Sunday, 26 May 2019

पेंटोग्राफ उठाने की कार्यविधि

पेंटोग्राफ

इलेक्ट्रिक लोको की छत पर दो पेंटो क्रमशः PT1 और  PT2 लगी रहती है। पेंटो OHE से सिंगल फेज करंट को कलेक्ट करके सर्किट ब्रेकर (DJ) तक पहुँचाती है। इसलिए इसे करेंट कलेक्टर कहते है। दोनों पेंटो आपस मे रूफ बार की सहायता से सीरीज में जुड़े रहते है। प्रत्येक पेंटो असेंबली लोको की छत पर चार बेस इंसुलेटर पर माउंट रहती हैं। 
ZPT(पेंटोग्राफ की चाभी)
पेंटो ग्राफ का नियंत्रण ZPT स्विच के द्वारा होता है। ZPT दोनो कैब में ड्राइवर डेस्क पर लगी रहती है। ZPT के मुख्यतः तीन पोजीशन होते है।  
1, 0 एवं 2 । ZPT स्विच को ऑपरेट करने के लिए ZPT Key का प्रयोग किया जाता है। किसी भी कैब से ZPT Key को नंबर 1 पर रखने पर पिछला पेंटो उठता है। ZPT Key को नंबर 2 पर रखने पर अगला पेंटोग्राफ उठेगा। 
पेंटोग्राफ उठाने की कार्यविधि
पेंटोग्राफ उठाने के लिए VEPT इलेक्ट्रो न्यूमेंटिक वाल्व का energise होना और RS/BV टैंक में पर्याप्त हवा का प्रेशर (6.5kg /cm२) होना आवश्यक है। 

VEPT जो इलेक्ट्रो न्यूमैटिक वाल्व है के वायर में इलेक्ट्रिक कनेक्शन ZPT के द्वारा दिया जाता है। इसके साथ ही VEPT वाल्व में न्यूमैटिक प्रेशर बेबी कंप्रेशर(MCPA) के द्वारा दिया जाता है। ये दोनों  
कार्य होने पर ही VEPT वाल्व पूर्णरूपेण कार्य करेगा।
जब  ZPT Key को '0' पर रखा जाता है तो VEPT वाल्व De-energise हो जाता है। लेकिन ZPT key को  '1' पर या '2' पर रखा जाता है तो  VEPT वाल्व energise हो जाता है। 

VEPT वाल्व में इलेक्ट्रिक कनेक्शन देने से पूर्व निम्नलिखित शर्तो की जांच करेंगे।
1. 90-110 Volt
2.फ्यूज CCPT सही होना चाहिए। (लूज़ नही होना)
3. BPEMS या HLS ऑन होना चाहिए।

अब बेबी कंप्रेशर (MCPA) चलाएंगे, इसके लिए निम्न कार्यविधि अपनायेगे।
(1.) बैटरी स्विच (HBA) को 1. नंबर पर करके ZUBA द्वारा बैटरी वोल्टेज देखेगे। जो 90-110 Volt होना चाहिए।
(2.) ZCPA-1 पर करके MCPA(बेबी कंप्रेशर) चलाएंगे- और RS/PR(रिजर्वायर टैंक) का प्रेशर 8-10 Kg/cm२ बनायेगे।
(3.) BL- अनलॉक करके LSDJ, LSCHBA, LSGR, LSB का जलना देखेंगे।
(4.) अब LSDJ जलना देखकर , ZPT(पेंटोग्राफ की चाभी) को 1 या 2 पर करके पेंटोग्राफ उठायेगे। 6-10 सेकंड में 3 चरणों मे पेंटोग्राफ उठना चाहिए।

नोट:- ZPT(पेंटोग्राफ की चाभी) 0 पर करने पर 10 सेकंड में 3  चरणों मे पेंटो गिरना चाहिए। 3 सेकंड में कांटेक्ट वायर छोड़ना चाहिए।

