Friday, 28 August 2020

कोशी नदी

कोसी नदी गंगा की सहायक नदी है, जो नेपाल के पहाड़ों से निकल कर नेपाल और बिहार में बहती हुई राजमहल (बिहार) के निकट गंगा में मिल जाती है। इसे बिहार का शोक भी कहा जाता है।
यह नदी नेपाल और उत्तरी भारत में बहती है। यह नदी अपनी सहायक नदियों के साथ कोसी नेपाल के पूर्वी तीसरे हिस्से व तिब्बत के कुछ हिस्से को अपवाहित करती है, जिसमें माउंट एवरेस्ट के आसपास का क्षेत्र शामिल हैं। इसकी कुछ प्रारंभिक धाराएँ नेपाल की सीमा के पार तिब्बत से निकलती है। भारत-नेपाल सीमा से लगभग 48 किमी उत्तर में कोसी में कई प्रमुख सहायक नदियाँ मिलती हैं और यह संकरे छत्र महाखड्ड से     शिवालिक  कि पहारियॉ से होते हुए दक्षिण दिशा में मुड़ जाती है। इसके बाद कोसी नदी उत्तर भारत के विशाल मैदान में बिहार में अवतरित होकर गंगा नदी की ओर बढ़ती है, जहाँ यह लगभग 724 किमी की यात्रा के बाद पूर्णिया के दक्षिण में गंगा से मिलती है। लगातार भारी मात्रा में मलबा बहाकर जमा करते रहने के कारण उत्तरी भारत के विशाल मैदान में कोसी की अपनी कोई स्थायी धारा नहीं है।

Sunday, 12 July 2020

डी.आर.डी.ओ छात्रवृत्ति योजना

भारत सरकार के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डी.आर.डी.ओ) की छात्रवृत्ति योजना उन छात्राओं के लिए है, जिन्होंने यूजी और मास्टर कोर्स में दाखिला लिया है। इस योजना का उद्देश्य छात्राओं की योग्यता को निखारना और राष्ट्रहित में इस्तेमाल करना है।


योग्यता
*आवेदक के पास भारत की नागरिकता होनी चाहिए । किसी अन्य देश के नागरिक इस छात्रवृत्ति के योग्य नहीं होते हैं।
*आवेदक स्नातक (ग्रेजुएट) या स्नातकोत्तर (पीजी) की प्रथम वर्ष की छात्रा हो, और उसने बीई, बीटेक, बीएससी इंजीनियरिंग, एमई, एमटेक या एमएससी इंजीनियरिंग में दाखिला लिया हो।
वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग, स्पेस इंजीनियरिंग एंड रॉकेटरी, एवियोनिक्स या एयरक्राफ्ट इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही हो।
* अंतर-स्नातक वर्ग में आवेदन करने वाली छात्राओं ने बेहतर अंकों के साथ जेईई (मेन्स) भी पास किया हो, जबकि परा स्नातक की छात्राओं के पास गेट के साथ-साथ स्नातक में 60 फीसदी अंक होने का सर्टिफिकेट होना चाहिए।
इंटिग्रेटेड मास्टर डिग्री करने वाली छात्राएं भी छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकती हैं।
प्रारूप
छात्रवृत्ति के लिए कुल 30 छात्राओं (20 अंतर- स्नातक वर्ग में और 10 परा-स्नातक वर्ग में) का चयन किया जाता हैं।
अंतर-स्नातक की छात्राओं को 1.20 लाख रुपये वार्षिक (अधिकतम 4 वर्षों तक)  छात्रवृत्ति दी जा सकती है, जबकि परा-स्नातक की छात्राओं को दो वर्षों तक 1.86 लाख रुपये वार्षिक के हिसाब से छात्रवृत्ति मिलेगी।
संतोषजनक शैक्षणिक प्रदर्शन नहीं करने पर छात्रवृत्ति की राशि रोकी भी जा सकती है।
* आवेदन करने की प्रक्रिया
आवेदन की प्रक्रिया ऑनलाइन होती है। ऑफलाइन
आवेदन पर ध्यान नहीं किया जाएगा।
◆ सवर्प्रथम रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है, उसके बाद ही आवेदन-पत्र भरे जा सकेंगे।
◆ आवेदन करते समय ज़रूरी दस्तावेजों को भी स्कैन करके
अपलोड करने होंगे। दस्तावेजों में सभी जरूरी सर्टिफिकेट, आधार कार्ड, शिक्षण संस्थान में दाखिले की रसीद और फीस की रसीद आदि शामिल रहती हैं।
◆ आवेदन-पत्र में आपको अपना फोटोग्राफ भी अपलोड करना होताा है।
◆ आवेदन-पत्र भरने के बाद भविष्य के लिए उसका प्रिंटआउट संभालकर रख लें।
अंतिम तिथि के बाद आवेदन-पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
◆ बिना जरूरी दस्तावेजों के या आधे-अधूरे भरे गए
आवेदन-पत्र भी खारिज कर दिए जाएंगे।
अंतिम तिथिः 30 सितंबर, 2020
वेबसाइटः www.rac.gov.in

