Thursday, 19 May 2022

Arthritis :- गठिया के कारण

 गठिया (Arthiritis) वह मानव शरीर की वह अवस्था है जिसमें शरीर के जोड़ों में दर्द, उद्दीपन और सूजन पैदा हो जाती है। यह स्तिथि पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं में अधिक पाई जाती है। शुरू में बड़े जोडु प्रभावित होते हैं मगर बाद में वह दूसरे जोड़ों तक फैल जाता है। इसके मुख्य प्रकार है: (1) रयूमेटायड आर्थिराइटिस और 121 ऑस्टियो आर्थिराइटिस। एक तीसरे प्रकार का आर्थिराइटिस प्यूरिन मेटाबोलिज्म (Punn Metabolism) की गड़बड़ी से होता है जिसे गाउट (गठिया) कहते हैं।



यूमेटायड आर्थिराइटिस जोड़ों के कार्टिलेज और सिनोबायल झिल्ली में उद्दीपन से पैदा होता है। इस उद्दोपन से तेल जैसा द्रव, जो जोड़ों की हड्डियों को चिकना रखता और परस्पर रगड़ने से रोकता है, प्रभावित हो जाता है। यह दशा स्ट्रेप्टोकोकस की वजह से पैदा हुए प्रदूषण का नतीजा होती है। स्ट्रेप्टोकोकस से विषैला द्रव रिसने लगता है और वह तैल द्रव को सुख्खा देता है जिससे जोड़ में दर्द? हड्डियों में रगड़ और सूजन पैदा हो जाती है। इस वर्ष से कम आयु के बच्चों में भी कभी-कभी यह गठिया हो जाता है; जोड़ों में दर्द, बुखार और सूजन हो जाती है। कुछ दिन बाद से लक्षण गायब होकर फिर उभर जाते हैं। धीरे-धीरे यह बार-बार होने लगता है। और गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती है। एक पुरानी कहावत है कि “ट्यूमेटॉयड आर्थिराइटिस जोड़ों में रिसाव पैदा करता और दिल को काटता है।" बच्चों को अगर यह रोग हो गया है तो इसके इलाज में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होती है।


ओस्टियो आर्थिराइटिस (Osteo-arthiritis) जोड़ों की हड्डियों के बीच में स्थित उपास्थि (Cartilage) के ह्रास से उत्पन्न हुई छीजन और बाद में उसमें आई विकृति से होता है। जब कार्टिलेज घिसकर खत्म हो जाती है तो जोड़ों की हड्डियां आपस में रगड़ने लगती है। आम तौर से यह जोड़ों के सिरे और मेरुदंड (Spinal Column) यानी रीढ़ में होता है। मामूली या तेज दर्द बड़े जोड़ों में शुरू होता है, लेकिन बाद में यह कहीं भी हो सकता है, प्रभावित स्थान में सूजन भी हो जाती है। जोड़ों की हरकत बाधित हो जाती है और धीरे-धीरे विकृति उत्पन्न हो सकती है। छूने से प्रभावित स्थान लाल और गरम हो जाता है।


रोगी को अपना अधिकाधिक समय गरम और सुविधाजनक स्थान में बिताना चाहिए। प्रभावित भाग को गरम रखें। अधिक प्रकोप की दशा में चलने-फिरने से बचें। शराब, सिगरेट और लाल मांस खाने से बचें। पता करें कि किन चीजों के खाने से अलर्जी बढ़ती है, सूजन पैदा होती है। उन चीजों को अपने आहार से अलग कर दें। मिर्च-मसालेदार और वसायुक्त खाने से परहेज करें। दबाव तनाव को नियंत्रित करें क्योंकि टेंशन से मांसपेशियां सख्त पड़ जाती हैं।

Sunday, 15 May 2022

SBI नया एटीएम ऑनलाइन एक्टिव करें

 यदि आप आने sbi बैंक का नया एटीएम बनवाया है तो उसे घर बैठे चालू कर सकते है। इसके लिए आपके पास नेट बैंकिंग होना आवश्यक है। 