Tuesday, 23 April 2019

ऑनलाइन रेलवे स्मार्ट मेडिकल कार्ड की रेजिस्ट्रेशन प्रक्रिया

स्मार्ट रेलवे मेडिकल कार्ड के लिए साउथ सेंट्रल रेलवे ने एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है जिसके द्वारा सभी कार्यरत कर्मचारियों , पेंसनधारक और उनके योग्य आश्रितों का एक अलग मेडिकल कार्ड ऑनलाइन निर्गत किया जा सकता है। इस मेडिकल कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन कर्मचारियों, पेंशनधारकों द्वारा किया जाना है। आवश्यक जांच और प्रशासन के द्वारा एप्रूव्ड होने के बाद स्मार्ट मेडिकल कार्ड ऑनलाइन निर्गत किया जायेगा। इस स्मार्ट मेडिकल कार्ड का उपयोग अस्पतालों में किया जा सकता है।
रेलवे करीब 70 लाख स्मार्ट कार्ड जारी करेगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक कर्मचारियों को यह कार्ड एक यूनिक नंबर के साथ देंगे। अभी रेलवे कर्मचारियों का मेडिकल कार्ड राशनकार्ड की तरह बना हुआ है। इसमें पहले पेज पर पेंशनर का नाम व उसकी फोटो लगी होती है। दूसरे पेज में आश्रितों का विवरण लिखा होता है। जरूरत पड़ने पर जिस कर्मचारी के नाम से कार्ड बना है उसे मौजूद रहना पड़ता है। डायरी व कार्ड का स्थान लेगा उम्मीद स्मार्ट कार्ड : डायरी व कार्ड के रुप में रेलवे कर्मचारियों को रेलवे अस्पतालों में इलाज मिलता है। कर्मचारी को रेलवे द्वारा एक और डायरी जारी की जाती है, जिसमें कर्मचारी व परिवार के सदस्यों की फोटो लगी होती है। रेलवे से अनुमोदित निजी अस्पताल में भी इलाज के लिए लाल कार्ड को साथ ले जाना पड़ता है। अब स्मार्ट योजना को यूएमआईडी(उम्मीद) नाम देकर शुरु किया जा रहा है। जो वेब व मोबाइल आधारित स्वास्थ्य सेवा योजना होगी। इसमें कर्मचारी को एक यूनिक नंबर वाला स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा। जिसे दिखाकर रेलवे का कोई भी कर्मचारी और उसका परिवार देशभर में रेलवे के अस्पतालों इलाज करवा सकेंगे।
इसके लिए ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन निम्नलिखित चरणों मे किया जा सकता है।
प्रथम चरण:- सबसे पहले डेस्कटॉप या लैपटॉप से किसी भी ब्राउज़र में गूगल सर्च इंजन को ओपन करेंगे।
(क) गूगल सर्च बॉक्स में https://umid.digitalir.in लिख कर सर्च करेगें।
(ख) इसके बाद Umid। Indian Railways का वेबसाइट दिखेगी। जिसे क्लिक करने पर इसका वेबसाइट खुल जाएगी। जो निम्न तरह से होगी।
 
(ग) इसमे Registerd Here पर क्लिक करेगें। 
उसके बाद निम्न ऑप्शन आएगा।
(घ) यदि आप कार्यरत कर्मचारी है तो employee ऑप्शन पर क्लिक करें नही तो पेन्शनर है तो pensioner पर क्लिक करें। इसके बाद निम्न मेनू खुल जाती है।

(ङ) इसमे तीन महत्वपूर्ण जानकारी देनी होती हैं। 
१. P. F नंबर २.पैन नंबर ३. जन्म तिथि
ये जानकारी देने के बाद VALIDATE DETAIL पर क्लिक कीजिए। इसके बाद निम्नलिखित ऑप्शन आएगी।

(च) इसमें मोबाइल नंबर देनी पड़ती है। OTP आएगी जिसे VALIDATE करना पड़ेगा। और अपना एक पासवर्ड स्वयं बनाना पड़ेगा। पासवर्ड 6 डिजिट से कम अंक का नही होना चाहिए।
नोट:- ये सभी प्रक्रिया डेक्सटॉप या लैपटॉप में ही हो सकता है।
नोट:- एक बार रेजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद निम्न यूआरएल https://umid.digitalir.in/web/ 
पर किसी सर्च इंजन में टाइप करके लॉगिन कर ले। 

इसके बाद initiate application पर क्लिक करके पूरे फॉर्म को भरे। 
इसके बाद सबमिट बटन पर क्लिक करके फॉर्म भरने का प्रोसेस पूर्ण करें।
सबमिट बटन पर क्लिक करने से पहले पूरा विवरण एक बार पुनः जांच कर ले। जांचने के लिए पीडीएफ के रुप मे पूरे फॉर्म को डाऊनलोड कर सकते है। 
फॉर्म में फ़ोटो, पहचान पत्र, हस्ताक्षर(स्वयं), पुराना मेडिकल कार्ड का jpeg फॉर्मेट के रूप में अपलोड करना होगा।

