Saturday, 30 December 2023

वर्किंग लोको के साथ डेड लोको को जोड़ने का तरीका

 वर्किंग लोको के साथ डेड लोको को जोड़ने का तरीका


1. लोकों को जोड़ने से पहले सुनिश्चित करें कि डेढ लोकों में हैंड ब्रेक लगा है यदि नहीं तो लगा दें।


2. हेड लोको के सर्किट ब्रेकर पैनल में लगे सभी सर्किट ब्रेकर आफ एवं मेन रिर्जवायर का प्रेशर शून्य होना सुनिश्चित करें।


3. दोनों लोको को आपस में जोड़ दें तथा बीपी एवं एफ.पी एअर होज पाइप जोड दे पस्तु एगिल कॉक अभी मत खोले।


4. डेड लोको के नोज कम्पार्टमेंट में लगा डेड-मेन कॉक खोल दें। तथा दोनों कंट्रोल स्टैंड पर रिर्वसर न्यूटल में थाटल आईडल ए.9 हैंडिल फुलसर्विस, एस.ए.9 रिलीज तथा एल एण्ड टी स्विच ट्रेल अवस्था में रखें। 

5. अब वर्किंग लोको के वर्किंग कंट्रोल स्टैंड का एल एण्ड टी स्विच टेस्ट-अवस्था में रखने के बाद B.P एवं F.P का एंगिल काल खोल दें तथा 5 सेकेंड बाद पुनः लीड एण्ड ट्रेल स्विच लीड अवस्था में कर दें।


६. वर्णिग लोकों में वी.पी एवं वी.सी प्रेशर पूरा होने पर वर्किंग इंजन से ए-9 एवं एसए-9 हैंडिल से ब्रेक लगाकर दोनों लोको में ब्रेक लगना व रिलीज होना सुनिश्चित करे।


7 अप लोकों को नियमानुसार लोड पर लगाकर संचालन शुरू करें ।

नोट: यदि वर्किंग लोको जी.एम लोको हो और अटैच लोको साधारण लोको स्टार्ट अथवा के रूप में जोड़ना हो तो पूर्व नियमानुसार जोड़ें।


2. यदि वर्किंग लीको साधारण और अटैच लोको जी.एम लोको स्टार्ट एवं डेड के रूप में जोड़ना हो तो उपरोक्त नियम के द्वारा जोड़ा जायेगा ।

Tuesday, 26 December 2023

WDG4 HHP LOCO क्षमता

 WDG4 HHP LOCO क्षमता

1. एच.एस.डी आयल-6000 लीटर

2. मेन इंजन आयल (ल्यून आयल) आर.आर--520 एम.जी-1457 ली. (650 ली. डिपिस्टिक पर).                    3. कम्प्रेशर आयल- (SP) 100-9.98 लीटर

4. गर्वनर आयल-आर आर 520 एमजी-2.8 लीटर

5. गियर केस आयल- मोबिल SHC-634

6. व्हील फ्लॅज लुब्रीकेटर- सर्वो डब्लू एफ एल ग्रोस

7. कूलेंट कम्पाउंड- नालको-2100 पिंक कलर बोरेट नाइट्रेट

8. पानी वाटर टैंक में 371 लीटर

9. वाटर कूलिंग सिस्टम में पानी 1045 लीटर कुल 1416 लीटर

लोकोमोटिव के भाग-

संरचना के आधार पर इस लोकोमोटिव को मुख्यतः 11 भागों में बाँटा गया है।

1. नोज कम्पार्टमेंट-1. नोज कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण-

1.पी एण्ड जी (पैसेंजर एवं गुडस सर्विस हैंडिल)