सवर्प्रथम आप योनो मे लॉगिन हो जाये। उसके बाद service request पर क्लिक करे। 



 इसके बाद  ATM/DEBIT CARD के ऑप्शन आएगा उस पर क्लिक कीजिए। 

इसके बाद INTERNET BANKING PROFILE PASSWORD का ऑप्शन चुनें और उसपर अपना प्रोफाइल पासवर्ड एंटर करें।
 
इसके बाद  ACTIVATE CARD का ऑप्शन चुनें और उसपर क्लिक करें। 


इसके बाद इसमें कार्ड नंबर एंटर करेंगे और CVV नंबर एटीएम का वैलिडिटी डेट एंटर करेंगे। और ACTIVATE बटन पर क्लिक करें।





Thursday, 23 December 2021

फलों की रानी नारंगी-गुणकारी

 आम फलोंका राजा है तो फलों की रानी बननेके सभी गुण नारंगीमें हैं, इसी कारण नारंगीको फलों की रानी कहा जाता है।◆आयुर्वेदके ग्रन्थों में नारंगी का उल्लेख मिलता है-

'नारङ्गो मधुराम्लः स्याद्रोचनो वातनाशनः' (निघंटु, मिश्रप्र०

६। ६३)। सुश्रुतसंहितामें लिखा है-

अम्लं समधुरं हृद्यं विशदं भक्तिरोचनम्। वातघ्नं दुर्जरं प्रोक्तं नारङ्गस्य फलं गुरु।।

अर्थात् नारंगी अम्ल, मधुर, हृदयके लिये प्रिय, विशद, भोजनमें रुचिकर, वातनाशक, दुर्जर तथा गुरुपाकी (देरमें पचनेवाला) होता है।

नारंगीकी विशेषता यह है कि इसमें विद्यमान फ्रक्टोज, डेक्स्ट्रोज, खनिज एवं विटामिन-ये शरीरमें पहुँचते ही ऊर्जा देना शुरू कर देते हैं। इसका रस देर से पचता है। नारंगी में प्रचुर मात्रामें विटामिन 'सी' है। पोटैशियम एवं लोहा उच्चमानका है। नारंगी-सेवनसे हृदय, स्नायु- संस्थान तथा मस्तिष्कमें नयी शक्ति आ जाती है। बच्चे- बूढ़े, रोगी और दुबले-पतले लोग अपनी निर्बलता दूर करनेके लिये इसके सेवनसे लाभ उठा सकते हैं। तेज बुखारमें इसके सेवनसे तापमान कम हो जाता है।

इसका साइट्रिक एसिड मूत्ररोगों और किडनी रोगोंको दूर करता है। इससे मूत्र साफ आता है। किडनी-रोगसे बचनेके लिये नारंगीका सेवन करना चाहिये। छोटे बच्चोंको स्वस्थ और सुपुष्ट बनानेके लिये दूधमें चौथाई भाग मीठी नारंगीका रस मिलाकर पिलाना चाहिये। यह उनके लिये एक आदर्श टॉनिक है। इससे

बच्चोंमें नयी ऊर्जा, नयी शक्ति और नया उत्साह आ जाता है। दाँत निकलते समय बच्चोंको उलटी होती है तथा हरे-पीले दस्त होते हैं। इनमें नारंगी-रस देनेसे उनकी बेचैनी दूर होती है तथा पाचनशक्ति बढ़ जाती है। दाँतों और मसूढ़ोंके रोग भी इसके सेवनसे दूर होते हैं।

◆ शरीर से दुर्बल, गर्भवती महिलाओं, कब्ज, बवासीर, बेरी-बेरी, अपच, पेटमें गैस, जोड़ोंका दर्द, गठिया, ब्लडप्रेशर, चर्मरोग, यकृत्-रोगसे ग्रस्त रोगियोंके लिये नारंगीका रस परम लाभकारी है। जिन्हें दूध नहीं पचता हैं या जो केवल दूध पर निर्भर हैं, उन्हें नारंगी का रस में अवश्य सेवन करना चाहिये। दूधमें विटामिन 'बी* कम्पलेक्स' नहीं के बराबर है। अतः इसकी पूर्ति नारंगी के सेवन से हो जाती है।