Friday, 22 March 2019

पत्तागोभी में कीड़ा

पत्तागोभी में यह किस प्रकार का कीड़ा है? काफी बारीकी से अन्वेषण करने पर दिखता है।

Tuesday, 26 February 2019

कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास की स्मार्टफोन में भूमिका

गोरिल्ला ग्लास एक मज़बूत और विशिष्ट ग्लास का एक प्रकार है। जब भी कोई कठोर वस्तु इस ग्लास से टकराता है या रगड़ करता है तो उस बिशिष्ट ग्लास में ज़ल्द खरोंच तक नही आती और ज़ल्द टूटती भी नही है। गोरिल्ला ग्लास से लैस स्मार्टफोन की स्क्रीन अन्य सामान्य स्क्रीन की तुलना में ज़्यादा मज़बूत और कठोर होतीं है।

इस तरह की मज़बूत और ठोस स्क्रीन के बनने की इतिहास भी उतनी ही रोचक और रोमांचक है। इस ग्लास के बनाने में साइंस्टीफ़िक प्रयोग के दरम्यान सन 1952 ई. में कॉरिना कंपनी के लैब में बना था। उस वक्त एक वैज्ञानिक ने फोटोसेन्सिटिव ग्लॉस को फर्नेस में टेस्ट के लिए रखा था। किसी वक्त उस फरनेस की तापमान 900℃ तक पहुँच गयी थी। अनुमान के विपरीत जब उस फरनेस को खोला गया तो उसमें से तरल ग्लॉस के बदले ग्लास की एक शीट निकल कर आयी। संयोग वश वह ग्लास की शीट नीचे गिर पड़ा लेकिन वह टूटने के जगह बाउन्स कर गयी। तब वैज्ञानिकों को आभास हुआ कि एक नई चीज का आविष्कार हुआ है।

सामान्यतः ग्लास में पोटैशियम साल्ट को 400℃ के तापमान में मेल्ट अथार्त पिघला कर इसमें सोडियम अणु को बड़े पोटैसियम आयन में बदल कर इसे बहुत कठोर बनाया जाता हैं। उत्तरोत्तर वक्त बीतने के साथ कोरिंना कंपनी ने गोरिल्ला ग्लास को और बेहतर तरीके से बनाया है।

कोरिंना कंपनी ने इस विशिष्ट गोरिल्ला ग्लास को मार्केट में 01 फ़रवरी,2008 को लॉन्च किया। इसके बाद कंपनी ने इस ग्लास में उत्तरोत्तर विकसित करते गया।

किसी भी पदार्थ की कठोरता मापने का एक स्केल होता है उसे मोह (Moha) स्केल कहाँ जाता हैं। इसी पर आधारित कोरिंना कंपनी ने अनेक प्रकार के गोरिल्ला ग्लास विकसित किया। जो निम्नलिखित है। गोरिल्ला ग्लास की हार्डनेस मोह स्केल पर 6.5 होती है। जबकि हीरा सबसे कठोर है उसका हार्डनेस मोह स्केल 10 होता है।

अभी तक कोरिंना कंपनी ने छः वर्ज़न बाजार में लॉन्च किया है

कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न एक - पब्लिक के ऊपयोग के लिए पहला वर्ज़न 01 फरवरी,2008 को मार्केट में उतारा गया। इसे न केवल स्मार्टफोन बल्कि पर्सनल कंप्यूटर, नोटबुक,स्मार्टवॉच इत्यादि में उपयोग में लाया जाने लगा।

कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न दो -इस वर्ज़न का ग्लास 20 प्रतिसत पतला है। ग्लास पतला होने के कारण टच रिस्पांस उतनी ही बेहतर तरीके से काम करते हैं। जिसके चलते मार्केट में इसकी माँग उतनी ही ज्यादा हो गई।

कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न तीन : इस वर्ज़न में एक नया टेक्नोलॉजी नेटिव डैमेज रेसिस्टेंस एन डी आर का इस्तेमाल किया गया था। यह पहले के मुकाबले तीन गुणा अधिक पतला मज़बूत था।

कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न चार : इसमे स्क्रैच रेसिस्टेंट टेक्नोलॉजी को शामिल की गई। यह वर्ज़न तीन से ज़्यादा पतला और चार गुणा अधिक मजबूत और डैमेज रेसिस्टेंस बनाया गया है। यदि इसे एक मीटर की ऊंचाई से सौ बार ज़मीन पर गिराया जाएं तो 80 बार कुछ नही होगा। मोबाइल की खूबसूरती भी बढ़ जाती है।

कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न पाँच: यह लेटेस्ट गोरिल्ला ग्लास चार वर्ज़न का उत्तरजीवी कहा जाता है। यह वर्ज़न पिछले वर्ष सन 2018 में मार्केट में लॉन्च किया गया था। इसे सर्वप्रथम सैमसंग गैलेक्सी के नोट 7 में इस्तेमाल किया गया था। इसे अत्यधिक ड्यूरेबल, टफर और पतला बनाया गया था। जिसमें स्मार्ट फोन की खूबसूरती बढ़ती गयी।

कोर्निंग गोरिल्ला ग्लास वर्ज़न छः: इसको कॉर्निंग कम्पनी के इंजीनियर ने खासतौर पर इंजीनीयरिंग किया गया। इसे ठोस और ड्यूरेबल बनाने के लिए नए रिगर टेस्ट माइथोलोजी से लैब में टेस्ट किया गया। इसे लगातार क्रमशः छः पंद्रह बार रफ सतह पर एक मीटर की ऊँचाई से गिराने पर भी कुछ नहीं हुआ। यह कोरिंना ग्लास पाँच की वनिस्पत दो गुणा बेहतर है। इसमे चाकू , सिक्के, हार्ड पत्थर से मारा गया तो उसे भी सह लिया।



Tuesday, 19 February 2019

डीजीलॉकर:- दस्तावेज़ों को रखे सुरक्षित

भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कैंपेन के तहत डीजीलॉकर एक महत्वपूर्ण व्यवस्था है। जिसमे आप अपने सरकारी प्रमाणपत्र को अपलोड स्वयं कर सकते हैं। जो आजीवन सुरक्षित रहेगा। यदि आपका डॉक्मेन्ट खो भी गया तो कोई फिक्र नहीं है। इसे अपलोड कर के इंटरव्यू में , सरकारी जॉब में उपयोग में ला सकते है। जिसको मानना नियोक्ता के आवश्यक है।
यह काम कैसे करता है।
सबसे पहले एंड्राइड मोबाइल से प्ले स्टोर में digilocker एप्पलीकेशन को इंस्टाल करना है। इंस्टॉल होने के बाद इसे ओपन करना होगा।



 ◆ इस एप्प को स्थापित करने के बाद ओपन करने से एक नया इनटरफेस खुलेेगा। जो इस तरह का होगा।
 ◆ इसमें नया रेजिस्ट्रेशन करने के लिए sign up ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। इसके बाद एक और इनटरफेस खुलेगा। 
◆ इसमें एक या तो उपयुक्त ईमेल एड्रेस जो चालू हालत में हो या अपना एक मोबाइल नंबर देना होगा। जैसा कि ऊपर चित्रों में दर्शाया गया है कि यूजर नेम के शर्ते पढ़ ले। यदि आप मोबाइल नंबर डालते है। तो उसके बाद पासवर्ड दो बार सबमिट करना होगा।
पासवर्ड 8-30 कैरेक्टर के बीच होना चाहिए।
◆ पासवर्ड टाईप करने से पहले ऊपर के शर्त को भली भाँति पढ़ ले। इसके बाद signup पर क्लिक करने पर आपके ईमेल आईडी या मोबाइल नंबर जो भी आपने यूज़रनेम में डाला है उसपर एक ONE टाइम OTP आएगी। जो इस प्रकार की होगी।
यह OTP 10 मिनट के लिए ही वैध रहेगी।
इसे एंटर करने पर आपका एकाउंट DIGILOCKER में क्रिएट हो जाएगी।
थैंक्स नेक्स्टज्ञान के अगले अंक में बताएंगे कि इसे कैसे उपयोग में लाते है।