2. डेड मेनकॉक

3. रेगुलेटर बाल्य

4. कम्प्यूटर कंट्रोल ब्रेक यूनिट

5. वॉल्टेज कन्डीशनिंग यूनिट

6. कम्प्यूटर रिले यूनिट

7. न्यूमेटिक कंट्रोल यूनिट

8. सी-3 डब्यू आर डिस्ट्रीब्यूटर बाल्व

2. लोको पायलट केबिन-  लोको पायलट केबिन में लगे उपकरण-

इसमें दो कंट्रोल स्टैंड होते हैं एवं लेफ्ट हैंड ड्राईविंग है शार्ट हुढ दिशा में बाएं तरफ के कंट्रोल स्टैंड को लेपट कंट्रोल स्टैंड तथा लांग हुड के तरफ के कंट्रोल स्टैंड को राइट कंट्रोल स्टैंड कहते हैं।

3. इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कम्पार्टमेंट- इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कैबिनेट में लगे उपकरण-

इस पर मुख्यतः चार पैनल है।

1. सर्किट ब्रेकर पैनलं, 2 इंजन कंट्रोल पैनल, 3. ईएम. 2000 डिस्प्ले पैनल,

4. इ.सी.सी1 (इलेक्ट्रिकल कंट्रोल कम्पार्टमेंट)

1. सर्किट ब्रेकर पैनल में लगे उपकरण इसमें तीन प्रकार के सर्किट ब्रेकर लगे हैं।

(ए) सफेद लेबिल में लगे ब्रेकर

1. लाइट-30 एम्पियर

2. हेडलाइट-35"

3. राडार

4. इवेन्ट रिकार्डर-3 ए

5. कैब फैन 30 ए

6. एअर ड्रायर-15 ए

7. गर्वनर बूस्टर पम्प 30ए (केवल WDP4 में)

4.ट्रैक्सन कंट्रोल कम्पार्टमेट-  ट्रैक्सन कंट्रोल कम्पार्टमेंट (कैबिनेट) में लगे उपकरण-


1. ट्रैक्सन कंट्रोल कम्प्यूटर-1 एवं 2


2. ट्रैक्सन कंट्रोल कम्प्यूटर-1 एवं 2 ब्लोअर


3. ग्रिडस-8 एवं ग्रिडस ब्लोअर मोटर-2


5. सेन्ट्रलाइज्ड एअर फिल्टर कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण-


1. डस्ट बिन ब्लोअर मोटर


2. टी.सी.सी इलेक्ट्रानिक्स ब्लोअर


3. बैगी टाइप फिल्टर


4.. ट्रैक्सन मोटर ब्लोअर


5. साइक्लोनिक फिल्टर


6. जनरेटर कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण


1. ट्रैक्सन अल्टरनेटर                                                   2. कम्पेनियन अल्टरनेटर

3. आक्जिलरी जनरेटर (इं. दाए तरफ)

4. टर्बो सुपरचार्जर

5. आफ्टर कूलर-2

6. स्टार्टिंग मोटर-2 (इ. दाए तरप्फ)

7 . इंडक्टर ट्यूब

7. इंजन कम्पार्टमेंट में लगे उपकरण

1. समस्त एसेसरीज के साथ डीजल इंजन

2. बैटी नाइफ स्विच एवं ४००एम्पियर यूज (इं. दाए तरफ) सोक बैंक पम्प) (इं. दाए तरफ)

3 . टर्बो ल्यूब पम्प मोटर ( 24. इंजन के दोनों तरफ ल्यूब आयल डिपस्टिक

5.सेन्ट्रलाइज एअर फिल्टर कम्पार्टमेंट

6.जनरेटर कम्पार्टमेंट

7.इंजन कम्पार्टमेंट

8.एसेसरीज कम्पार्टमेट

9.कम्प्रेशर कम्पार्टमेंट

10.रेडियेटर कम्पार्टमेंट

11.अन्डर फेम

Monday, 25 December 2023

ई एम डी डीज़ल लोको का डाटा

 1.लोकोमोटिव माडल-GT46 MAC (WDG4) GT46PAC (WDP4)

2.लोकोमोटिव हार्स पावर-4000 सी.सी (3939 एच.पी.)

