकी विशेषता यह है कि इसमें विद्यमान फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन-ये शरीरमें पहुँचते ही ऊर्जा देना शुरू कर देते हैं। इसका रस देर से पचता है। नारंगी में प्रचुर मात्रामें विटामिन 'सी' है। पोटैशियम एवं लोहा उच्चमानका है। नारंगी-सेवनसे हृदय, स्नायु- संस्थान तथा मस्तिष्कमें नयी शक्ति आ जाती है। बच्चे- बूढ़े, रोगी और दुबले-पतले लोग अपनी निर्बलता दूर करनेके लिये इसके सेवनसे लाभ उठा सकते हैं। तेज बुखारमें इसके सेवनसे तापमान कम हो जाता है।

इसका साइट्रिक एसिड मूत्ररोगों और किडनी रोगोंको दूर करता है। इससे मूत्र साफ आता है। किडनी-रोगसे बचनेके लिये नारंगीका सेवन करना चाहिये। छोटे बच्चोंको स्वस्थ और सुपुष्ट बनानेके लिये दूधमें चौथाई भाग मीठी नारंगीका रस मिलाकर पिलाना चाहिये। यह उनके लिये एक आदर्श टॉनिक है। इससे

बच्चोंमें नयी ऊर्जा, नयी शक्ति और नया उत्साह आ जाता है। दाँत निकलते समय बच्चोंको उलटी होती है तथा हरे-पीले दस्त होते हैं। इनमें नारंगी-रस देनेसे उनकी बेचैनी दूर होती है तथा पाचनशक्ति बढ़ जाती है। दाँतों और मसूढ़ोंके रोग भी इसके सेवनसे दूर होते हैं।

◆ शरीर से दुर्बल, गर्भवती महिलाओं, कब्ज, बवासीर, बेरी-बेरी, अपच, पेटमें गैस, जोड़ोंका दर्द, गठिया, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग, यकृत्-रोगसे ग्रस्त रोगियोंके लिये नारंगीका रस परम लाभकारी है। जिन्हें दूध नहीं पचता हैं या जो केवल दूध पर निर्भर हैं, उन्हें नारंगी का रस में अवश्य सेवन करना चाहिये। दूधमें विटामिन 'बी* कम्पलेक्स' नहीं के बराबर है। अतः इसकी पूर्ति नारंगी के सेवन से हो जाती है।

◆मुँहासे, कील और झाँई तथा चेहरेके साँवलेपनको - दूर करनेके लिये नारंगीके सुखाये छिलकोंका महीनचूर्ण गुलाब-जल या कच्चे दूधमें मिलाकर पीसकर आधा घंटातक लेप लगाये, इससे कुछ दिनोंमें चेहरा साफ, सुन्दर और कान्तिमान् हो जायगा। नारंगी सर्वरोगनाशक और शरीरके लिये परम को हितकारी फल है। खट्टी नारंगीका सेवन बच्चों-बूढ़ों, से गर्भवती महिलाओं, अम्लपित्त एवं पेटमें अल्सरवालों के लिये निषिद्ध है।

-सौजन्य आरोग्य अंक

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