Monday, 14 January 2019

भारत के सरकारी हॉस्पिटल में ऑनलाइन ओपॉइंटमेंट शुरू

आज भारत मे हॉस्पिटल के सामने कतारों में लगे रहते है। अपना बहुमूल्य समय नष्ट कर जाते है। इसी के मद्देनज़र हॉस्पिटल मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम को निर्देशित किया जा रहा है। डिजिटल इंडिया कैंपेन के तहत NIC नेशनल इंफॉर्मेशन सेन्टर ने ऑनलाइन रेजिस्ट्रेशन सिस्टम विकसित किया है जिसमें गवर्मेन्ट हॉस्पिटल के विभिन्न विभागों के ऑनलाइन ओपीडी बुकिंग रोगियों के पसंद के अनुसार किया जाता हैं। इस एकीकृत ऑनलाइन आवेदन को आसानी से वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है। जिसे नेशनल डाटा सेन्टर, नई दिल्ली के मेघराज क्लाउड फैसिलिटी के द्वारा यह सेवा प्रदान किया गया है।
ORS सिस्टम को इस प्रकार ढाचागत व्यवस्थित किया गया है की पूरे देश मे सरकारी अस्पतालो के ओपीडी विभाग को ऑनलाइन सिस्टम में फ्रेमिंग करके आधार से ,यदि आधार नही है रोगियो व उनके परिजनों के मोबाइल से पंजीकृत sms के द्वारा निर्धारित किया जाता हैं।
प्रथम बार रोगी के आधार नंबर को पंजीकृत करने के लिए एक ओटीपी uiadi के द्वारा भेज कर औथिंकेट UIADI के द्वारा किया जाता है। यदि रोगी का आधार नंबर मोबाइल नम्बर से लिंक है तो नए रोगी को एक UNIQUE हेल्थ आइडेंटिफिकेशन नंबर (UHID) और E-OPD कार्ड ISSUE किया जाता है। यदि आधार नंबर पहले से ही UHID से लिंक है तब अपॉइंटमेंट नंबर पेशेंट को दे दिया जाता है। UHID नंबर हमेशा के वही रहता है।
चिकित्सीय अपॉइंटमेंट लेने के लिए नीचे दिए गए निर्देश अनुसार कार्य करें 1. मोबाइल नंबर का उपयोग कर अपने आप को सत्यापित करें 2. अस्पताल व विभाग का चयन 3. अपॉइंटमेंट हेतु तिथि का चयन 5. आधार नंबर का प्रयोग कर अपनी पहचान सुनिश्चित करें 5. अपॉइंटमेंट स्वीकृति एस. एम.एस. द्वारा प्राप्त करे। ◆◆◆●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●●● ऑनलाइन पंजीकरण प्रणाली (ओ.आ.रएस) सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगी विभाग (OPD) अपॉइंटमेंट लेने के लिए एक ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल है जो डॉक्टर से मिलने के लिए समय की सेवा उपलब्ध कराती है व अन्य सुविधाएँ जेसे रक्त की उपलब्धता तथा पेमेंट गेटवे के माध्यम से भुक्तान करना आदि प्रदान कराती है| इसके द्वारा देश के विभिन्न अस्पतालों को जोड़ने के लिए एक प्रयास है| 1.. क्या डॉक्टर से परामर्श लेने के लिए अपॉइंटमेंट लेना ज़रूरी है ? उ. हाँ ◆◆◆◆◆●●●○◆◆◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◆ 2.अपॉइंटमेंट लेने के विभिन्न तरीके क्या हैं ? उ. रोगी अथवा उसका परिचारक या तो वेबसाइट https://ors.gov.in पर आकर OPD अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकता है अथवा अस्पताल में अपॉइंटमेंट व पंजीकरण काउंटर पर आकर अपॉइंटमेंट प्राप्त कर सकता है| ◆◆◆◆◆◆◆◆◇◇◆◆●●●●●●●●○●●●●●○●● https://ors.gov.in का प्रयोग कर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लेने के क्या लाभ हैं ? उ. OPD अपॉइंटमेंट/ पंजीकरण लेने के लिए रोगी को लम्बी क़तारों में नहीं लगना पड़ता| ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆ अपॉइंटमेंट प्राप्त करने के लिए पूर्व औपचारिकताएँ/आवश्यकताएं क्या हैं? उ. नए रोगी के पास आधार नंबर व आधार के साथ पंजीकृत मोबाइल नंबर होना आवश्यकता है। सिस्टम यूआईडीएआई से eKYC डेटा का उपयोग कर