3.गति-WDG4- 120kmph WDP4-160kmph

4.ट्रेक्टिवएफर्ट अधिकतम सीमा लगातार चलने की सीमा-540 किलो न्यूटन 400 किलो न्यूटन

5.डायनामिक ब्रेकिंग एर्फट अधिकतम-270 कि.न्यूटन (WDG4) (40kmph से कम) 160 कि.न्यूटन (WDP4) (60kmph से 1.04 kmph तक)

6.गियर रेशियो- WDG4 17:90 पिनियन वुलगियर, WDP4 17:77

7.चक्के का व्यास-43" 

8.इंजन माडल एवं प्रकार फायरिंग आर्डर-710 G3B-16 Cylinder 2 stroke Tturbo supercharger, 1,8,9,16,3,6,11,14,4,5,12,13,2,7,10,15

9.व्यवस्थित सिलिंडर-45 डिग्री V आकृति में

10.सिलिंडर बोर-230.19 एमएम

11.रोटेशन, फेसिंग फलाई व्हील सिरा-काउंटर क्लाक वाईज

12.मेन कैंक शाफ्ट की अधिकतम गति -904 आर.पी.एम.

मेन कैंक शाफ्ट की सामान्य आइडल गति -269

मेन कैंक शाफ्ट की न्यूनतम गति-200

13.एयर ब्रेक-सिस्टम -प्रकार-इलेक्ट्रोन्यूमैटिक माडल-WLNA-9BB डायरेक्ट 

14.एयर-कम्प्रेशर-माडल-WLNA-9BB डायरेक्ट ड्राइव

टूस्टेज-3 सिलिंडर (वाटर कूल्ड)

15.कम्प्रेशर आयल सम्प क्षमता-9.98 लीटर

16.मेन जेनरेटर असेम्बली माडल

ई एम डी डीजल लोकोमोटिव

 ई.एम.डी लोकोमोटिव का सामान्य परिचय


डी.एल.डब्ल्यू वाराणसी द्वारा निर्मित WDG4 मालवहन तथा WDP4 यात्री परिवहन के लिए उपयुक्त है। इस डीजल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में 16 सिलिंडर टर्बो सुपरचार्ज्ड, 2 स्ट्रोक डीजल इंजन लगा है। जो याँत्रिक शक्ति के द्वारा मेन ट्रैक्शन आल्टरनेटर को घुमाता है जिसमें मेन ट्रैक्शन आल्टरनेटर ए.सी करेंट बनाता है। जिसे इसके ही अन्दर लगे रैक्टीफायर के जरिये इस करेंट को डी सी ने बदल कर डी सी लिंक के द्वारा होकर इसे TCC1 एवं TCC2 के साथ लगे इन्वर्टर में भेजते हैं। जहाँ से इसे Three phase AC में बदल कर Computer की मांग के अनुसार थाटल के द्वारा Traction Motor में भेजकर Axle तथा चक्कों को घुमाकर लोको को चलाते हैं। इस लोकोमोटिव को नियंत्रित करने के लिए माइकोप्रोसेसर आधारित कम्प्यूटर कंट्रोल सिस्टम लगा है। जिसे EM2000 कम्प्यूटर कहते हैं। इसके साथ ही साथ इंजन से सवाद के लिए डायोग्नोसिटक डिस्प्ले यूनिट कहते हैं। EM2000.computer प्रणाली को इस प्रकार अभिकृमित किया गया है जो विभिन्न सिस्टम एवं ट्रैक्शन पावर का अभिलेखन तथा होने वाले दोषों को लिखित या संकेत द्वारा अवगतं कराता है।


Sunday, 26 February 2023

आँखों के नीचे काला धब्बा

 आंखों के नीचे काले धब्बे होना आम समस्या है कम सोने, अधिक थकान होने, कमजोरी अथवा किसी बीमारी के कारण होते है । प्राय: नींद न आने की बीमारी के कारण होते हैं और उनकी आंखों पर काले धब्बे पड़ जाते है । नींद लेना स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है । यदि आपको नींद नही आती, आप को थकावट रहती है तो रोज सुबह घर में ही एक्ससाइज करनी चाहिये ।