◆मुँहासे, कील और झाँई तथा चेहरेके साँवलेपनको - दूर करनेके लिये नारंगीके सुखाये छिलकोंका महीनचूर्ण गुलाब-जल या कच्चे दूधमें मिलाकर पीसकर आधा घंटातक लेप लगाये, इससे कुछ दिनोंमें चेहरा साफ, सुन्दर और कान्तिमान् हो जायगा। नारंगी सर्वरोगनाशक और शरीरके लिये परम को हितकारी फल है। खट्टी नारंगीका सेवन बच्चों-बूढ़ों, से गर्भवती महिलाओं, अम्लपित्त एवं पेटमें अल्सरवालों के लिये निषिद्ध है।

-सौजन्य आरोग्य अंक

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Saturday, 27 November 2021

कंप्यूटर का स्टार्ट बटन हैंग होना

 लैपटॉप या डेस्कटॉप का स्टार्ट बटन कार्य नही करने पर क्या करें ?



@ यदि आपके कंप्यूटर का स्टार्टअप बटन काम नही कर रहा है तो आप अपने लैपटॉप का बंद नही कर पा रहे है ।

तो इस समस्या से निजात पाने के लिए ये पांच तरीके अपनाए ।

1. Ctrl+Alt+Delete बटन एक साथ दबाकर टास्क मैनेजर को ओपन कर ले।

इसके बाद विंडो एक्सप्लोरर पर क्लिक करे। उसको पुनः स्टार्ट पर क्लिक करके स्टार्ट करें।

स्टार्ट बटन कार्य करने लगेगा।

 

Saturday, 6 February 2021

मिज़ोरम एक रमणिक प्रदेश

 मिज़ोरम

मिज़ोरम भारत वर्ष का सुंदर और रमणीक राज्य है। 

मिज़ोरम का क्षेत्रफल  20.987 वर्ग कि.मी है। मिज़ोरम की राजधानी आइजोल है। इस राज्य की  भाषायें: मिजों और अंग्रेजी है। मिज़ोरम में कुल जिले 8 है। मिज़ोरम की जनसंख्या 10,97,206 ( दस लाख इक्यानवे हज़ार चौदह) है जिनमे पुरुषों की संख्या  459,.783 और महिलाएं : 431.275 है। 

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वर्तमान जनसंख्या-10,91,014 है। वर्तमान क्षेत्रफल 21,081 वर्ग किलोमीटर है। 

वानतांग जलप्रपात मिज़ोरम में सबसे ऊंचा और अति सुंदर जलप्रपात है। यह थेनेज़ोल कस्बे से पांच किलोमीटर दूर है। 



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मिज़ोरम की जनसंख्या वृद्धि दर (1991-2001) 29.18% थी। जनसंख्या घनत्व  42 व्यक्ति प्रति वर्ग-किलोमीटर है।  इस राज्य की शहरी जनसंख्या लगभग 49.50% है। मिज़ोरम में लिंगानुपात  महिलाएं (प्रति-हजार पुरुष में ) सन्-2001 में  938 , 2011 में 975  थी। मिज़ोरम की साक्षरता दर 88.49%.है। जिनमे पुरुष की साक्षरता  90.69%  और  महिलाएं की  साक्षरता 86.13% है। मिज़ोरम की प्रति व्यक्ति आय 5.910 रु है।

स्थानीय भाषा में मिज़ोरम का अर्थ मिजों भूमि है । मिजो

शब्द का अर्थ  पहाड़ वासी होता है।  ब्रिटिश प्रशासन में मिजोरम का नाम "लुशाई पहाड़ी" जिला था। 1954 में संसद द्वारा पास किये गये अधिनियम के आधार पर इसका नाम मिजो पहाड़ी जिला रखा गया।1972 में जब इस प्रदेश को संघ शासित प्रदेश बनाया गया, तो इस राज्य का नाम मिजोरम रखा गया। भू-आकृति: मिज़ोरम भारत के पूर्वोत्तर कोने में स्थित है।