Sunday, 31 May 2020

प्रेरणादायक कार्य :- गमले में ऑर्गेनिक खेती

कोरोना संकट में हुए लॉकडाउन मेंलोग घरों से निकलने से परहेज कर रहे हैं। यहां तक की सब्जियां खरीदने भी नहीं जा रहे हैं। जो।खरीदकर लाते हैं वे भी डिटर्जेंट यानमक-पानी से धोकर प्रयोग कर रह।हैं। ऐसे में घर में किचन या रूफ टॉप या वेजीटेबल गार्डेन बेहतर विकल्प बन सकता है। शहर के एक परिवार ऐसा हैं जहां 10 सदस्य हैं। परिवार पूरे लॉकडाउन में हरी सब्जी खरीदने बाजार नहीं जाते है।
इनका परिवार छत पर गमले में लगाए सब्जी के पौधों से ही नित्य दिन का काम चला रहे है।

एक निजी कंपनी में कार्यरत और पटना के भीखनपुर के नया टोला निवासी राजेश कुमार तिवारी अपने दादाजी से प्रेरित होकर किचन गार्डेन वर्षों से चला रहे हैं।
करीब चार कट्टे के घर में छत पर करीब 70 गमला रखे हैं जिसमें से 46 गमले में सब्जी लगाए हैं। इस गार्डेन के लिए बीज कोलकाता और।लोकल बाजार से लाते हैं। वहीं इसमें वर्मी कंपोस्ट डाल पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती करते हैं। पौधों में बीमारी या कीड़ा लगने पर नीम, खैनी और गोमूत्र का प्रयोग करते हैं।
वहीं दूसरी ओर घर की छतों पर और आंगन में फल और सब्जी लगाकर सेवानिवृत्त शिक्षक रामदेव
सिंह आत्मनिर्भर बने हुए हैं। लॉकडाउन के दौरान एक दिन भी वह सब्जी और फल के लिए घर से
बाहर नहीं गए हैं।

नोट:- किचन गार्डन के लिए मिलती है सरकारी सहायता
बीएयू के वैज्ञानिक सब्जी विभाग के अध्यक्ष डॉ. रंधीर ने कहा कि रूफ टॉप गार्डेन या किचन गार्डेन के लिए सरकार की ओर से आर्थिक सहायता दी जाती है। शेडनेट, पॉटस, प्लास्टिक, बेड, ड्रिप इरिगेशन के लिए यह सहायता मिलती है। यह स्वस्थ और सुरक्षित सब्जी का विकल्प बन सकता है। सहायक निदेशक उद्यान अजय कुमार सिंह ने बताया कि 'रूफ टॉप गार्डनिंग योजना के तहत 50 हजार रुपए के प्राजेक्ट में 25 हजार रुपए अनुदान मिलते हैं।
सौजन्य:- दैनिक हिंदुस्तान :- 20 मई,20 पटना संस्करण

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