 आंखों की चारों तरफ की त्वचा बड़ी नाजुक होती है । इसलिये सौन्दर्य प्रसाधन लगाते समय बड़ी सावधानी बरतनी चाहिये । सोने से पहले त्वचा को नमी देने वाली क्रीम या लोशन इस्तेमाल करनी चाहिये । रूई के फोहे को आंखों के इर्द-गिर्द लगाएं । आंखों के लिये बादाम क्रीम सबसे उपयुक्त होती है । इससे रंग भी साफ होता है और साथ ही त्वचा का पोषण होता है। कोई भी सौन्दर्य-प्रसाधन  तत्व आंखों वाले क्षेत्र पर ज्यादा देर नहीं लगाना चाहिये । चेहरे पर लगाया जाने वाला लेप आंखों के आसपास नहीं लगाना चाहिये । आंखों पर खीरे का रस, आलू का रस तथा गुलाबजल को रूई के फोहे में भिगोकर आंखों पर रखना चाहिये ।

Sunday, 27 November 2022

भारतमाला फेज़-2

 भारतमाला फेज-2 के तहत बनने वाले गोरखपुर- सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण का काम बिहार में जल्द शुरू होगा। इसको लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही, बिहार सरकार के निर्देश पर संबंधित जिलों में भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार का गठन भी कर लिया गया है। पथ निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कहा कि जल्द इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण की स्वीकृति भारत सरकार से मिलने की उम्मीद है।

इस एक्सप्रेस-वे का अधिकांश हिस्सा बिहार में ही पड़ेगा, जो करीब 416 किलोमीटर का होगा यह पूरी नई सड़क होगी । इसमें सबसे अधिक 94 किलोमीटर सड़क मधुबनी जिले में होगी। फोरलेन के इस एक्सप्रेस-वे के लिए बिहार सरकार केंद्र के प्रस्ताव पर पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है। बिहार के आठ जिले पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर सीतामढ़ी, से अधिक 94 मधुबनी जिले में एक्सप्रेस-वे के प्रस्ताव पर  दे चुकी है। पश्चिम चंपारण, मधुबनी, सुपौल, अररिया और  प्. किशनगंज जिले से यह सड़क गुजरेगी। एक्सप्रेस- अभी गोरखपुर से सिलीगुड़ी के बीच कोई सीधी सड़क नहीं है । इस कारण  गोरखपुर से सिलीगुड़ी की दूरी तय करने  में एक दिन तक का समय लग रहा है । जबकि, प्रस्तावित गोरखपुर - सिलीगुड़ी हिस्सा एक्सप्रेस-वे से दोनों शहरों के बीच की दूरी घटकर 600 किलोमीटर से भी कम  हो जाएगी। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण बंगाल से सबसे अधिक बिहार को ही लाभ होगा।

        उत्तर प्रदेश में इस सड़क का  हिस्सा 84.4 किलोमीटर होगा, जो वहां के तीन जिले गोरखपुर, कुशीनगर और देवरिया से होकर गुजरेगा। वहीं, पश्चिम  बंगाल के सिर्फ दार्जिलिंग में इस एक्सप्रेस-वे का हिस्सा होगा।


◆किस राज्य में कितनी लंबी होगी यह सड़क

बिहार 416.20 किमी 

उत्तर प्रदेश 84.40 किमी

पश्चिम बंगाल 18.97 किमी

WDG4 DIESEL LOCO POWER DISTRIBUTION

 इंजन स्टार्ट होते ही मेन बैंक सापट के गियर से चाल लेकर Auxiliary जनरेटर का आमेचर घूमना शुरू कर देता है जो स्वंय के बनाये गये करन्ट से इसकी ...