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इसके उत्तर में कछार जिला (असम) और मणिपुर राज्य, पूर्व और दक्षिण में चीन पहाड़ियां और अराकान (बर्मा), और पश्चिम में बंगलादेश की चटगांव पहाड़ी पट्टी व त्रिपुरा राज्य हैं। केंद्र सरकार और मिजो नेशनल फ्रेंट को बीच शांति समझौते के बाद तिरपनवें संविधान संशोधन अधिनियम के साथ मिजोरम 20 फरवरी 1987 को भारत संघ का 23-वां राज्य बन गया। इस राज्य के  ऊपरी क्षेत्रों में जलवायु सुखद होती है। गर्मी में ठंडक होती है और जाड़ों में अधिक सर्दी नहीं पड़ती। मई से सितंबर तक औसत वर्षा 254 से.मी. होती है ।

इतिहासः मिजो लोग मंगोलियन नस्ल के हैं । लगता है कि शुरू में मिजो लोग बर्मा देश  में शान राज्य में बसे थे।

ब्रिटिश शासन काल में मिज़ो लोग ब्रिटिश प्रदेशों, यहां तक कि सुरक्षित स्थानों पर भी, आक्रमण करते थे । अतः ब्रिटिश सेना ने मिज़ो लोगों के खिलाफ कार्यवाही आरंभ की और उनके इलाके पर कब्जा कर लिया। सन् 1891 में इस इलाके को ब्रिटिश भारत में मिला लिया गया ।

देश के आजाद होने पर मिजोरम असम का एक जिला बना रहा था। अधिकारियों ने मिज़ोरम की उपेक्षा की है। इस आरोप पर 1966 में आदोलन शुर्त कर दिया गया ।

मिजोरम को अशांत क्षेत्र घोषित कर दिया गया । सशस्त्र सेनायें (विशेष शक्तियां) अधिनियम भी लागू कर दिया गया। 30 जून 1986 को भारत सरकार और मिजों नेशनल फ्रंट के बीच मिज़ोरम शांति समझौता हो गया।

मिजों लोगों के अनेक कबीले हैं - जुशाई, पवई, पैथ. राल्ते पेंग, हमार कुकी, मारा, लाखे आदि। 

 19 वीं शताब्दी में मिज़ो लोग इसाई धर्म प्रचारकों के प्रभाव में आये और बहुत-से मिज़ो लोगों ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया।

प्रशासनः मिजोरम विधान सभा में 40 सीटें है। 8 जिले हैं, 9 प्रखंड है। 3 हिल्स जिला परिषद है।  मिज़ोरम में  23 शहर, 31 पुलिस स्टेशन और 681गांव हैं।  वानतांग जलप्रपात मिज़ोरम में सबसे ऊंचा और अति सुंदर जलप्रपात है। यह थेनजोल कस्बे से पांच किलोमीटर दूर है। म्यांमार की सीमा के निकट चमफाई एक सुंदर पर्यटन स्थल है। तामदिल एक प्राकृतिक झील है जहां मनोहारी वन हैं। 

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मिज़ोरम में एक भात्र उद्यम कृषि है। यह राज्य अपनी बिना रेशे वाली अदरक के लिए विख्यात है। अन्य व्यापारिक फसलें जैसे सरसों, तिल, आलू आदि भी उगायी जाती है ।

सबसे प्रमुख खाद्यान्न फसल धान है। दुसरे नंबर पर मक्का है। पहाड़ियों की ढाल पर इनकी खेती होती है ।

1999-00 में धान की फसल का कुल क्षेत्र 62,452 हैक्टेयर था । कृषि उपज बढ़ाने के रास्ते में एक बड़ी बाधा सिंचाई सुविधाओं का अभाव है मिजोरम में केवल 2885.30

हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है । मिजोरम में कोई बड़ा उद्योग नहीं है। इस इलाके की प्रमुख औद्योगिक गतिविधियां हथकरघा और दस्तकारी हैं। एक इंजीनियरिंग कारखाने ने बिनौले अलग करने और कपास को धुनने की एक मशीन की डिजाइन तैयार की है। चार किस्म रेशम का तैयार होता है - शहतूत के पत्तों का रेशम, एरी रेशम, टसर रेशम और मूंगा रेशम।

अन्य उद्योग है - अदरक के पेय, तेल, फल परिरक्षण, हथकरघा और इनके अलावा बिस्कुट-डबल रोटी, छमपाखाना, आरा मशीन, ईटें बनाना, साबुन बनाना जैसे अन्य छोटे पैमाने के और कुटीर उद्योग हैं।

विश्वविद्यालय: एन. ई. एच. यू. नार्थ ईस्स्ट हिल्स युनिवस्सिटी

Friday, 5 February 2021

पृथ्वी की भूवैज्ञानिक समय सारणी

पृथ्वी के भूवैज्ञानिक समय सारणी को महकल्पों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक महकल्प को अनेक कल्पों में , व प्रत्येक कल्प को अनेक युगों में बाँटा गया है। 

भूवैज्ञानिक इतिहास में पृथ्वी के अंतिम महाकल्प को नूतनजीव महाकल्प कहा जाता है। 




पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास का अध्ययन करने से पूर्व कुछ विशिष्ट शब्दावली के बारे जानकारी प्राप्त करना आवश्यक है।

1. EON (आयु) - इनमें प्री- कैम्ब्रियन के अंतर्गत आने वाले तीन EON है।  1. हेडियन(Eozoic), 2.आर्कियन (Archaeozoic), 3.प्रोटोरोज़ोइक (Proterozoic) है। 

और कैम्ब्रियन काल के अंतर्गत आने वाले एक EON              फेनेरोज़ोइक (Phenerozoic) है।

 ◆ रेडियोधर्मी तथ्यों के आधार पर पृथ्वी के निर्माण से वर्तमान तक के समय को चार EON (आयु) में बाँटा गया हैं।

प्री-कैम्ब्रियन(4.6अरब वर्ष पूर्व से 57करोड़ वर्ष पूर्व तक)|

1.हेडियन(HADEAN):-(4.6 अरब वर्ष पूर्व से       3.8अरब वर्ष पूर्व)

2.आर्कियन्(ARCHEAN):-(3.8 अरब वर्ष पूर्व से 2.5 अरब वर्ष पूर्व)

3. प्रोटोरोज़ोइक:-(2.5 अरब वर्ष पूर्व से 57 करोड़ वर्ष पूर्व)

◆ कैम्ब्रियन काल 

4.फेनेरोज़ोइक (57 करोड़ वर्ष पूर्व से वर्तमान तक का समय)

पूर्व कैम्ब्रियन या आध्य अवधि

पृथ्वी की उत्पत्ति के बाद एक शांत समय की उपस्थिति स्वीकार की जाती है। जिसके बारे में अभी तक कोई विशिष्ट जानकारी का अभाव है। इस अवधि के तीन उपविभाग है।

1. हेडियन या Eozoic EON (इयोजोइक-आयु)

2.आर्कियोजोइक आयु (Archaeozoic-EON)

3.प्रोटोरोज़ोइक आयु (Proterozoic-EON)










Aristotle's view of matter

 

Aristotle's view of matter:
Greek philosopher Aristotle (384-322 B.C.)
believed that all material things are made up of four Primary or elementary substances : fire, air, water, and earth. He also believed that these substances differed in two properties; hot versus cold and dry versus wet. The
primary substances can be represented as the edges of a square, and each one is flanked by their associated properties on the corners of the square. For example, cold and dry are the properties associated with the substance
earth. In Aristotle's philosophy of matter, a piece of wood must contain a lot of earth because he thought that the wood felt cold and dry.






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 इंजन स्टार्ट होते ही मेन बैंक सापट के गियर से चाल लेकर Auxiliary जनरेटर का आमेचर घूमना शुरू कर देता है जो स्वंय के बनाये गये करन्ट से इसकी ...