रोगी की व्यक्तिगत जानकारी उपलब्ध कराता है। रोगी का मोबाइल नं. UIDAI के साथ पंजीकृत न होने की स्थिति में रोगी का नाम ( जैसे की ‘आधार’ में दिया गया है) उपलब्ध कराना होगा तथा UIDAI के साथ जनसांख्यिकी सम्बन्धी सत्यापन करने के बाद रोगी का मोबाइल नं. तथा अन्य विवरण जैसे पता, आयु आदि माँगा जाएगा| यदि रोगी के पास आधार न. नहीं है तब रोगी को अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम व पता आदि उपलब्ध कराना होगा ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆ इन्टरनेट (https://ors.gov.in) अथवा अस्पताल काउंटर से अपॉइंटमेंट लेने वाले रोगियों के लिया क्या कोई कोटा ( आरक्षित संख्या ) निर्धारित किया गया है? उ. सम्बंधित अस्पतालों द्वारा निर्धारित कोटा ( आरक्षित संख्या ) सॉफ्टवेर में दिया गया है / संलग्न किया गया है| ◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◆◆◆ नए मरीज़ द्वारा/ के लिए अपॉइंटमेंट लेने की क्या प्रक्रिया है ? उ. यदि आपके पास रोगी का आधार नं. या रोगी का मोबाइल नं. जो UIDAI के साथ पंजीकृत है, तब केवल एक बार प्रयोग के लिए पासवर्ड (OTP),UIDAI द्वारा मोबाइल पर एस.एम.एस.(SMS) किया जाएगा तथा रोगी को UIDAI पर उपलब्ध निजी जानकारी अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग (OPD) अपॉइंटमेंट के लिए प्रयोग करने की सहमति देनी होगी| रोगी का मोबाइल नं. UIDAI के साथ पंजीकृत न होने की स्थिति में रोगी का नाम ( जैसे की ‘आधार’ में दिया गया है) उपलब्ध कराना होगा तथा UIDAI के साथ जनसांख्यिकी सम्बन्धी सत्यापन करने के बाद रोगी का मोबाइल नं. तथा अन्य विवरण जैसे पता, आयु आदि माँगा जाएगा| यदि प्रयोगकर्ता के पास आधार न. नहीं है तब भी वह ऑनलाइन अपॉइंटमेंट ले सकता है लेकिन अस्पताल से OPD कार्ड लेने से पूर्व रोगी का पहचान पत्र उपलब्ध कराना होगा| प्रयोगकर्ता सरकारी अस्पताल के विभाग का चयन कर सकता है जहां उसे रोगी का परीक्षण/ इलाज करवाना है | इसके बाद प्रयोगकर्ता को OPD अपॉइंटमेंट की विस्तृत जानकारी व स्वीकृति मोबाइल नं. पर मैसेज (sms) द्वारा भेजी जाएगी| ◆◆◆◆◆◆◆◇◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ अस्पताल को आधार नं. देने के क्या फायदे हैं? उ. यदि रोगी पहली बार अस्पताल आने पर ‘आधार नं.’ उपलब्ध करवाता है तो उसे ऑनलाइन अपॉइंटमेंट के लिए वैसी ही प्राथमिकता दी जाएगी जैसी अस्पताल की क़तार/ पंक्ति/ लाइन में खड़ा है और रोगी को विशिष्ट अस्पताल पहचान अंक UHID उपलब्ध कराया जाएगा| भविष्य में रोगी ऑनलाइन भुगतान करके ‘ई-बाह्य रोगी विभाग कार्ड’ (E-OPD card) प्रिंट करवा सकता है यदि रोगी अस्पताल से पुनः परामर्श/ जांच करवाना चाहता है तो उसे अपने आधार नं. को पहले की विशिष्ट अस्पताल पहचान अंक (UHID) के साथ जोड़ना चाहिए जिससे अस्पताल को उसकी बेहतर चिकित्सा के लिए EHR ( ई-स्वास्थ्य विवरण) संभालने में सहायता मिलेगी | रोगी के विशिष्ट पहचान अंक को (UHID) को आधार कार्ड से जोड़ा जाएगा जिससे भविष्य में अन्य अस्पतालों को भी उसका EHR ( ई-स्वास्थ्य विवरण) उपलब्ध कराया जा सके| रोगी का मोबाइल नं. UIDAI के साथ पंजीकृत न होने की स्थिति में रोगी का नाम ( जैसे की ‘आधार’ में दिया गया है) उपलब्ध कराना होगा तथा UIDAI के साथ जनसांख्यिकी सम्बन्धी सत्यापन करने के बाद रोगी का मोबाइल नं. तथा अन्य विवरण जैसे पता, आयु आदि माँगा जाएगा|

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